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Indore News: झूलेलाल मंदिर में बावड़ी में गिरे लोग…अदालत के रेकॉर्ड में बावड़ी का जिक्र नहीं….कोर्ट की यह रही टिप्पणी

Indore News:इंदौर में अवैध रूप से निर्मित बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर गिरने की दो साल पुरानी घटना में, स्थानीय अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने गुरुवार को मंदिर ट्रस्ट के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

30 मार्च 2023 को 36 लोगों की हुई थी मौत

30 मार्च 2023 को राम नवमी के दिन, जब मंदिर में श्रद्धालु पूजा कर रहे थे, तब अवैध रूप से बने इस मंदिर की छत ढह गई और श्रद्धालु नीचे बने पुराने बावड़ी (स्टेपवेल) में गिर गए। इस दुर्घटना में 36 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 21 महिलाएं और 2 बच्चे शामिल थे। मंदिर एक पुरानी बावड़ी के ऊपर बना था, लेकिन इसे लेकर प्रशासन के पास कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं था।

अदालत ने ट्रस्ट के दो पदाधिकारियों को किया बरी

बेलेश्वर महादेव झूलेलाल मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सेवाराम गालानी और सचिव मुरली कुमार सबनानी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोपों से मुक्त कर दिया। इन दोनों पर IPC की धारा 304 (गैर इरादतन हत्या), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) और 325 (गंभीर चोट पहुंचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बचाव पक्ष के वकील रघुवेंद्र सिंह बैस ने कहा कि अदालत ने सबूतों के अभाव में दोनों को बरी कर दिया। प्रशासन ने कुल 33 गवाह पेश किए, जिनमें कुछ सरकारी अधिकारी भी शामिल थे।

सरकारी रिकॉर्ड में इस बावड़ी का कोई उल्लेख नहीं था

इंदौर विकास प्राधिकरण (IDA) के एक अधिकारी ने अदालत में कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में इस बावड़ी का कोई उल्लेख नहीं था। इंदौर नगर निगम के कर्मचारियों ने भी अदालत में बयान दिया कि उन्हें बावड़ी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, जबकि नगर निगम का कार्यालय दुर्घटनास्थल के पास ही स्थित है। अदालत ने सरकारी अधिकारियों की लापरवाही पर गंभीर टिप्पणियां कीं और प्रशासन की कार्यशैली की आलोचना की।

दुर्घटना के बाद क्या हुआ?

हादसे के चार दिन बाद, 3 अप्रैल 2023 को, स्थानीय प्रशासन ने मंदिर के देवताओं की मूर्तियों को अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया। मंदिर को सुरक्षा कारणों से गिरा दिया गया और बावड़ी को मलबे से भरकर स्थायी रूप से सील कर दिया गया। इस फैसले ने प्रशासन की कार्यशैली और जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। सरकारी रिकॉर्ड में बावड़ी के अस्तित्व को नकारे जाने और नगर निगम की अनदेखी के कारण अदालत ने अभियोजन पक्ष के दावों को पर्याप्त नहीं माना। इस हादसे ने अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की ओर एक गंभीर संकेत दिया है।

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