Delhi HC: कोर्ट ने कहा कि केस डायरी जांच की पुष्टि के लिए बेहद जरूरी दस्तावेज है।
केस डायरी की फाेटोकॉपी पर बिफरा कोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती के बाद यह आश्वासन उस वक्त दिया गया जब जस्टिस गिरीश कठपालिया ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि जांच अधिकारी असली केस डायरी नहीं लाया, सिर्फ फोटोकॉपी लेकर आया है। पिछले कुछ हफ्तों से देखा जा रहा है कि जांच अधिकारी केस डायरी लेकर कोर्ट नहीं आ रहे हैं। इसके बाद सरकारी वकील (एपीपी) ने कोर्ट को बताया कि अब सभी आईओ केस डायरी पेश करेंगे।
छह धाराओं में दर्ज था केस, आरोपी को नहीं पहचान पाए गवाह
यह मामला एक लूट के केस में जमानत याचिका से जुड़ा था। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 309(4), 309(6), 311 और 3(5) और आर्म्स एक्ट की धारा 25, 27, 54 और 59 के तहत केस दर्ज था। आरोप था कि लूट में इस्तेमाल स्कूटर आरोपी के पास से मिला। हालांकि, वह तीन लुटेरों में शामिल नहीं था।
आरोपी ने कहा, वह निर्दोष है
आरोपी ने कोर्ट में कहा कि वह निर्दोष है और उसे झूठा फंसाया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि गवाह उसे पहचान नहीं पाए। जांच फाइल देखने के बाद कोर्ट ने पाया कि स्कूटर एक पार्क में सूखे पौधों के नीचे से मिला था, न कि आरोपी के घर या उसकी सीधी मौजूदगी से।
कोर्ट ने दी जमानत, कहा- 10 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करें
इन तथ्यों को देखते हुए कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि आरोपी को 10 हजार रुपए के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के एक जमानती पर रिहा किया जाए।
मर्डर केस में भी जमानत, आईओ की लापरवाही पर नाराजगी
इसी तरह के एक और मामले में जस्टिस कठपालिया ने हत्या के आरोपी को जमानत दी। इस केस में भी जांच अधिकारी बिना पूरी केस फाइल और डायरी के कोर्ट पहुंचा था। कोर्ट ने इस लापरवाही पर नाराजगी जताई।

