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Delhi News:अस्पताल जाए तब विवाहिता पर क्रूरता साबित हो…धारा 498 ए की एक शर्त पर हाईकोर्ट ने कह दी बड़ी बात…

Delhi News: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि आईपीसी की धारा 498 ए केवल शारीरिक शोषण ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार की क्रूरता से पीड़ित महिलाओं की दुर्दशा को संबोधित करने के लिए बनाई गई थी। इसे लागू करने के लिए अस्पताल में भर्ती होने की पूर्व से चली आ रही शर्त से इसका उद्देश्य ही नष्ट हो जाएगा।

बंद दरवाजों के पीछे दुर्व्यवहार सह रही विवाहिता…

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि क्रूरता में मानसिक, भावनात्मक और वित्तीय शोषण शामिल है और अस्पताल में अनिवार्य रूप से भर्ती होने से उन अनगिनत महिलाओं के लिए न्याय के दरवाजे बंद हो जाएंगे, जो बंद दरवाजों के पीछे दुर्व्यवहार सहती हैं। अदालत ने एक व्यक्ति की उस याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें उसने अपनी अलग रह रही पत्नी द्वारा कथित क्रूरता और दहेज की मांग के मामले में अग्रिम जमानत की मांग की थी।

अस्पताल में शिकायकर्ता पाया गया…यह तर्क को नकारा

पति ने कहा कि वर्तमान मामला शादी में सामान्य टूट-फूट का मामला है, न कि ऐसा मामला जिसमें शिकायतकर्ता अस्पताल में पाया गया था। उनके तर्क को निराधार बताते हुए अदालत ने कहा कि ऐसी संकीर्ण व्याख्या, जिसके तहत क्रूरता का आरोप लगाने के लिए एक महिला को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है। यह प्रावधान को अप्रभावी बना देगी। कई पीड़ितों को चुप करा देगी और दुर्व्यवहार के चक्र को कायम रखेगी।

अदालत ने धारा 498 ए पर टिप्पणी की

14 जनवरी को अपने आदेश में कहा कि इस तरह के तर्क को प्रबल करने की अनुमति देना कि धारा 498 ए लागू करने के लिए अस्पताल में भर्ती होना एक पूर्व शर्त है, प्रावधान के मूल उद्देश्य को नष्ट कर देगा। आईपीसी की धारा 498 ए उन महिलाओं की दुर्दशा को संबोधित करने के लिए बनाई गई थी जो न केवल शारीरिक शोषण के कारण, बल्कि विभिन्न प्रकार की क्रूरता से पीड़ित होती हैं।

अनगिनत महिलाओं के लिए न्याय के दरवाजे बंद कर देगा…

अदालत ने आगे कहा कि अगर ऐसी विचारधारा को बढ़ने दिया गया, तो यह उन अनगिनत महिलाओं के लिए न्याय के दरवाजे बंद कर देगा, जिन्होंने बंद दरवाजों के पीछे दुर्व्यवहार सहा, जिससे वे संकटपूर्ण और दमनकारी माहौल में फंस गईं। इसमें कहा गया है, ऐसा परिप्रेक्ष्य क्रूरता की बहुमुखी प्रकृति को पहचानने में विफल रहता है, जिसमें मानसिक, भावनात्मक और वित्तीय शोषण शामिल है, जो सभी समान रूप से हानिकारक हैं और धारा 498 ए के दायरे में आते हैं।

पत्नी के आभूषण व अन्य निजी समान छीन लेने का है मामला

अदालत ने कहा कि वर्तमान मामले में, शिकायत गंभीर और परेशान करने वाली प्रकृति की थी क्योंकि इसमें आरोप लगाया गया था कि आरोपी ने न केवल अपनी पत्नी को गंभीर उत्पीड़न और मानसिक आघात पहुंचाया, बल्कि उसके आभूषण और अन्य निजी सामान भी अपने पास रख लिया।

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