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Mundra Drug Case: स्कूल में बच्चे को आतंकवादी के बच्चे कह तंग कर रहे…सुप्रीम कोर्ट में आरोपी ने रखी बात

Mundra Drug Case: मुंद्रा ड्रग जब्ती मामले के एक आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, जब से एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने यह आरोप लगाया है कि इस केस में अपराध से प्राप्त धन का उपयोग लश्कर-ए-तैयबा द्वारा आतंकवादी हमलों के लिए किया गया, उसके बाद से उसके बच्चों को स्कूल में परेशान किया जा रहा है।

कबीर तलवार के बच्चों को स्कूल में परेशान किया जा रहा

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, दीपांकर दत्ता और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ को वरिष्ठ अधिवक्ता ए. सुंदरम ने सूचित किया कि उनके मुवक्किल हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार की जमानत याचिका पर एक दिन पहले हुई सुनवाई में एनआईए के एक विधिक अधिकारी ने भारत पर हुए आतंकवादी हमलों का हवाला दिया, जिसमें पहलगाम भी शामिल था। सुंदरम ने कहा, “कबीर तलवार के बच्चों को स्कूल में परेशान किया जा रहा है। अब उन्हें ‘आतंकवादी के बच्चे’ कहा जा रहा है और हमें उन्हें वापस घर लाना पड़ा। यह बात आज के सभी अखबारों और मीडिया में फैल चुकी है। बिना किसी आधार के एनआईए ने एनडीपीएस केस में यह बयान दे दिया।

परिवार के सदस्य को कष्ट नहीं उठाना चाहिए…पीठ ने कहा

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुंदरम को शांत करने का प्रयास किया और कहा, “किसी भी व्यक्ति के परिवार के सदस्य को, चाहे उसने कुछ गलत किया हो या नहीं, कष्ट नहीं उठाना चाहिए। जज ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, “इस पक्ष का ध्यान रखें। हम इससे अधिक कुछ नहीं कहना चाहते। आपको अच्छी तरह पता है क्या करना है। सुंदरम ने कहा कि रिपोर्ट ज़्यादातर अखबारों में छपी है और उनके मुवक्किल के बच्चों को धमकी भरे कॉल आ रहे हैं क्योंकि ड्रग जब्ती को पहलगाम आतंकी हमले से जोड़ दिया गया है।

ड्रग बिक्री से प्राप्त राशि लश्कर-ए-तैयबा को जा रहा था

मेहता ने जवाब दिया, हमारी जांच से पता चला है कि इस ड्रग बिक्री से प्राप्त राशि लश्कर-ए-तैयबा को आतंकवादी गतिविधियों के लिए भेजी गई थी और यही बात अखबारों में प्रकाशित हुई है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सुंदरम को सलाह दी, “ऐसी खबरें मत पढ़िए। भूल जाइए। मैं खुद ऐसी खबरों से दूर रहता हूँ। बाहरी प्रभाव से मैं प्रभावित नहीं होता। सुंदरम ने पीठ से आग्रह किया कि कोर्ट स्थिति स्पष्ट करे क्योंकि पहलगाम हमला इस एनडीपीएस मामले से संबंधित नहीं है। “यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि अदालत में यह बात कही गई। यह एनआईए का मामला है और एजेंसी ने अभी तक जांच पूरी भी नहीं की है। सबको यह समझना चाहिए कि कैसे टिप्पणियाँ निर्दोषों को प्रभावित कर सकती हैं।

विधिक अधिकारी की टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंची है, तो वह माफ़ी मांग सकते हैं

मेहता ने कहा कि यदि विधिक अधिकारी की टिप्पणी से किसी को ठेस पहुंची है, तो वह माफ़ी मांग सकते हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “यह मुद्दा विचारणीय नहीं है, इसलिए इसे अनावश्यक रूप से न खींचा जाए। कभी-कभी वकील बहस के दौरान भावनाओं में बह जाते हैं। ऐसा दोनों पक्षों में होता है। सुंदरम ने दोहराया कि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने यह दावा बिना किसी ठोस सामग्री के किया। हालाँकि कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि भाटी ने तलवार की जमानत का विरोध सिर्फ इसी आधार पर नहीं किया। भाटी, जो अदालत में उपस्थित थीं, ने कहा कि बच्चों को अदालत में दी गई दलीलों की वजह से कष्ट नहीं उठाना चाहिए और यदि ऐसा हो रहा है तो कानून प्रवर्तन एजेंसियां इसे संभाल सकती हैं।

अगस्त 2022 में 21,000 करोड़ रुपये के मुंद्रा पोर्ट ड्रग जब्ती मामले में आरोपी अरेस्ट

एनआईए ने हरप्रीत सिंह तलवार की जमानत याचिका का विरोध किया था। उसे अगस्त 2022 में 21,000 करोड़ रुपये के मुंद्रा पोर्ट ड्रग जब्ती मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसे देश की अब तक की सबसे बड़ी ड्रग बरामदगी माना जा रहा है। भाटी ने कहा था, “ये संगठन के फ्रंटमैन हैं, लेकिन जिन निर्दोष लोगों ने आतंकवादी हमलों में अपनी जान गंवाई है, उनका खून भी इनके हाथों पर है। 12 सितंबर 2021 को अफगानिस्तान से ईरान के रास्ते कुछ कंटेनर मुंद्रा पोर्ट पहुंचे, जिनमें अर्ध-प्रसंस्कृत टैल्क पत्थरों से भरे बैग थे। 13 सितंबर 2021 को खुफिया सूचना के आधार पर राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने कंटेनरों की जांच की और कुछ बैगों में हेरोइन पाई गई। अंततः 2988.21 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई, जिसकी कीमत 21,000 करोड़ रुपये आंकी गई।

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