Friday, October 9, 2026
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Passport Rights: केवल डर के आधार पर नहीं रोक सकते पासपोर्ट रिन्यूअल…यात्रा का अधिकार और न्याय पर यह रही नई व्यवस्था

Passport Rights: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पासपोर्ट और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था दी है।

हाईकोर्ट के जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव की बेंच ने रामपुर निवासी दिलीप की याचिका स्वीकार करते हुए क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (RPO) को बिना किसी देरी के पासपोर्ट रिन्यू करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने निचली अदालत (ACJM) के उस आदेश को भी रद्द कर दिया जिसने रिन्यूअल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट का नवीनीकरण (Renewal of Passport) एक नागरिक का वैध अधिकार है, जिसे केवल ‘आशंकाओं और डर’ के आधार पर नहीं रोका जा सकता।

मामला क्या था? (The Context)

  • पृष्ठभूमि: याचिकाकर्ता दिलीप वर्तमान में सऊदी अरब में रह रहा है। उसके खिलाफ रामपुर में एक आपराधिक मामला लंबित है, जिसमें उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया है।
  • भारत वापसी की इच्छा: दिलीप भारत लौटकर अदालत के सामने पेश होना चाहता था, लेकिन उसका पासपोर्ट रिन्यू न होने के कारण वह यात्रा नहीं कर पा रहा था।
  • निचली अदालत का रुख: जुलाई 2025 में एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट (ACJM) ने दिलीप की अर्जी यह कहकर खारिज कर दी थी कि उसे पासपोर्ट रिन्यू करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

राज्य सरकार का विरोध और “आशंका”

  • गारंटी का अभाव: यदि दिलीप का पासपोर्ट रिन्यू हो जाता है, तो इस बात की कोई गारंटी या अंडरटेकिंग नहीं है कि वह वास्तव में भारत लौटेगा और कोर्ट में पेश होगा।
  • डर: राज्य सरकार को डर था कि पासपोर्ट मिलने के बाद आरोपी कानूनी प्रक्रिया से बच सकता है।

हाई कोर्ट का कानूनी स्टैंड

  • अदालत ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा, वैध अधिकार (Legitimate Right): पासपोर्ट रिन्यू कराना एक व्यक्ति का बुनियादी अधिकार है।
  • अस्पष्ट डर: केवल इस ‘डर’ या ‘चिंता’ (Anxiety) के आधार पर कि कोई व्यक्ति वापस नहीं आएगा, उसका पासपोर्ट नहीं रोका जा सकता।
  • प्रक्रिया: यदि कोई अन्य कानूनी अड़चन (Impediment) नहीं है, तो पासपोर्ट अधिकारी को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयइलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश / निष्कर्ष
मुख्य निर्देशक्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी को बिना देरी रिन्यूअल का आदेश।
निचली अदालत का आदेशरद्द कर दिया गया (Set aside)।
कानूनी धारायाचिका धारा 528 (हाई कोर्ट की अंतर्निहित शक्तियां) के तहत दाखिल की गई थी।
न्याय का उद्देश्यआरोपी को कोर्ट में पेश होने के लिए यात्रा की अनुमति देना न्यायसंगत है।

निष्कर्ष: यात्रा का अधिकार और न्याय

यह फैसला उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जो विदेश में फंसे हैं और अपने पासपोर्ट की समय-सीमा समाप्त होने के कारण भारत में लंबित कानूनी मामलों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ कर दिया कि अदालतें और प्रशासन केवल कयासों के आधार पर किसी के यात्रा के अधिकार को तब तक नहीं छीन सकते जब तक कि कोई पुख्ता कानूनी रोक न हो।

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