Wednesday, October 14, 2026
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Muzzle Rules: दिव्यांगजनों की सहायता करने वाले सर्विस डॉग्स के लिए यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर व रंग-बिरंगे कॉलर अनिवार्य हों; भीड़भाड़ वाली जगहों पर थूथन बांधना जरूरी

अदालत के मुख्य सुझाव और प्रस्तावित SOP

केंद्र सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry) ने कोर्ट के समक्ष ड्राफ्ट SOP पेश किया, जिस पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। कोर्ट में जिन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी:

  • यूनिक रजिस्ट्रेशन और विशेष कॉलर:प्रत्येक सर्विस डॉग का पंजीकरण किया जाएगा और उन्हें एक रजिस्ट्रेशन नंबर दिया जाएगा। इसके साथ ही एक विशिष्ट रंग का कॉलर पहनाया जाएगा ताकि सुरक्षा गार्ड्स और आम जनता को तुरंत पता चल सके कि यह एक प्रशिक्षित सर्विस डॉग है जो कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
  • भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा (Muzzle Rules):सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए सर्विस डॉग्स को थूथन (Muzzle) लगाने का सुझाव दिया गया है।
  • अंतिम समय सीमा:केंद्र सरकार के वकील राजेश गोगना ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि इन सुझावों को अंतिम SOP में शामिल किया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2027 तय की है।

नई दिल्ली: दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) के अंतर्गत दिव्यांगजनों (Persons with Disabilities – PwDs) के निर्बाध और स्वतंत्र आवागमन के अधिकार, आवारा श्वानों (Stray Dogs) से दृष्टिबाधित व लोकोमोटर दिव्यांगजनों को होने वाले खतरों, ‘एनिमल बर्थ कंट्रोल रूल्स, 2023’ (ABC Rules) के व्यावहारिक क्रियान्वयन, तथा भारत में प्रशिक्षित सहायक श्वान यानी ‘सर्विस डॉग्स’ (Service/Assistance Dogs) के उपयोग के लिए विधिक व संस्थागत ढांचे के अभाव पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को कड़े व रचनात्मक दिशा-निर्देश दिए हैं।

दिव्यांगों की सहायता करने वाले सर्विस डॉग्स के लिए एसओपी बनाएं

न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति अदिति चौधरी की खंडपीठ ने 6 अक्टूबर 2026 को पारित अपने आदेश में रेखांकित किया कि सर्विस डॉग्स के लिए एक स्पष्ट विधिक ढांचा बनने से दिव्यांगजन बिना किसी बाधा या सुरक्षा संशय के सार्वजनिक स्थानों और परिवहन में स्वतंत्र रूप से आवागमन कर सकेंगे। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2027 तय करते हुए अपेक्षा जताई कि तब तक संबंधित केंद्रीय मंत्रालय हितधारकों से परामर्श कर अंतिम एसओपी अधिसूचित कर देंगे। उच्च न्यायालय ने केंद्र को दिव्यांगों की सहायता करने वाले सर्विस डॉग्स के लिए एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) को अंतिम रूप देने का निर्देश दिया है।

सुनवाई में उभरे प्रमुख विधिक सुझाव एवं एसओपी के मानक

अदालत के समक्ष ‘पशुपालन और डेयरी विभाग’ (Department of Animal Husbandry and Dairying) द्वारा रखे गए ड्राफ्ट एसओपी और सुनवाई के दौरान निम्नलिखित मुख्य सुरक्षात्मक और विनियामक उपाय सामने आए:

  1. यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर और आधिकारिक रजिस्टर:
    • देश भर में दिव्यांगजनों की सहायता के लिए उपयोग किए जाने वाले सभी सर्विस और थेरेपी डॉग्स का एक केंद्रीय/राज्य स्तरीय आधिकारिक रजिस्टर रखा जाए।
    • प्रत्येक सर्विस डॉग को एक विशिष्ट पंजीकरण संख्या (Unique Registration Number / ID) आवंटित की जाए, जिससे सुरक्षा जांच एजेंसियों को उनके प्रमाणन की पुष्टि हो सके।
  2. विशिष्ट रंग-कोडित कॉलर (Color-Coded Collars):
    • सर्विस डॉग्स के गले में एक पूर्व-निर्धारित, विशिष्ट रंग का कॉलर (Distinctively Coloured Unique Collar) अनिवार्य किया जाए।
    • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता और सुरक्षाकर्मी दूर से ही पहचान सकें कि यह कुत्ता कोई सामान्य पालतू या आवारा जानवर नहीं, बल्कि एक प्रमाणित ‘सर्विस डॉग’ है जो किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।
  3. भीड़भाड़ वाले स्थानों पर थूथन (Muzzle) का उपयोग:
    • सार्वजनिक शांति, सौहार्द और सह-यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह सुझाव दर्ज किया गया कि सिनेमा हॉल, शॉपिंग मॉल, अस्पताल और सार्वजनिक परिवहन जैसे अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सर्विस डॉग्स के चेहरे पर थूथन (Muzzle) लगाया जाए।
  4. हितधारकों की आपत्तियां और अंतिम रूपरेखा:
    • केंद्र सरकार के अधिवक्ता राजेश गोगना ने अदालत को आश्वस्त किया कि ड्राफ्ट एसओपी पर आम जनता और सभी हितधारकों से सुझाव/आपत्तियां आमंत्रित कर ली गई हैं और इन सभी बिंदुओं को शामिल कर अंतिम एसओपी शीघ्र जारी की जाएगी।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: दिव्यांगजनों की सुरक्षा बनाम आवारा जानवर

  • जनहित याचिका (PIL) का आधार (वर्ष 2024):
    • ‘धनंजय संजोगता फाउंडेशन’ (मिशन एक्सेसिबिलिटी) ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर केंद्र सरकार द्वारा 10 मार्च 2023 को अधिसूचित ‘पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023’ (Animal Birth Control Rules, 2023) को चुनौती दी थी।
    • याचिका में आरोप लगाया गया कि यह नियमावली दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों जैसे संवेदनशील वर्गों को आवारा श्वानों के हमलों से बचाने में पूरी तरह विफल रही है।
  • सफेद छड़ी (White Cane) और आवारा कुत्तों का आक्रामक व्यवहार:
    • याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकीलों ने वैज्ञानिक और जमीनी वास्तविकता अदालत के सामने रखी कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों द्वारा उपयोग की जाने वाली सफेद छड़ी (White Cane) को आवारा जानवर अक्सर मारने वाली लकड़ी या खतरा समझ लेते हैं।
    • परिणामस्वरूप, आवारा कुत्ते दृष्टिबाधितों के प्रति अत्यधिक आक्रामक हो जाते हैं। खतरे को पहले से भांपने में असमर्थता और सीमित गतिशीलता के कारण दृष्टिबाधित, मूक-बधिर, लोकोमोटर दिव्यांग और मानसिक अस्वस्थता से जूझ रहे लोग आवारा श्वानों के हमले के समय अपना बचाव करने में पूरी तरह असमर्थ होते हैं।
  • भारत बनाम वैश्विक स्तर पर सर्विस एनिमल्स का अभाव:
    • याचिका में बताया गया कि पश्चिमी और विकसित देशों में दिव्यांगजनों के दैनिक जीवन के लिए प्रशिक्षित ‘सर्विस डॉग्स’ और ‘थेरेपी डॉग्स’ को सार्वजनिक स्थानों, विमानों और मेट्रो में ले जाने का स्पष्ट कानूनी संरक्षण प्राप्त है।
    • इसके विपरीत, भारत में सर्विस डॉग्स के लिए कोई सक्षम कानूनी ढांचा (Enabling Framework) मौजूद नहीं है, जिससे भारतीय दिव्यांगजन अत्यधिक वंचित स्थिति में हैं।
  • 18 नवंबर 2024 का पूर्व निर्देश:
    • दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले ही ‘पशुपालन विभाग’ और ‘दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग’ (DEPwD) को भारत में सर्विस एनिमल्स के सुरक्षित और गैर-भेदभावपूर्ण उपयोग के लिए एक विधिक रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया था।

विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

  • दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016):
    • धारा 3 (समानता एवं गैर-भेदभाव): राज्य का यह वैधानिक दायित्व है कि वह दिव्यांगजनों को बिना किसी भेदभाव के समान जीवन और आवागमन का अवसर प्रदान करे।
    • धारा 41 एवं 42 (पहुंच और गतिशीलता का अधिकार): सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, परिवहन साधनों और सूचना तंत्र को दिव्यांगजनों के लिए सुगम (Accessible) बनाना अनिवार्य है। सर्विस डॉग्स को मॉल, अस्पतालों या मेट्रो में प्रवेश न देना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी गतिशीलता के अधिकार का उल्लंघन है।
  • संविधान का अनुच्छेद 21 (गरिमापूर्ण जीवन और सुरक्षित संचरण):
    • सर्वोच्च न्यायालय ने माना है कि सुरक्षित वातावरण में चलना और आवारा जानवरों के खतरे से मुक्त रहना जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है।
  • संतुलन का सिद्धांत (Harmonious Balance):
    • अदालत ने जानवरों के प्रति क्रूरता निवारण (PCA Act) और आवारा श्वानों के टीकाकरण/नसबंदी के साथ-साथ दिव्यांग व्यक्तियों की शारीरिक सुरक्षा और आवागमन सुगमता के बीच एक व्यावहारिक संतुलन साधने का प्रयास किया है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: धनंजय संजोगता फाउंडेशन (मिशन एक्सेसिबिलिटी) बनाम भारत संघ व अन्य [W.P.(C) – जनहित याचिका, दिल्ली उच्च न्यायालय]
  • पीठ: न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति अदिति चौधरी (खंडपीठ)
  • आदेश की तिथि: 6 अक्टूबर 2026
  • अगली सुनवाई की तिथि: 7 जनवरी 2027
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ता फाउंडेशन की ओर से: अधिवक्ता राहुल बजाज, अमर जैन एवं सारा (Sarah)
    • केंद्र सरकार/प्रतिवादियों की ओर से: अधिवक्ता राजेश गोगना
  • संबद्ध मंत्रालय/विभाग:
    • पशुपालन एवं डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry and Dairying)
    • दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (Department of Empowerment of Persons with Disabilities – DEPwD)
  • प्रासंगिक कानून एवं नियमावली:
    • दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) की धाराएं 3, 41 व 42
    • पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2023 (Animal Birth Control Rules, 2023)
    • पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (PCA Act)
  • वर्तमान स्थिति: केंद्र सरकार को सर्विस डॉग्स हेतु यूनिक आईडी, रंग-कोडित कॉलर और भीड़भाड़ में थूथन (Muzzle) के मानकों को शामिल करते हुए अंतिम एसओपी अधिसूचित करने का निर्देश; अगली सुनवाई जनवरी 2027 में नियत।

Muzzle Rules: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतदिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court)
पीठजस्टिस दिनेश मेहता एवं जस्टिस अदिति चौधरी
याचिकाकर्ताधनंजय संजोगता फाउंडेशन (मिशन एक्सेसिबिलिटी)
मुख्य मांगदिव्यांगजनों के लिए सर्विस डॉग्स का सुरक्षित इस्तेमाल और आवारा पशुओं के खतरों से सुरक्षा
अदालत के निर्देश1. यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर और कलर-कोडेड कॉलर देना
2. भीड़भाड़ वाले स्थानों पर थूथन (Muzzle) का प्रयोग
3. SOP को अंतिम रूप देकर 7 जनवरी 2027 तक रिपोर्ट पेश करना
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