
Land For Jobs: दिल्ली की एक विशेष अदालत ने लालू यादव के ‘नाैकरी के बदले जमीन’ घोटाले में सुनवाई के दौरान एक वकील के व्यवहार पर नाराजगी जताई है।
चिट्ठी को आरोपी का इकबालिया बयान मानते हुए खारिज की
कोर्ट ने कहा कि किसी वकील की उत्साही, जोरदार या जिद्दी दलीलें आरोपी के खिलाफ पूर्वाग्रह नहीं बन सकतीं। यह मामला पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और अन्य 102 आरोपियों के खिलाफ चल रहा है। कोर्ट रोजाना आधार पर आरोप तय करने की बहस सुन रही है। एक आरोपी स्कूल प्रिंसिपल (आरोपी नंबर 20) के वकील ने एक अर्जी लगाई। इसमें मांग की गई कि 27 जून 2022 को जांच अधिकारी को लिखी गई चिट्ठी को आरोपी का इकबालिया बयान मानते हुए खारिज कर दिया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह अर्जी एक दस्तावेज की स्वीकार्यता पर बहस जैसी है, जिसे अभी तय नहीं किया जा सकता।
अर्जी बहस को टालने की एक सोची-समझी रणनीति: अदालत
जज विशाल गोगने ने कहा कि वकील की यह जिद कोर्ट से टुकड़ों में और समय से पहले फैसला लेने की कोशिश लगती है। खासकर तब, जब सीबीआई ने इस चिट्ठी को न तो इकबालिया बयान माना है और न ही खुलासा बयान। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की अर्जी बहस को टालने की एक सोची-समझी रणनीति लगती है।
आरोपों पर दलील पेश करने के लिए दिया समय
जज ने कहा, “कोर्ट इस बात को लेकर सतर्क है कि किसी वकील की उत्साही या जिद्दी दलीलें आरोपी के खिलाफ पूर्वाग्रह पैदा न करें। इसलिए कोर्ट इस अर्जी पर और टिप्पणी करने से बचेगा।” कोर्ट ने आरोपी स्कूल प्रिंसिपल को 11 अगस्त को अंतिम मौका दिया है कि वह आरोपों पर अपनी दलीलें पेश करें।
यह है मामला
सीबीआई के मुताबिक, यह मामला 2004 से 2009 के बीच लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए मध्यप्रदेश के जबलपुर स्थित वेस्ट सेंट्रल रेलवे जोन में ग्रुप-डी की भर्तियों से जुड़ा है। आरोप है कि इन भर्तियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिवारों से लालू यादव के परिवार या करीबियों के नाम पर जमीन ली गई थी।






