Thursday, October 1, 2026
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Pen-Pending: हाईकोर्ट जज छुट्टी लेकर लंबित फैसले लिखें…61 मामलों में फैसले नहीं आए, लोग न्याय चाहते हैं, जुरिसप्रूडेंस नहीं

Pen-Pending: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट के जजों को लंबित फैसले लिखने के लिए छुट्टी पर जाने का सुझाव दिया है।

यह बताइए कि राहत दी जा रही है या नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट में 61 ऐसे मामले हैं, जिनमें सुनवाई पूरी हो चुकी है लेकिन फैसले नहीं सुनाए गए हैं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि जजों को 10-12 हफ्तों की स्वीकृत छुट्टियां लेकर फैसले लिखने चाहिएं। बेंच ने कहा, “लोगों को फैसले चाहिए, उन्हें यह फर्क नहीं पड़ता कि वह जुरिसप्रूडेंस है या कुछ और। बस यह बताइए कि राहत दी जा रही है या नहीं, और उसका कारण क्या है।” कोर्ट ने यह बात झारखंड हाईकोर्ट की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट अजीत सिन्हा से कही।

हाईकोर्ट के जज तुरंत जरूरी कदम उठाएं

सिन्हा ने बताया कि 31 जनवरी तक के आंकड़ों के अनुसार कई मामलों में फैसले दिए जा चुके हैं। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि 61 लंबित मामले बड़ी संख्या है और उन्होंने यह सुझाव हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस तक पहुंचाने को कहा। बेंच ने अपने आदेश में कहा, “हाईकोर्ट के जज तुरंत जरूरी कदम उठाएं। मामले की अगली सुनवाई तीन महीने बाद होगी। तब तक जरूरी कार्रवाई पूरी हो जानी चाहिए।”

छात्रों ने की थी सुप्रीम कोर्ट में शिकायत

यह मामला झारखंड के दूरदराज के आदिवासी इलाकों के छात्रों की याचिकाओं से जुड़ा है। उन्होंने शिकायत की थी कि होमगार्ड की भर्ती से जुड़े उनके केस में 2023 से फैसला नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 16 मई को हाईकोर्ट से उन सभी मामलों की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी, जिनमें 31 जनवरी या उससे पहले फैसला सुरक्षित रखा गया था। छात्रों का कहना है कि उनकी याचिका पर आखिरी सुनवाई 6 अप्रैल 2023 को हुई थी, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं आया।

2017 की भर्ती रद्द होने पर पहुंचे थे कोर्ट

याचिकाकर्ता वे छात्र हैं, जिनका नाम 2017 में निकली 1000 से ज्यादा होमगार्ड पदों की मेरिट लिस्ट में था। लेकिन राज्य सरकार ने यह भर्ती रद्द कर दी। इसके खिलाफ 70 से ज्यादा छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 2021 से इस मामले की सुनवाई की और 6 अप्रैल 2023 को फैसला सुरक्षित रख लिया।

डेथ रो कैदियों के फैसले भी रुके थे

इसी तरह 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट ने 10 दोषियों के मामलों में फैसला सुनाया है, जिनमें 6 को मौत की सजा मिली थी। ये फैसले तब आए जब सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को हाईकोर्ट को नोटिस जारी किया। एडवोकेट फौजिया शकील ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद हाईकोर्ट ने एक हफ्ते में फैसले सुना दिए। 13 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा पाए कैदियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि हाईकोर्ट के जज “अनावश्यक रूप से” छुट्टियां ले रहे हैं और उनके प्रदर्शन का ऑडिट होना चाहिए।

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