Divorced woman: गुजरात हाईकोर्ट ने तलाकशुदा महिला की याचिका मंजूर की, कहा– बच्चों की कस्टडी मां के पास है, NOC की जरूरत नहीं है।
मां के पास है बच्चों की कस्टडी
गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को एक तलाकशुदा महिला की याचिका स्वीकार करते हुए उसके नाबालिग बच्चों के पासपोर्ट रिन्यू कराने की अनुमति दी, जिसे पासपोर्ट विभाग ने पिता की नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) न होने के आधार पर खारिज कर दिया था। जस्टिस एल. एस. पीरजादा की एकल पीठ ने कहा कि यह विवादित नहीं है कि मां और पिता के बीच तलाक हो चुका है, और आपसी समझौते (MoU) के अनुसार बच्चों की कस्टडी मां के पास है।
पिता की सहमति या NOC की आवश्यकता नहीं रह जाती
अदालत ने कहा कि पासपोर्ट नियम, 1980 के शेड्यूल-II की धारा 4(3) के अनुसार, कोई भी अलग रह रही या तलाकशुदा माता-पिता में से एक “सिंगल पैरेंट” मानी जाती है और वह नाबालिग बच्चों के लिए पासपोर्ट आवेदन कर सकती है। जस्टिस पीरजादा ने कहा, “जब तलाक का डिक्री मौजूद है और बच्चों की कस्टडी मां को दी गई है, तब पिता की सहमति या NOC की आवश्यकता नहीं रह जाती।”
SAT परीक्षा देने वाली बेटी को पासपोर्ट न मिलने से दिक्कत
महिला ने अदालत को बताया कि उसकी बेटी को SAT परीक्षा में शामिल होना है, जिसके लिए पासपोर्ट की जरूरत है। लेकिन जब वह पासपोर्ट ऑफिस पहुंचीं तो अधिकारियों ने पिता की NOC न होने के कारण आवेदन स्वीकार नहीं किया और 12 अगस्त 2025 को इसे अस्वीकृत कर दिया। महिला ने कहा कि इस समय पिता की सहमति लेना संभव नहीं है, और यदि पासपोर्ट न बना तो बच्ची को भारी नुकसान होगा।
हाईकोर्ट का आदेश – 1 हफ्ते में पासपोर्ट रिन्यू करें
कोर्ट ने कहा, “याचिकाकर्ता संख्या 3 (मां) द्वारा सिंगल पैरेंट के रूप में किया गया आवेदन स्वीकार किया जाए। क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी आवेदन 11 जुलाई 2025 को प्रस्तुत तारीख मानते हुए दोनों नाबालिग बच्चों के पासपोर्ट जल्द से जल्द, अधिमानतः एक सप्ताह में रिन्यू करें।”
तलाक आपसी सहमति से हुआ था
मां और पिता ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13बी के तहत आपसी सहमति से तलाक लिया था। फैमिली कोर्ट ने 10 अगस्त 2022 को तलाक का डिक्री जारी किया था। उसके बाद दोनों के बीच हुए MoU में तय हुआ था कि बच्चों की देखरेख और जिम्मेदारी मां की होगी।
IN THE HIGH COURT OF GUJARAT AT AHMEDABAD
R/SPECIAL CIVIL APPLICATION NO. 14738 of 2025

