Manipur violence cases: मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से संबंधित 11 FIR की जांच कर रही CBI को सुप्रीम कोर्ट ने दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह दिया पीठ ने सुझाव
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने सुझाव दिया कि अब मामलों की सुनवाई और विकास की निगरानी का जिम्मा मणिपुर हाई कोर्ट या गुवाहाटी हाई कोर्ट (या दोनों) को सौंपा जा सकता है।
प्रमुख बिंदु और अदालती कार्यवाही
- पीड़ितों का पुनर्वास और गीता मित्तल समिति: अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे न्यायमूर्ति गीता मित्तल समिति की सिफारिशों को लागू करें। इस समिति में न्यायमूर्ति शालिनी पी. जोशी और न्यायमूर्ति आशा मेनन भी शामिल हैं। समिति ने अब तक पीड़ितों के पुनर्वास और कल्याण पर कई रिपोर्ट पेश की हैं।
- CBI की कार्यप्रणाली पर सवाल: सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने एक कुकी महिला पीड़िता (जिसकी हाल ही में मृत्यु हो गई) का पक्ष रखते हुए CBI पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि CBI ने पीड़िता को सूचित तक नहीं किया कि उसके सामूहिक बलात्कार के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य आरोपी अदालत में पेश नहीं हो रहे हैं और CBI की अनुपस्थिति “चौंकाने वाली” और “लापरवाह” है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सहमति जताई कि पीड़िता के अधिकारों प्रभावित नहीं होने चाहिए और CBI को स्टेटस रिपोर्ट देनी चाहिए।
- निगरानी तंत्र (Monitoring Mechanism): CJI ने सुझाव दिया कि चूंकि मणिपुर हाई कोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीश ने कार्यभार संभाल लिया है, इसलिए प्रभावी समन्वय के लिए मणिपुर और गुवाहाटी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को जिम्मेदारी दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि यदि स्थानीय परिस्थितियों के कारण कानूनी सहायता वकील उपलब्ध नहीं हैं, तो गुवाहाटी बार के वकीलों को वहां भेजा जा सकता है।
- पुनर्वास रिपोर्ट की गोपनीयता: वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने शिकायत की कि पुनर्वास से जुड़ी 27 रिपोर्टों में से एक भी प्रति उन्हें नहीं मिली है, जिससे पुनर्वास कार्य ठप है। इस पर अदालत ने आशंका जताई कि संवेदनशील जानकारी “कहीं और” लीक हो सकती है। गोंसाल्वेस ने सुझाव दिया कि संवेदनशील हिस्सों को हटाकर (Redacted) प्रतियां साझा की जा सकती हैं।
मणिपुर हिंसा की पृष्ठभूमि
3 मई, 2023 को मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जे की मांग के विरोध में ‘जनजातीय एकजुटता मार्च’ के बाद मणिपुर में जातीय हिंसा भड़क उठी थी। इस संघर्ष में अब तक 200 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।

