HomeBNS & BNSS LawMaserati Row: 2 करोड़ की कार, पर अन्य टैक्स गिने नहीं जाएंगे…नेशनल...

Maserati Row: 2 करोड़ की कार, पर अन्य टैक्स गिने नहीं जाएंगे…नेशनल कंज्यूमर कोर्ट के महंगे कार वाले मामले पर बताया क्या है ‘पैसे’ का गणित

Maserati Row: लग्जरी कार मासेराती (Maserati) से जुड़े 2 करोड़ रुपये के एक मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है।

आयोग के जस्टिस ए. पी. साही (अध्यक्ष) और भरतकुमार पंड्या की बेंच ने ‘नर्चर वर्क स्पेस सॉल्यूशंस’ की शिकायत को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला NCDRC के अधिकार क्षेत्र (Pecuniary Jurisdiction) से बाहर है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता अदालत का अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) तय करते समय केवल वह राशि गिनी जाएगी जो सीधे विक्रेता (Seller) को सामान या सेवा के बदले दी गई है। इसमें रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन जैसे सरकारी शुल्कों को शामिल नहीं किया जा सकता।

मामला क्या था? (The Luxury Car Dispute)

  • शिकायत: एक कंपनी ने इटालियन ब्रांड मासेराती (Maserati) की कार खरीदी थी, जिसमें तकनीकी खराबी और सर्विस में कमी का आरोप लगाया गया था।
  • खर्च का विवरण: * एक्स-शोरूम कीमत: 1.85 करोड़ रुपये।
  • अन्य खर्च: रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन (37.94 लाख), इंश्योरेंस (3.38 लाख), वीआईपी नंबर ‘9999’ (5.90 लाख) और अन्य चार्जेस।
  • तर्क: शिकायतकर्ता का कहना था कि चूंकि ‘ऑन-रोड’ कीमत 2 करोड़ रुपये से ऊपर है, इसलिए मामला सीधे राष्ट्रीय आयोग (NCDRC) में सुना जाना चाहिए।

कोर्ट का फैसला: ‘कंसीडरेशन’ (Consideration) का मतलब क्या?

  • आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत ‘प्रतिफल’ (Consideration) की परिभाषा को स्पष्ट किया।
  • विक्रेता बनाम सरकार: जो पैसा मैन्युफैक्चरर या डीलर को दिया गया (1.85 करोड़), वही ‘कंसीडरेशन’ है। रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन का पैसा सरकारी खजाने (Exchequer) में जाता है, इसलिए इसे विक्रेता को दी गई कीमत नहीं माना जा सकता।
  • अनिवार्यता बनाम अनुबंध: रोड टैक्स देना एक कानूनी मजबूरी है, न कि कार की कीमत का हिस्सा। यह ग्राहक के फायदे के लिए है ताकि वह सड़क पर गाड़ी चला सके, न कि डीलर की कमाई।

Table: Price Breakdown and Jurisdictional Logic

खर्च का प्रकारराशिक्या यह NCDRC के लिए गिनी जाएगी?
एक्स-शोरूम कीमत1.85 करोड़हाँ (यह विक्रेता को दिया गया भुगतान है)
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन37.94 लाखनहीं (यह सरकारी टैक्स है)
इंश्योरेंस प्रीमियम3.38 लाखनहीं (यह बीमा कंपनी को जाता है)
कुल ऑन-रोड कीमत~2.32 करोड़नहीं (केवल 1.85 करोड़ ही आधार माना जाएगा)

वर्ष 2019 के नए कानून का असर

  • आयोग ने बताया कि 2019 के संशोधित कानून ने अधिकार क्षेत्र तय करने का तरीका बदल दिया है।
  • पुराना कानून (1986): इसमें मुआवजे (Compensation) की मांग को भी जोड़कर वैधानिक सीमा तय होती थी।
  • नया कानून (2019): अब केवल ‘भुगतान की गई राशि’ (Value of consideration paid) ही आधार है। संसद ने यह बदलाव जानबूझकर किया है ताकि लोग अपनी मर्जी से किसी भी अदालत में केस न डाल सकें (Forum Shopping)।

शिकायतकर्ता के लिए आगे का रास्ता

  • NCDRC ने शिकायत को तकनीकी आधार पर खारिज जरूर किया है, लेकिन न्याय के रास्ते बंद नहीं किए हैं।
  • स्टेट कमीशन: शिकायतकर्ता अब उचित राज्य उपभोक्ता आयोग (State Commission) में जा सकता है, क्योंकि 1.85 करोड़ की राशि उसके अधिकार क्षेत्र में आती है।
  • दावे पर असर नहीं: अधिकार क्षेत्र की इस लड़ाई का असर कार के ‘डिफेक्ट’ या ‘सर्विस की कमी’ वाले मूल दावों पर नहीं पड़ेगा।

निष्कर्ष: महंगी खरीदारी करने वालों के लिए सबक

यह फैसला लग्जरी सामान खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए एक गाइड की तरह है। यदि आप करोड़ों की गाड़ी या प्रॉपर्टी खरीदते हैं, तो टैक्स और रजिस्ट्रेशन को हटाकर जो शुद्ध कीमत बचती है, वही तय करेगी कि आपको अपनी शिकायत लेकर जिला, राज्य या राष्ट्रीय स्तर के किस आयोग के पास जाना है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
haze
34 ° C
34 °
34 °
20 %
4.1kmh
0 %
Sat
38 °
Sun
41 °
Mon
40 °
Tue
41 °
Wed
42 °

Recent Comments