Tuesday, August 4, 2026
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Delhi HC: कोर्ट की कमिश्नर को पिस्तौल दिखाई…फिर यह हुई सजा, हैरान रह जाएंगे

Delhi HC: दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, कोर्ट के आदेश में बाधा डालने की सोची-समझी कोशिश, माफ़ी सिर्फ दिखावा है।

स्वत: संज्ञान (suo motu) में कार्यवाही की

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक व्यक्ति को कोर्ट द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर को पिस्तौल दिखाकर धमकाने के मामले में एक महीने की साधारण कैद और ₹2,000 जुर्माने की सजा सुनाई। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने आरोपी नितिन बंसल को आपराधिक अवमानना (criminal contempt) का दोषी ठहराया और उनके खिलाफ शुरू की गई स्वत: संज्ञान (suo motu) कार्यवाही निपटा दी।

आरोपी को स्वेच्छा से सरेंडर करने के निर्देश

कोर्ट ने आदेश में कहा, “अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 के तहत अभियुक्त को एक माह की साधारण कैद और ₹2,000 जुर्माने की सजा दी जाती है। यदि जुर्माना अदा नहीं किया जाता, तो सजा 15 दिन और बढ़ाई जाएगी।” अदालत ने बंसल को तिहाड़ जेल के अधीक्षक के सामने स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। यदि वह तय तारीख तक सरेंडर नहीं करता, तो जेल प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की छूट दी गई है।

महिला कमिश्नर को डराने की कोशिश…पिस्तौल रख दी मेज़ पर

मामला लगभग 30,000 टन औद्योगिक कोयले के निस्तारण से जुड़ा है। मई 2023 में बंसल के पिता को कोयले से संबंधित लेन-देन करने से रोका गया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अवमानना का आरोप लगाते हुए लोकल कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की थी। जुलाई 2023 में एक महिला लोकल कमिश्नर को फरीदाबाद के एक स्थल पर भेजा गया। वह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचीं। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि बंसल ने पूरी तरह असहयोग किया और उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की। रिपोर्ट के अनुसार, कार्यवाही के दौरान बंसल ने मेज़ पर पिस्तौल रख दी, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने हथियार जब्त कर लिया, क्योंकि उसे बिना लाइसेंस का हथियार माना गया। बाद में बंसल के खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया।

“टॉय गन” का बहाना झूठा साबित

अवमानना की सुनवाई के दौरान बंसल ने दलील दी कि वह “टॉय गन” थी, असली पिस्तौल नहीं। लेकिन जांच में वह वास्तविक हथियार निकली। कोर्ट ने कहा, “यह साफ है कि अभियुक्त ने अदालत को गुमराह करने की कोशिश की। यह बहाना सिर्फ इसलिए गढ़ा गया ताकि कोर्ट असली हथियार मंगवाए बिना यकीन कर ले।”

“कोर्ट का हिस्सा है लोकल कमिश्नर”

पीठ ने कहा कि कोर्ट द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर, अदालत का विस्तार होता है, और उस पर हमला या धमकी देना न्यायिक प्रक्रिया में सीधा हस्तक्षेप है। कोर्ट ने कहा, “अभियुक्त ने बार-बार गैरकानूनी काम किए और कोई पश्चाताप नहीं दिखाया। दी गई ‘बिना शर्त माफ़ी’ केवल दिखावा है। इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।” “पिस्तौल मेज़ पर रखना और कार्यवाही में बाधा डालना यह दिखाता है कि अभियुक्त का उद्देश्य न्याय की प्रक्रिया को बाधित करना था। यह जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण प्रयास था, इसलिए वह आपराधिक अवमानना का दोषी है।”

IN THE HIGH COURT OF DELHI AT NEW DELHI
CONT.CAS.(CRL) 16/2024
COURT ON ITS OWN MOTION versus NITIN BANSAL

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