Lawyer’s Immunity: मद्रास हाई कोर्ट ने वकीलों की सुरक्षा और उनकी पेशेवर सीमाओं को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया कि मुवक्किल के निर्देशों के लिए वकील जिम्मेदार नहीं”।
हाईकोर्ट के जस्टिस जी. के. इलन्तिरैयान ने एक आपराधिक मामले की कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने वकील के खिलाफ कार्यवाही को “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” करार दिया। अदालत ने फैसला सुनाया कि एक वकील को उसके मुवक्किल (Client) के निर्देशों के आधार पर दिए गए बयानों के लिए मानहानि (Defamation) का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
मामला क्या था? (The Dispute)
- जड़: मामला एक पारिवारिक विवाद से शुरू हुआ था, जहाँ एक पक्ष ने शादी को शून्य घोषित करने की मांग की थी।
- बदले की कार्रवाई: शिकायतकर्ता का आरोप था कि आरोपियों ने उसके खिलाफ POCSO एक्ट के तहत झूठा मामला दर्ज कराया (जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया) और मीडिया में उसकी छवि खराब करने वाले मानहानिकारक बयान फैलाए।
- वकील की भूमिका: तीसरे आरोपी के रूप में एक वकील को भी शामिल किया गया था, जिस पर मुख्य आरोपियों की “मदद और उकसाने” का सामान्य आरोप था।
वकील क्यों जिम्मेदार नहीं? (Why Advocates are Protected)
- हाई कोर्ट ने वकीलों की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कई बिंदु रखे।
- केवल निर्देश: एक वकील अपने मुवक्किल द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर कार्य करता है। वह उन तथ्यों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जांच करने के लिए बाध्य नहीं है।
- जिम्मेदारी मुवक्किल की: यदि निर्देशों के आधार पर कोई मानहानि होती है, तो उसका उत्तरदायित्व मुवक्किल पर होगा, न कि वकील पर।
- पेशेवर स्वतंत्रता: कोर्ट ने कहा कि अगर वकीलों को ऐसे मामलों में अपराधी बनाया जाने लगा, तो यह स्थापित कानूनी सिद्धांतों के खिलाफ होगा और वकीलों के लिए निडर होकर काम करना मुश्किल हो जाएगा।
सह-आरोपियों पर चलेगा ट्रायल
- वकील को राहत देते हुए कोर्ट ने मुख्य आरोपी (First Accused) के मामले में अलग रुख अपनाया।
- विशिष्ट आरोप: कोर्ट ने पाया कि मुख्य आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 500 (मानहानि) और 109 (उकसाना) के तहत विशिष्ट आरोप हैं, जिनकी जांच ट्रायल के दौरान होनी जरूरी है।
- समय सीमा: हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मुख्य आरोपियों के खिलाफ मामले की सुनवाई तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।
फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)
| पक्ष | हाई कोर्ट का निर्णय |
| वकील (तीसरा आरोपी) | आपराधिक कार्यवाही रद्द (Quashed)। |
| मुख्य आरोपी (प्रथम आरोपी) | याचिका खारिज, ट्रायल का सामना करना होगा। |
| कानूनी सिद्धांत | वकील केवल एक माध्यम (Medium) है, प्रेरक (Originator) नहीं। |
| निर्देश | ट्रायल को 3 महीने के भीतर समाप्त करने का आदेश। |
निष्कर्ष: कानूनी सुरक्षा का कवच
मद्रास हाई कोर्ट का यह फैसला कानूनी बिरादरी के लिए एक बड़ी जीत है। यह सुनिश्चित करता है कि वकीलों को उनके पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के लिए निशाना नहीं बनाया जा सकता। वकील केवल अपने मुवक्किल की आवाज होते हैं, और उस आवाज की सत्यता की जिम्मेदारी मुवक्किल की स्वयं की होती है।
IN THE HIGH COURT OF JUDICATURE AT MADRAS
CORAM: THE HONOURABLE MR. JUSTICE G.K.ILANTHIRAIYAN
Crl.O.P.Nos.8047 of 2022 & 20189 of 2023
and Crl.M.P.Nos.4662 & 4663 of 2022 and 13732 of 2023
Crl.R.C.No.8047 of 2022
J.N.Naresh Kumar
Radhika Dolia
Vs
Jayakaran Vasudevan Represented by Power Agent, V.Saravanan, Radhika Doli, Thulasi Davey
Petitioner in Crl.O.P.No.8047 of 2022, Crl.O.P.No.20189 of 2023

