Public infra: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की तीन प्रमुख नदियों जोजरी, बांडी और लूनी में बढ़ते प्रदूषण पर गहरी नाराजगी व्यक्त की।
अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों की “सुस्ती और टालमटोल” (Dragging their feet) के कारण सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ जोजरी नदी में प्रदूषण से संबंधित एक स्वतः संज्ञान (Suo motu) मामले की सुनवाई कर रही थी।
सुनवाई के मुख्य बिंदु
- अधिकारियों की उदासीनता: बेंच ने कहा कि सरकारी अधिकारियों की लापरवाही की वजह से व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। कोर्ट ने पाया कि क्षेत्र में कई फैक्टरियां बिना किसी अनुमति के धड़ल्ले से चल रही हैं।
- समिति की रिपोर्ट: पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदूषण रोकने और सुधारात्मक उपाय सुझाने के लिए एक ‘हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी’ का गठन किया था। समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में बताया कि राज्य सरकार उन्हें आवश्यक सुविधाएं और सहयोग प्रदान करने में कोताही बरत रही है।
- लॉजिस्टिक्स की कमी: कोर्ट ने राजस्थान सरकार के वकील को फटकार लगाते हुए कहा कि समिति को काम पूरा करने के लिए जरूरी लॉजिस्टिक सहायता नहीं मिल रही है। राज्य के वकील ने आश्वासन दिया कि अगली सुनवाई तक इन कमियों को दूर कर लिया जाएगा।
“सिस्टम का पतन और प्रशासनिक बेरुखी”
कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह पिछले दो दशकों से चली आ रही “प्रणालीगत विफलता” (Systemic Collapse) और “प्रशासनिक उदासीनता” का नतीजा है। “इस लापरवाही ने पश्चिमी राजस्थान की तीन महत्वपूर्ण नदियों के पारिस्थित तंत्र, जानवरों और लगभग 20 लाख लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया है।
नदियों का भूगोल और प्रदूषण का दायरा
- जोजरी नदी: जोधपुर से होकर गुजरती है।
- बांडी नदी: पाली जिले से बहती है।
- लूनी नदी: बालोतरा से गुजरती है।
यह होगा अगला कदम
बांडी और जोजरी नदियां बालोतरा के पास लूनी नदी में मिल जाती हैं, जिससे प्रदूषण का दायरा और व्यापक हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च के लिए तय की है। कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया है कि वह नदी प्रणाली के पुनरुद्धार (Rejuvenation) के लिए एक वैज्ञानिक और समयबद्ध ब्लूप्रिंट तैयार करे।

