Sunday, August 23, 2026
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BCD Polls: चुनाव विवाद के लिए SC पैनल जाएं, हाई कोर्ट नहीं….दिल्ली HC ने क्यूं जूनियर वकीलों के आरक्षण की मांग ठुकराई

BCD Polls: दिल्ली हाई कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के चुनावों को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण कानूनी रुख स्पष्ट किए हैं।

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और जस्टिस तेजस कारिया की डिवीजन बेंच ने एक वकील की उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें जूनियर वकीलों (10 साल से कम अनुभव) के लिए सीटें आरक्षित करने की मांग की गई थी। अदालत ने साफ कर दिया है कि बार काउंसिल चुनावों से जुड़ा कोई भी विवाद सीधे हाई कोर्ट नहीं लाया जा सकता, बल्कि इसके लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष पैनल के पास जाना होगा। साथ ही, कोर्ट ने जूनियर वकीलों के लिए सीटों के आरक्षण की मांग को भी खारिज कर दिया है।

चुनाव विवाद: हाई कोर्ट का दरवाजा बंद (Dispute Resolution)

  • कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल चुनावों की शुचिता बनाए रखने के लिए एक विशेष व्यवस्था है।
  • सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस: ‘एम. वरधन बनाम भारत संघ’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया और विवादों के निपटारे की देखरेख ‘हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी’ करती है।
  • अधिकार क्षेत्र: चुनाव से जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए उम्मीदवारों या वकीलों को इन कमेटियों के पास ही जाना होगा। हाई कोर्ट ऐसे मामलों में रिट याचिकाएं स्वीकार नहीं कर सकता।

जूनियर वकीलों का आरक्षण: “100% आरक्षण मुमकिन नहीं”

  • याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि BCD की 23 में से बची हुई 6 सीटें केवल जूनियर वकीलों के लिए आरक्षित की जाएं।
  • कानूनी स्थिति: ‘एडवोकेट एक्ट’ जूनियर वकीलों को आरक्षण का कोई कानूनी अधिकार (Vested Right) नहीं देता।
  • आरक्षण का गणित: वर्तमान में लगभग 50% सीटें 10 साल से अधिक अनुभव वालों के लिए और 30% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। यदि बची हुई सीटें जूनियर वकीलों के लिए आरक्षित कर दी गईं, तो यह 100% आरक्षण हो जाएगा, जो कानूनन गलत है।
  • देरी से अपील: कोर्ट ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता ने चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने और वोटों की गिनती शुरू होने के बाद अदालत का रुख किया, जो उसकी दलील को और कमजोर बनाता है।

Bar Council of Delhi (BCD) Seat Distribution as per Notification

श्रेणीसीटों की संख्यापात्रता
वरिष्ठ वकील12 सीटें10 साल से अधिक का अनुभव।
महिला वकील5 सीटेंसुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार।
ओपन/शेष सीटें6 सीटेंसभी के लिए खुली (कोई विशेष आरक्षण नहीं)।
कुल सीटें23

फैसले के मुख्य बिंदु (Key Highlights)

विषयअदालत का निर्णय
फोरमचुनाव संबंधी शिकायतों के लिए सुप्रीम कोर्ट पैनल जाना होगा।
आरक्षण की मांगजूनियर वकीलों के लिए विशेष आरक्षण की मांग खारिज
रिट याचिकाचुनावी मामलों में हाई कोर्ट में रिट याचिका ‘सुनवाई योग्य’ (Maintainable) नहीं

निष्कर्ष: चुनावी प्रक्रिया में स्पष्टता

दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला बार काउंसिल चुनावों में अनावश्यक अदालती हस्तक्षेप को रोकने में मदद करेगा। कोर्ट ने संदेश दिया है कि चुनाव के नियम और विवाद एक तय प्रक्रिया के तहत ही सुलझाए जाने चाहिए, न कि हर छोटी बात पर हाई कोर्ट का रुख करके पूरी चुनावी प्रक्रिया को बाधित किया जाना चाहिए।

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