Friday, October 2, 2026
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Justice in Ladakh: पहाड़ ऊंचे हो सकते हैं, पर संविधान पीछे नहीं हटता; कारगिल में बोले CJI सूर्यकांत

Justice in Ladakh: कारगिल में नए जिला न्यायालय परिसर के उद्घाटन के मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने एक बेहद प्रेरक संदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने रविवार को कारगिल में नए जिला न्यायालय परिसर (District Court Complex) का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने लद्दाख के दुर्गम क्षेत्रों में न्याय वितरण की चुनौतियों और न्यायिक ढांचे के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय की पहुंच भौगोलिक सीमाओं या कठिन रास्तों की मोहताज नहीं होनी चाहिए।

CJI का मुख्य संदेश: संविधान और भूगोल

  • CJI ने स्पष्ट किया कि न्याय केवल शहरों तक सीमित नहीं है।
  • अटूट भरोसा: कारगिल में कोर्ट का होना इस बात का आश्वासन है कि कठिन रास्तों पर चलते हुए संविधान पीछे नहीं हटता। न्याय यहाँ भी मौजूद है, सुलभ है और जीवित है।
  • उम्मीद का केंद्र: उन्होंने इस नए परिसर को एक ‘नखलिस्तान’ (Oasis) बताया, जहाँ अनसुने लोगों की सुनवाई होगी और अनिश्चितता के साथ आने वाले लोग आशा लेकर लौटेंगे।

कारगिल का महत्व: केवल ‘याद’ नहीं, ‘मजबूती’ भी

  • CJI ने क्षेत्र के ऐतिहासिक और सामरिक महत्व को याद किया।
  • शांति में शक्ति: कारगिल को केवल युद्ध और बलिदान की यादों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि शांति के समय में इसे संस्थानों के जरिए मजबूत किया जाना चाहिए।
  • राष्ट्र का संकल्प: जिस राष्ट्र ने बलिदानों का सम्मान किया है, वही राष्ट्र अपने लोगों को गरिमा और न्याय के साथ सेवा देने के लिए भी अडिग खड़ा है।

न्यायिक अधिकारियों का सम्मान

  • CJI सूर्यकांत ने विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाले स्टाफ की सराहना की।
  • चुनौतीपूर्ण सेवा: यहां के न्यायिक अधिकारी और कर्मचारी अपने परिवारों से दूर, बेहद कठोर जलवायु में कानून की रक्षा कर रहे हैं। उनका काम न केवल पहचान का हकदार है, बल्कि उन्हें पूर्ण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का समर्थन भी मिलना चाहिए।
  • दूरी और देरी का अंत: उन्होंने उम्मीद जताई कि यह नया परिसर वकीलों और वादियों को यह महसूस कराएगा कि कानून उनके साथ खड़ा है और न्याय अब दूर या अगम्य नहीं रहेगा।

बुनियादी ढांचे का गहरा अर्थ

लद्दाख जैसे कठिन भूगोल वाले क्षेत्र में कोर्ट तक पहुंचना धैर्य और मेहनत का काम है। CJI के अनुसार, यहां न्यायिक इंफ्रास्ट्रक्चर का मतलब केवल एक इमारत नहीं, बल्कि राज्य की उस प्रतिबद्धता का प्रतिबिंब है कि न्याय हर नागरिक तक पहुँचेगा।

यह रहा अदालत का निष्कर्ष: न्याय की नई ऊंचाई

कारगिल में इस आधुनिक कोर्ट परिसर का उद्घाटन न्यायिक विकेंद्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह संदेश देता है कि भारत का संविधान हिमालय की चोटियों जितनी ही ऊंचाई और मजबूती के साथ हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा करता है।

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