Friday, October 16, 2026
HomeSupreme CourtFull Circle Connect: जिसकी आशंका थी, वही हुआ! पटना हाई कोर्ट का...

Full Circle Connect: जिसकी आशंका थी, वही हुआ! पटना हाई कोर्ट का ‘सलवार विवाद’ वाला फैसला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा; CJI बोले-इस पर विस्तृत आदेश जारी करेंगे

Full Circle Connect: अदालतों में वही हो रहा है जिसका डर था। एक तरफ देश की सर्वोच्च अदालत जजों को संवेदी बनाने के लिए राष्ट्रीय नियमावली (हैंडबुक) को मंजूरी दे रही है, तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों को ताक पर रखकर हाई कोर्ट्स द्वारा वैसे ही असंवेदनशील फैसले दोबारा दोहराए जा रहे हैं।

अभी-अभी कोर्ट रूम से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर आ रही है। 14 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में जिस ज्यूडिशियल सेंसिटिविटी हैंडबुक को मंजूरी दी जा रही थी, उसी सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता और एच.एस. फुल्का ने पटना हाईकोर्ट के उसी विवादित फैसले को सीधे चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की पीठ के सामने उछाल दिया, जिसकी चर्चा चारों तरफ हो रही थी। वही पटना हाई कोर्ट का फैसला, जिसमें कोर्ट ने ‘सलवार उतारने के प्रयास और सीना भींचने’ को बलात्कार का प्रयास मानने से इनकार कर दिया था।

Also Read;Rape Case: सलवार उतारना और सीना दबाना बलात्कार का प्रयास नहीं…यह महज लज्जा भंग का मामला, पटना हाई कोर्ट का हैरान करने वाला फैसला

कोर्ट रूम लाइव: सुप्रीम कोर्ट में कैसे उठा पटना हाई कोर्ट का मुद्दा?

यौन अपराधों में जजों की असंवेदनशीलता को लेकर चल रहे स्वतः संज्ञान (Suo Motu) मामले की लाइव सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील शोभा गुप्ता ने एक सोशल मीडिया वेबसाइट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसी तरह के तथ्यों और समान टिप्पणियों वाला एक आदेश हाल ही में पटना हाई कोर्ट द्वारा पारित किया गया है। यह तब हुआ है जब इस सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के ऐसे ही एक आदेश पर स्वतः संज्ञान लेकर उसे इसी साल फरवरी (2026) में रद्द कर दिया था। सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि ऐसा हर थोड़े दिन में (Every now and then) हो रहा है।

जजों की रिसर्च पर CJI की तल्ख टिप्पणी

इस बात से हैरान और दुखी सीजेआई सूर्यकांत ने न्यायपालिका के भीतर फैसले लिखने से पहले गहन कानूनी रिसर्च (Thorough Research) की कमी पर गहरा अफसोस जताया। सीजेआई ने खुली अदालत में आश्वासन दिया। हम इस मामले को ऐसे ही नहीं छोड़ेंगे। सुप्रीम कोर्ट पीठ पटना हाई कोर्ट के इस फैसले से निपटने के लिए एक विस्तृत न्यायिक आदेश (Detailed Order) पारित करेगी।

‘नेशनल जुडिशियल एकेडमी’ की हैंडबुक पर सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देश

इस गंभीर बहस के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जज जस्टिस अनिरुद्ध बोस (निदेशक, NJA भोपाल) की विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट और ‘ज्यूडिशियल सेंसिटिविटी हैंडबुक’ को पूरी तरह मंजूरी दे दी और इसे अपने न्यायिक आदेश का हिस्सा बना दिया। कोर्ट ने निम्नलिखित कड़े आदेश जारी किए हैं।

वेबसाइटों पर अनिवार्य पब्लिशिंग: यह हैंडबुक केवल सुप्रीम कोर्ट और 25 हाई कोर्ट्स ही नहीं, बल्कि देश की सभी जिला अदालतों (District Courts) की वेबसाइटों पर भी अपलोड की जाएगी।

कानूनी अकादमियों में वितरण: इसे सभी राष्ट्रीय और राज्य विधिक अकादमियों (Judicial Academies), नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLUs) और विश्वविद्यालयों के लॉ विभागों में अनिवार्य रूप से भेजा जाएगा ताकि आने वाली जजों और वकीलों की पीढ़ी संवेदी बन सके।

पुलिस कप्तानों (DGPs) को हुक्म: सभी राज्यों के अभियोजन निदेशक (Director of Prosecution) और पुलिस महानिदेशक (DGP) को निर्देश दिया गया है कि वे हर पुलिस थाने को सर्कुलर जारी करें कि एफआईआर (FIR) लिखते समय या चार्जशीट बनाते समय इस हैंडबुक की संवेदनशील शब्दावलियों का ही इस्तेमाल किया जाए।

स्थानीय बोलियों के ‘अपमानजनक शब्दों’ पर भी प्रहार

सुप्रीम कोर्ट ने इस कमेटी से एक अनोखा अनुरोध भी किया था। भारत के ग्रामीण इलाकों और स्थानीय बोलियों (Local Dialects) में ऐसे कई शब्द या मुहावरे इस्तेमाल किए जाते हैं जो महिलाओं के लिए बेहद अपमानजनक और यौन अपराध की श्रेणी में आते हैं, लेकिन अज्ञानता के कारण समाज उन्हें धड़ल्ले से बोलता है। कमेटी को इन क्षेत्रीय शब्दों को भी संकलित करने को कहा गया है ताकि पीड़ित महिलाएं बिना किसी झिझक के अपने साथ हुए आघात (Trauma) का पूरा और सही विवरण पुलिस और कोर्ट को दे सकें।

तुलनात्मक केस शीट: इलाहाबाद vs पटना हाई कोर्ट विवाद और सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप

कानूनी श्रेणियांइलाहाबाद हाई कोर्ट का विवादित आदेश (जिस पर स्वतः संज्ञान लिया गया)पटना हाई कोर्ट का हालिया विवादित आदेश (जिस पर CJI ने संज्ञान लिया)
कथित अपराध के तथ्यनाबालिग लड़की के स्तन पकड़ना, पायजामे का नाड़ा (String) तोड़ना और पुलिया के नीचे खींचना।महिला को स्टूडियो में बंद करना, सलवार उतारने का प्रयास करना और शारीरिक शोषण कर सीना दबाना।
हाई कोर्ट की व्याख्याकहा कि यह ‘बलात्कार का प्रयास’ नहीं, बल्कि केवल पॉक्सो के तहत ‘गंभीर यौन उत्पीड़न’ (सजा कम) है।कहा कि यह ‘बलात्कार का प्रयास’ (376/511) नहीं, बल्कि केवल ‘लज्जा भंग’ (354) है।
अंतिम परिणाम/विवादसुप्रीम कोर्ट ने देशव्यापी आक्रोश के बाद फरवरी 2026 में इस फैसले को पलट दिया था।चूंकि धारा 354 चार्जशीट में नहीं थी, इसलिए आरोपी पूरी तरह बरी हो गया।
सुप्रीम कोर्ट का अब रुखइसी केस के बहाने पूरे देश के लिए ‘ज्यूडिशियल सेंसिटिविटी हैंडबुक’ लागू की गई।CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस फैसले की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट एक विस्तृत आदेश जारी करेगा।

सीजेआई सूर्यकांत का यह कहना कि ‘हम पटना कोर्ट के फैसले पर एक विस्तृत आदेश पारित करेंगे’, इस बात का साफ संकेत है कि सुप्रीम कोर्ट अब ऐसे यांत्रिक (Mechanical) फैसलों को बर्दाश्त करने के मूड में बिल्कुल नहीं है। कानून की तकनीकी कमियों की आड़ में दरिंदों को बरी करने का यह सिलसिला अब रुकना ही चाहिए।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
clear sky
30 ° C
30 °
30 °
66 %
0kmh
1 %
Fri
32 °
Sat
32 °
Sun
33 °
Mon
33 °
Tue
32 °

Recent Comments