सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए प्रमुख सुझाव और टिप्पणियां
- “एक तिथि से स्वतः लागू होगा ‘वन बार, वन वोट'”:CJI सूर्य कांत ने विचार व्यक्त किया कि यदि दिल्ली भर में सभी बार एसोसिएशनों के चुनाव हर साल एक तय तिथि (उदाहरण के लिए दिसंबर या नवंबर के पहले सप्ताह) को होंगे, तो बहु-सदस्यता (Multiple Memberships) वाले वकीलों को स्वयं यह तय करना होगा कि वे किस बार एसोसिएशन में मतदान करना चाहते हैं:“अगर कोई वकील तीस हजारी कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों का सदस्य है, तो एक ही दिन चुनाव होने से उसे यह चुनना होगा कि वह किस बार में वोट देना चाहता है। वह एक से अधिक स्थानों पर जाकर वोट नहीं डाल पाएगा। इससे चुनाव प्रक्रिया में बड़ा सुधार आएगा।”
- फर्जी या निष्क्रिय मतदाताओं पर रोक (Genuine Voters Only):अदालत ने कहा कि मतदान का अधिकार केवल उन्हीं सक्रिय वकीलों को होना चाहिए जो नियमित रूप से अदालतों में आते हैं।“जो सदस्य केवल वार्षिक उत्सव (Annual Day) मनाने साल में एक बार आते हैं, उन्हें मतदान की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।”अदालत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करने की संभावना तलाशने को कहा जो वकीलों के प्रोक्सिमिटी कार्ड/स्मार्ट कार्ड के आधार पर उनके कोर्ट आने की वार्षिक बारंबारता (Entry Frequency) का स्वचालित डेटा तैयार कर सके।
- पदाधिकारियों के कार्यकाल की सीमा (Cap on Terms):कोर्ट ने इस बात पर भी राय मांगी कि क्या कोई व्यक्ति बार एसोसिएशन में कितनी बार चुनाव लड़ सकता है, इसकी एक सीमा तय की जानी चाहिए।
- याचिकाकर्ता की दलील: वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने बताया कि वर्तमान में SCBA में कूलिंग-ऑफ पीरियड के कारण कोई व्यक्ति घुमा-फिराकर 47 वर्षों तक विभिन्न पदों पर काबिज रह सकता है।
- पीठ का रुख: CJI ने कहा कि चुनाव लड़ने पर अत्यधिक कड़े प्रतिबंध लगाना मतदाताओं के अपने प्रतिनिधि चुनने के लोकतांत्रिक अधिकार को सीमित कर सकता है। हालांकि, कोर्ट ने इस पर सभी पक्षों से लिखित सुझाव मांगे हैं।
- SCBA सदस्यों और मतदाताओं के आंकड़े:सुनवाई के दौरान SCBA के उपाध्यक्ष राहुल कौशिक ने बताया कि एसोसिएशन में लगभग 28,000 से 30,000 कुल सदस्य हैं, जिनमें से हालिया चुनावों में लगभग 3,400 से 3,500 सदस्य ही योग्य मतदाता (Eligible Voters) के रूप में भाग ले पाए थे।
नई दिल्ली: बार एसोसिएशनों के लोकतांत्रिक सुधार (Electoral Reforms in Bar Associations), ‘एक बार, एक वोट’ (One Bar, One Vote Principle) का व्यावहारिक क्रियान्वयन, दिल्ली में विभिन्न बार एसोसिएशनों के चुनावों में अधिवक्ताओं द्वारा किए जाने वाले बहु-मतदान (Multiplicity of Votes) पर रोक, प्रॉक्सिमिटी कार्ड डेटाबेस के जरिए नियमित प्रैक्टिस करने वाले वास्तविक वकीलों की पात्रता पहचान (Proximity Card Consolidated Database), तथा बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के कार्यकाल पर अधिकतम सीमा (Cap on Terms of Office-Bearers) लगाने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल की है।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) में चुनावी सुधारों से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए सुझाव दिया कि SCBA, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) और दिल्ली की सभी जिला बार एसोसिएशनों (जैसे तीस हजारी, पटियाला हाउस, कड़कड़डूमा, रोहिणी, साकेत, द्वारका) के वार्षिक चुनाव एक ही दिन (दिसंबर या नवंबर के पहले सप्ताह में) आयोजित किए जा सकते हैं। पीठ ने सभी संबंधित बार निकायों के प्रतिनिधियों को अपने सदस्यों से परामर्श कर अदालत की सहायता करने का निर्देश दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य सुझाव एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. ‘एक ही दिन चुनाव कराने से बहु-मतदान की समस्या हल होगी’
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने साझा चुनाव कैलेंडर का प्रस्ताव रखते हुए कहा:
*”पूरी दिल्ली में—जिला अदालतों, उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट—के चुनाव दिसंबर में एक ही तारीख पर क्यों न आयोजित किए जाएं? क्योंकि अन्य चुनाव भी दिसंबर में हो रहे हैं। यदि आप एक ही तारीख पर चुनाव कराते हैं, तो वोटों की बहुलता (Multiplicity of Votes) और इससे जुड़ी सारी समस्याएं स्वतः हल हो जाएंगी।
वह एक चुनाव अपने आप में कई सुधार लेकर आएगा। ‘एक बार, एक वोट’ का सिद्धांत व्यावहारिक रूप से लागू हो जाएगा। भले ही तकनीकी रूप से प्रतिबंध न हो, लेकिन मान लीजिए कि कोई वकील तीस हजारी का सदस्य है और SCBA का भी सदस्य है। यदि चुनाव एक ही दिन होंगे, तो वह तय कर सकता है कि वह तीस हजारी के बजाय सुप्रीम कोर्ट में वोट देना चाहता है। वह यहां आकर वोट डाले, वहां नहीं। इस प्रकार की व्यवस्था बनाई जा सकती है।”*
- साझा वार्षिक चुनावी कैलेंडर: सीजेआई ने सुझाव दिया कि सभी बार निकाय मिलकर एक निश्चित समय-सीमा (जैसे प्रतिवर्ष नवंबर का पहला सप्ताह या दिसंबर) तय कर सकते हैं। अदालत ने साफ किया कि वह अपनी ओर से कोई तारीख नहीं थोपेगी, बल्कि सभी हितधारकों (Stakeholders) की आम सहमति से इसे तय किया जाएगा।
2. केवल ‘एनुअल डे’ पर आने वालों को वोटिंग का अधिकार नहीं:
- सुनवाई के दौरान SCBA के उपाध्यक्ष राहुल कौशिक ने पीठ को अवगत कराया कि एसोसिएशन के कुल सदस्य लगभग 28,000 से 30,000 हैं, परंतु हालिया चुनाव में केवल 3,400 से 3,500 सदस्य ही पात्र मतदाता के रूप में शामिल हुए थे।
- सीजेआई ने कहा कि अदालत यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मतदान का अधिकार केवल उन्हीं वास्तविक अधिवक्ताओं को मिले जो नियमित रूप से सुप्रीम कोर्ट आते हैं और वकालत करते हैं:“जो लोग केवल वार्षिक उत्सव (Annual Day) मनाने साल में एक बार आते हैं, उन्हें वोट देने की अनुमति नहीं होनी चाहिए।”
3. प्रॉक्सिमिटी कार्ड का सॉफ्टवेयर और रजिस्ट्री डेटाबेस:
- 29 मई 2026 के पूर्व आदेश के तहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्रॉक्सिमिटी कार्ड प्रविष्टियों का उपयोग केवल संपोषक साक्ष्य (Corroborative Evidence) के रूप में किया जा सकता है, न कि पात्रता के एकमात्र आधार के रूप में।
- पीठ ने पूछा कि क्या सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री एक ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित कर सकती है जो वकीलों के प्रॉक्सिमिटी कार्ड से कोर्ट में प्रवेश के समय और तारीख को स्वतः एक समेकित डेटाबेस में दर्ज करे, ताकि पूरे वर्ष में किसी अधिवक्ता की भौतिक उपस्थिति का सटीक रिकॉर्ड उपलब्ध हो सके।
4. पदाधिकारियों के कार्यकाल पर सीमा (Term Cap) लगाने पर पीठ की झिझक:
- याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने अंतरिम अर्जी में मांग की कि SCBA नियमों के तहत पदाधिकारियों के पदों पर रहने की एक अधिकतम सीमा तय होनी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि SCBA में 8 पद हैं और प्रत्येक पद पर 2 साल के कार्यकाल के बाद 4 बार चुने जाने की छूट तथा कूलिंग-ऑफ पीरियड को जोड़कर एक व्यक्ति लगभग 47 वर्षों तक एसोसिएशन के पदों पर बना रह सकता है।
- प्रधान न्यायाधीश ने इस पर गंभीर संवैधानिक आपत्ति जताते हुए कहा:*”हम सुधार चाहते हैं, लेकिन ऐसे सुधार नहीं जो मतदाताओं से उनकी पसंद के प्रतिनिधि को चुनने का अधिकार ही छीन लें।यदि मतदाता अपनी पसंद के व्यक्ति को चुनना चाहते हैं, तो हम यह कहकर उम्मीदवार को चुनाव लड़ने से नहीं रोक सकते कि वह बार-बार खड़ा हो रहा है। यह मतदाताओं पर प्रतिबंध लगाने जैसा होगा और अत्यधिक कठोर व असंगत (Harsh and Disproportionate) होगा।”*
- SCBA उपाध्यक्ष राहुल कौशिक ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों में पहले से ही यह व्यवस्था है कि कोई व्यक्ति किसी विशिष्ट पद पर अधिकतम 4 कार्यकाल ही रह सकता है। अदालत ने इस मुद्दे पर सभी बार संघों से लिखित सुझाव मांगे हैं।
SCBA चुनावी सुधारों का कालक्रम एवं वर्तमान स्थिति
| तारीख / चरण | सुधार एवं न्यायिक निर्देश |
| 29 मई 2026 | सुप्रीम कोर्ट ने SCBA चुनाव सुधारों पर ऐतिहासिक दिशा-निर्देश जारी किए; मतदाताओं और उम्मीदवारों के लिए संशोधित पात्रता मानदंड तय किए गए, चुनावी प्रलोभनों पर रोक और पारदर्शिता उपाय अनिवार्य किए गए। |
| जुलाई 2026 | अदालत ने व्यापक परिवर्तनों की तैयारी के लिए इन सुधारों के पूर्ण क्रियान्वयन को 2027-28 के चुनावी चक्र तक के लिए टाल दिया और चुनाव समिति को 31 दिसंबर 2026 तक तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया। |
| 14 अक्टूबर 2026 (वर्तमान सुनवाई) | सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने दिल्ली की सभी अदालतों (जिला, HC व SC) में एक ही दिन चुनाव कराने का प्रस्ताव रखा और चुनाव समिति को स्थिति रिपोर्ट (Status Report) दाखिल करने का निर्देश दिया। |
विधिक एवं संगठनात्मक विश्लेषण: बार निकायों में ‘एक बार-एक वोट’
- ‘एक बार, एक वोट’ (One Bar, One Vote) का न्यायशास्त्र:
- सर्वोच्च न्यायालय ने पी.के. दास बनाम बार काउंसिल ऑफ दिल्ली और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम बी.डी. कौशिक के ऐतिहासिक मामलों में दोहराया है कि किसी भी अधिवक्ता को एक ही वर्ष में कई अलग-अलग बार एसोसिएशनों के चुनावों में मतदान करने का अधिकार नहीं होना चाहिए।
- एक ही दिन मतदान होने से कोई भी वकील भौतिक रूप से एक साथ जिला अदालत, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जाकर मतदान नहीं कर पाएगा, जिससे ‘फ्लोटिंग वोटर्स’ और चुनावी जोड़-तोड़ पर स्वतः अंकुश लग जाएगा।
- जनरल बॉडी (आम सभा) की भूमिका:
- पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी प्रस्तावित सुधार से बार एसोसिएशन की सामान्य सदस्यता पर व्यापक या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो ऐसे नीतिगत परिवर्तनों को SCBA की आम सभा (General Body) के विचारार्थ भी रखा जाना चाहिए।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम बी.डी. कौशिक [डायरी संख्या: 13992/2023 – सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 14 अक्टूबर 2026
- संबद्ध पक्षकार एवं विधिक प्रतिनिधित्व:
- SCBA की ओर से: उपाध्यक्ष राहुल कौशिक
- कार्यकाल सीमा (Term Cap) याचिकाकर्ता की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता
- आमंत्रित संस्थाएं: दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) एवं दिल्ली की समस्त जिला बार एसोसिएशनें
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक नियम:
- सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन नियम (SCBA Rules) — नियम 17 (पदाधिकारियों का चुनाव एवं कूलिंग-ऑफ अवधि)
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 — बार निकायों की स्वायत्तता एवं चुनावी मानक
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय करने की सर्वोच्च न्यायालय की अंतर्निहित शक्ति)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- बार एसोसिएशनों में चुनावी शुचिता: ‘चुनावी सुधारों को मतदाता की लोकतांत्रिक पसंद का गला घोंटे बिना लागू किया जाना चाहिए; एक साझा चुनावी तिथि बिना किसी बल प्रयोग के बहु-मतदान को समाप्त कर “एक बार, एक वोट” को स्वाभाविक रूप से क्रियान्वित कर सकती है।’
- अंतिम निर्देश: SCBA की चुनाव समिति को कार्यकारी समिति के परामर्श से प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश; SCBA, DHCBA और जिला बार एसोसिएशनों से साझा चुनाव तिथि और कार्यकाल सीमा पर विस्तृत जवाब तलब।
Electoral Reforms: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत एवं न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन |
| प्रस्ताव का दायरा | SCBA, दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और दिल्ली की सभी 6 जिला बार एसोसिएशनें। |
| मुख्य सुझाव | 1. कॉमन इलेक्शन कैलेंडर: दिल्ली की सभी बार में एक ही दिन चुनाव आयोजित करना। 2. ‘वन बार, वन वोट’ की वकालत: वकील को किसी एक ही बार में वोट देने का विकल्प चुनना होगा। 3. पदाधिकारियों के कार्यकाल की सीमा (Cap on Terms): पदों पर चुनाव लड़ने की सीमा तय करने पर राय। |
| डिजिटल ट्रैकिंग | नियमित उपस्थिति जांचने के लिए सुप्रीम कोर्ट के प्रोक्सिमिटी कार्ड (Proximity Card) डेटाबेस का उपयोग। |

