Friday, October 16, 2026
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RTI Act: पंजाब राज्य सूचना आयोग…RTI में 6 साल की देरी और 9 सुनवाइयों तक ग्रामीण विकास निदेशक के अफसरों की अनदेखी, पढ़िए मामला

मामले की पृष्ठभूमि और आयोग की मुख्य टिप्पणियां

  1. अपीलकर्ता की दलील:अपीलकर्ता ने 2020 में एक RTI आवेदन दाखिल किया था। 9वीं सुनवाई के दौरान भी अपीलकर्ता ने बताया कि उसे पूरी जानकारी नहीं मिली है। जन सूचना अधिकारी (PIO) ने बिंदु 16 के संबंध में तर्क दिया कि छप्पड़चिड़ी खुर्द गांव से जुड़े अदालती मामलों के रिकॉर्ड 28 नवंबर 2025 के सरकारी आदेशों के तहत नगर निगम मोहाली को स्थानांतरित कर दिए गए हैं। अपीलकर्ता ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि 2020 की RTI पर 2025 के स्थानांतरण का बहाना पूरी तरह से अमान्य है।
  2. जमानती वारंट और शो-कॉज नोटिस का उल्लंघन:आयोग ने रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि संबंधित PIO बार-बार सुनवाई से अनुपस्थित रहा। अधिकारी को आरटीआई अधिनियम की धारा 20 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट (Bailable Warrants) तक जारी किए गए थे, लेकिन उसने न तो कोई लिखित स्पष्टीकरण दिया और न ही उपस्थित हुआ।
  3. आयोग की तीखी टिप्पणी:सूचना आयुक्त ने कहा कि लगातार गैर-हाजिरी, समय पर जानकारी न देना और आयोग के आदेशों की अवहेलना करना वैधानिक कर्तव्यों का घोर उल्लंघन और घोर लापरवाही है। इसके कारण आवेदक को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ी है।

आयोग द्वारा जारी मुख्य निर्देश

  • ₹5,000 का मुआवजा: आरटीआई अधिनियम की धारा 19(8)(b) के तहत लोक प्राधिकरण को आवेदक को हुए नुकसान/उत्पीड़न के लिए ₹5,000 की क्षतिपूर्ति राशि देने का निर्देश दिया गया।
  • निदेशक को व्यक्तिगत जांच के आदेश: आदेश की एक प्रति ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक को भेजी गई है, ताकि वे व्यक्तिगत रूप से मामले की जांच करें, 6 साल की देरी और अदालती अवहेलना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करें और उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

चंडीगढ़: सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) की धारा 7(1) के तहत 30 दिनों के भीतर सूचना प्रदान करने की सांविधिक समय-सीमा, धारा 19(8)(b) के तहत आवेदक को उत्पीड़न हेतु क्षतिपूर्ति (Compensation for Harassment), धारा 20 के तहत लोक सूचना अधिकारी (PIO) पर शास्ति/विभागीय कार्रवाई की अनिवार्यता, तथा राज्य सूचना आयोग द्वारा जमानती वारंट (Bailable Warrants) जारी किए जाने के बावजूद अधिकारियों की निरंतर अनुपस्थिति को पंजाब राज्य सूचना आयोग ने अत्यंत गंभीरता से लिया है।

राज्य सूचना आयुक्त भूपिंदर बाठ ने वर्ष 2020 से लंबित एक आरटीआई अपील की 9वीं सुनवाई के दौरान लोक सूचना अधिकारी और संबंधित विभाग के आचरण को “पूरी तरह से अस्वीकार्य” (Wholly Unacceptable) और वैधानिक दायित्वों के निर्वहन में “घोर लापरवाही” (Gross Negligence) करार दिया। आयोग ने ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक को व्यक्तिगत रूप से मामले की जांच करने, 6 वर्षों की देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करने का कड़ा निर्देश जारी किया है। साथ ही, आवेदक को मानसिक प्रताड़ना के लिए ₹5,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

राज्य सूचना आयोग के मुख्य निष्कर्ष एवं तल्ख टिप्पणियां

1. ‘जानबूझकर और लगातार अवहेलना (Deliberate and Persistent Disregard)’

राज्य सूचना आयुक्त भूपिंदर बाठ ने लोक प्राधिकारी (Public Authority) के टालमटोल भरे रवैये को दर्ज करते हुए कहा: “मामला अपनी 9वीं सुनवाई तक पहुंच चुका है और संबंधित पीआईओ आयोग की कार्यवाहियों का पालन करने में बार-बार विफल रहा है। बार-बार अनुपस्थित रहना, सूचना न देना, लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत न करना और आयोग के निर्देशों की निरंतर अनदेखी करना सांविधिक कर्तव्यों के निर्वहन में घोर लापरवाही (Gross Negligence) है। प्रतिवादी का यह आचरण जानबूझकर और लगातार की गई अवहेलना (Deliberate and persistent disregard) को दर्शाता है, जिसके कारण अपीलकर्ता को अनावश्यक मानसिक उत्पीड़न और प्रताड़ना झेलनी पड़ी है।”

2. जमानती वारंट के बावजूद अधिकारी का पेश न होना:

  • आयोग ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि संबंधित पीआईओ को पहले धारा 20 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
  • जब अधिकारी ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया, तो उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए आयोग ने जमानती वारंट (Bailable Warrants) जारी किए थे।
  • इसके बावजूद अधिकारी न तो व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुआ और न ही कोई विधिक स्पष्टीकरण रिकॉर्ड पर रखा, जो आयोग के विधिक प्राधिकार की सीधी अवहेलना है।

3. 2020 के आवेदन पर 2025 के आदेश का बहाना ‘अस्वीकार्य’:

  • विभाग (DDPO कार्यालय) ने बिंदु 16 के संबंध में दलील दी कि छप्परचिड़ी खुर्द गांव से संबंधित अदालती मामलों के रिकॉर्ड 28 नवंबर 2025 के पंजाब सरकार के आदेश के तहत नगर निगम, मोहाली को स्थानांतरित कर दिए गए हैं।
  • अपीलकर्ता ने इस पर तीखा विरोध दर्ज कराया कि जब मूल आवेदन वर्ष 2020 में लगाया गया था, तो 5-6 वर्षों तक सूचना दबाए रखने के बाद 2025 के स्थानांतरण का बहाना बनाना कानूनी रूप से पूरी तरह अमान्य और दुर्भावनापूर्ण है। आयोग ने इस तर्क से सहमति जताई।

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि एवं कालक्रम

चरण / वर्षघटनाक्रम एवं प्रशासनिक विफलता
वर्ष 2020अपीलकर्ता द्वारा आरटीआई अधिनियम, 2005 के तहत छप्परचिड़ी खुर्द गांव के अदालती मामलों और भूमि/पंचायत रिकॉर्ड (विशेष रूप से बिंदु 13 और 16) से संबंधित सूचना की मांग की गई।
2020 से 2026 (6 साल की देरी)लोक सूचना अधिकारी (PIO) द्वारा तय 30 दिनों में पूर्ण सूचना नहीं दी गई; मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी से होते हुए राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील तक पहुंचा।
9 सुनवाइयों का दौरआयोग के समक्ष सुनवाई 9वीं तारीख तक खिंच गई। पीआईओ ने न तो रिकॉर्ड पेश किया और न ही आयोग के समक्ष उपस्थित हुआ।
जमानती वारंटउपस्थिति दर्ज कराने के लिए आयोग द्वारा पीआईओ के खिलाफ जमानती वारंट और धारा 20 का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया, जिसकी भी अनदेखी की गई।
विभाग का अधूरा बचावसुनवाई के दौरान डीडीपीओ कार्यालय ने अपीलकर्ता को कुछ प्रतियां सौंपीं और दावा किया कि रिकॉर्ड 28 नवंबर 2025 के आदेश से मोहाली नगर निगम को भेज दिया गया है।
आयोग का अंतिम आदेश (अक्टूबर 2026)₹5,000 का मुआवजा मंजूर; निदेशक (ग्रामीण विकास एवं पंचायत) को जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान कर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का आदेश।

विधिक एवं सांविधिक विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

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│ RTI अधिनियम, 2005: सांविधिक जवाबदेही का ढांचा │
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【धारा 7(1): 30 दिन की बाध्यता】 【धारा 19(8)(b): आवेदक को क्षतिपूर्ति】 【धारा 20: दंडात्मक व अनुशासनात्मक कार्रवाई】
• आरटीआई का मूल उद्देश्य त्वरित सूचना है। • सूचना में देरी से नागरिक को हुई मानसिक • जानबूझकर सूचना रोकने या आयोग के
• 6 वर्ष की देरी आरटीआई की वैधानिक प्रताड़ना और भागदौड़ के लिए लोक प्राधिकारी समन की अवहेलना पर ₹250/दिन (अधिकतम
आत्मा और नागरिक अधिकार का हनन है। पर मुआवजा (वर्तमान में ₹5,000) अधिरोपित। ₹25,000) का जुर्माना और अनुशासनात्मक जांच।
  • सिविल कोर्ट की शक्तियां (धारा 18(3) RTI Act):
    • राज्य सूचना आयोग के पास व्यक्तियों को समन करने, उनकी उपस्थिति अनिवार्य करने और दस्तावेज पेश कराने के लिए सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के तहत एक सिविल अदालत की शक्तियां निहित होती हैं।
    • पीआईओ द्वारा आयोग के जमानती वारंट की अनदेखी करना न्यायालय के आदेश की जानबूझकर अवहेलना और सेवा नियमों के तहत गंभीर कदाचार (Misconduct) है।
  • रिकॉर्ड ट्रांसफर की आड़ में देरी अस्वीकार्य:
    • यदि 2020 में आवेदन दायर हुआ था, तो उस समय रिकॉर्ड जिस विभाग की कस्टडी में था, उसे धारा 7(1) के तहत जानकारी देनी थी। वर्ष 2025 में हुए प्रशासनिक ट्रांसफर का हवाला देकर 2020 के आवेदक को वंचित करना ‘प्रशासनिक दुर्भावना’ (Administrative Malafide) है।

विधिक विवरण

  • प्राधिकरण: पंजाब राज्य सूचना आयोग, चंडीगढ़ (Punjab State Information Commission)
  • पीठ: राज्य सूचना आयुक्त (State Information Commissioner) भूपिंदर बाठ
  • आदेश की तिथि: अक्टूबर 2026
  • संबद्ध सार्वजनिक विभाग: ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग, पंजाब सरकार (DDPO कार्यालय / ग्राम पंचायत छप्परचिड़ी खुर्द)
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
    • सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act, 2005) — धारा 7(1) (सूचना निपटान की समय-सीमा), धारा 18(3) (समन व वारंट की शक्तियां), धारा 19(8)(b) (मुआवजा अधिरोपण) एवं धारा 20 (शास्ति एवं अनुशासनात्मक कार्रवाई)
    • पंजाब सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियमावली — कर्तव्य में घोर उपेक्षा हेतु विभागीय कार्रवाई
  • संबद्ध कानूनी सिद्धांत:
    • सांविधिक समय-सीमा और पारदर्शिता: ‘सूचना देने में 6 साल की देरी और न्यायिक समन की अवहेलना प्रशासनिक अराजकता है; पीआईओ द्वारा कानूनी दायित्वों की अनदेखी करने पर राज्य व्यक्तिगत अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और आवेदक को क्षतिपूर्ति देने के लिए बाध्य है।’
  • आयोग के अंतिम निर्देश:
    1. अपीलकर्ता को हुए उत्पीड़न के लिए ₹5,000 का मुआवजा तत्काल भुगतान किया जाए।
    2. ग्रामीण विकास एवं पंचायत निदेशक को आदेश की प्रति भेजकर मामले की व्यक्तिगत जांच करने का निर्देश।
    3. वर्ष 2020 से 2026 तक सूचना दबाने और 9 सुनवाइयों तक पेश न होने वाले संबंधित पीआईओ/अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

RTI Act: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित निकायपंजाब राज्य सूचना आयोग (Punjab State Information Commission)
सूचना आयुक्तराज्य सूचना आयुक्त भूपिंदर बठ (State Information Commissioner Bhupinder Batth)
मुख्य मुद्दा2020 में दाखिल RTI आवेदन पर 6 साल (2026 तक) बाद भी अधूरी जानकारी देना व सुनवाई से गायब रहना।
संबंधित विभागग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग, पंजाब (DDPO / PIO कार्यालय)
आयोग का सख्त आदेश1. पीड़ित आवेदक को ₹5,000 का मुआवजा देने का आदेश।
2. दोषी PIO/अधिकारियों को चिन्हित कर प्रशासनिक कार्रवाई का निर्देश।
लागू कानूनी धाराआरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 19(8)(b) (मुआवजा) और धारा 20 (शास्ती/पेनाल्टी)।
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