Supreme Court India
EXECUTION PETITIONS: सुप्रीम कोर्ट ने गरीब विचाराधीन कैदियों (Undertrial Prisoners) की जमानत राशि के भुगतान को लेकर मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) में अहम बदलाव किए हैं।
डालसा के माध्यम से रकम होंगी जमा
जस्टिस एम. एम. सुंदरश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा के सुझावों को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया। अब राज्य सरकारें डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (डालसा) के माध्यम से यह रकम जमा कर सकेंगी।
अब बनेगी जिला स्तरीय कमेटी
कोर्ट ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट लेवल एम्पावर्ड कमेटी (DLEC) बनाई जाएगी, जिसमें शामिल होंगे ज़िला कलेक्टर/ज़िला मजिस्ट्रेट के नामित अधिकारी, DLSA के सचिव, संबंधित जेल के पुलिस अधीक्षक या डिप्टी एसपी, और जेल प्रभारी न्यायाधीश। कमेटी की बैठक हर महीने की पहली और तीसरी सोमवार को होगी (अगर छुट्टी है तो अगले कार्यदिवस पर)। डालसा सचिव को बैठक का संयोजक बनाया गया है।
7 दिन में जेल से रिहाई न हो तो DLSA को सूचना
कोर्ट ने कहा कि अगर किसी विचाराधीन कैदी को जमानत आदेश के सात दिन के भीतर रिहा नहीं किया जाता, तो जेल प्रशासन को तुरंत DLSA सचिव को सूचित करना होगा। सचिव जांच करेंगे कि कैदी के खाते में पैसा है या नहीं। अगर नहीं है, तो DLSA कमेटी से फंड रिलीज़ करने की सिफारिश की जाएगी। DLEC को रिपोर्ट मिलने के पांच दिन के भीतर फंड जारी करना होगा, ताकि जमानत की प्रक्रिया पूरी की जा सके।
एक कैदी के लिए ₹50,000 तक, जरूरत पर ₹1 लाख तक मदद
कोर्ट ने कहा कि गरीब कैदियों के लिए ‘सपोर्ट टू पुअर प्रिजनर्स स्कीम’ के तहत एक केस में अधिकतम ₹50,000 तक की सहायता दी जा सकती है। जरूरत पड़ने पर कमेटी अपने विवेक से ₹1 लाख तक राशि मंजूर कर सकती है। अगर राशि अधिक है और कमेटी देने से मना करती है, तो DLSA को तुरंत सूचना देनी होगी ताकि लीगल एड वकील अदालत में जमानत राशि घटाने की अर्जी लगा सके।
फंड सरकार को वापस होगा
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कैदी बरी या दोषी ठहराया जाता है, तो यह पैसा सरकार के खाते में वापस किया जाएगा, क्योंकि यह केवल जमानत सुनिश्चित करने के लिए है।
यह है मामला
सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला तब संज्ञान में लिया था जब पाया गया कि बड़ी संख्या में गरीब कैदी सिर्फ इसलिए जेल में हैं क्योंकि वे अदालत द्वारा तय की गई जमानत राशि भरने में असमर्थ हैं। बीते साल फरवरी में जारी SOP के तहत केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के ज़रिए फंड मुहैया कराने की व्यवस्था की थी। अब संशोधित SOP में प्रक्रिया को और तेज़ और पारदर्शी बनाने पर ज़ोर दिया गया है।






