Supreme Court in view
SARFAESI ACT: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, SARFAESI Act (Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002) के तहत नीलामी नोटिस प्रकाशित होने के बाद उधारकर्ता अपनी संपत्ति वापस नहीं ले सकते।
2002 में लागू SARFAESI कानून का उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा करना था
अदालत ने कहा, क्योंकि बैंक या वित्तीय संस्थान द्वारा जारी सेल सर्टिफिकेट से खरीदारों को अटल अधिकार (indefeasible rights) मिल जाते हैं। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि 2002 में लागू SARFAESI कानून का उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा करना था, लेकिन धारा 13(8) और कुछ नियमों में अस्पष्टता के कारण लंबे समय तक मुकदमेबाजी चलती रही। शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि 2016 में धारा 13(8) में किया गया संशोधन, जिसके तहत नीलामी नोटिस प्रकाशित होने के बाद उधारकर्ता का रिडेम्पशन का अधिकार समाप्त हो जाता है। उन कर्जों पर भी लागू होगा जो संशोधन से पहले लिए गए थे, यदि डिफॉल्ट 1 सितंबर 2016 के बाद हुआ है।
प्रावधानों की गंभीरता से समीक्षा करें वित्त मंत्रालय
140 पन्नों का फैसला लिखते हुए जस्टिस पारदीवाला ने कहा, हम विनम्रतापूर्वक वित्त मंत्रालय से आग्रह करते हैं कि इन प्रावधानों की गंभीरता से समीक्षा करें और आवश्यक बदलाव करें, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए। पीठ ने कहा कि कानून लागू हुए 23 साल हो चुके हैं, फिर भी प्रक्रियात्मक समस्याएं आज भी बनी हुई हैं। अदालत ने धारा 13(8) और SARFAESI नियमों (रूल 8 और 9) के बीच विसंगतियों को “गंभीर असंगति” बताया। फैसले में कहा गया कि “धारा 13(8) की त्रुटिपूर्ण भाषा ने प्रावधान और नियमों के बीच गहरा टकराव खड़ा कर दिया है। दुर्भाग्यवश, इस कानूनी अस्पष्टता ने सुरक्षित लेनदारों और नीलामी खरीदारों दोनों के हितों को अधर में छोड़ दिया है।”
SARFAESI नियमों में बिक्री के लिए अलग नोटिस की कोई आवश्यकता नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय की प्रति सभी हाईकोर्ट्स और वित्त मंत्रालय व कानून मंत्रालय के प्रधान सचिवों को भेजने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि संशोधित प्रावधान स्पष्ट करता है, अगर उधारकर्ता नीलामी नोटिस जारी होने से पहले बकाया राशि चुकाकर संपत्ति मुक्त नहीं करता, तो उसका रिडेम्पशन अधिकार स्वतः समाप्त हो जाएगा। साथ ही अदालत ने कहा कि SARFAESI नियमों में बिक्री के लिए अलग नोटिस की कोई आवश्यकता नहीं है और यह कानून बैंकों के एनपीए (NPA) कम करने के लिए तेज़ प्रक्रिया प्रदान करने के उद्देश्य से लाया गया था। पीठ ने उधारकर्ताओं की इस दलील को खारिज कर दिया कि उनका रिडेम्पशन अधिकार उस तारीख के अनुसार तय होना चाहिए जब उन्होंने लोन लिया था। अदालत ने इसे “पूरी तरह भ्रांतिपूर्ण” कहा।
सुरक्षित संपत्ति पर किसी तीसरे पक्ष के अधिकार बने तो…
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अगर सुरक्षित संपत्ति पर किसी तीसरे पक्ष के अधिकार बनाए गए हैं, तो यह फैसला उन्हें अमान्य (non-est) कर देगा। नीलामी खरीदारों के अधिकारों को मज़बूत करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एम. राजेंद्रन व अन्य की अपीलें स्वीकार कीं और मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने M/s KPK Oils and Proteins India Pvt. Ltd. की गिरवी संपत्ति की नीलामी को निरस्त कर दिया था। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (DRT) के निष्कर्षों में अनावश्यक हस्तक्षेप किया। साथ ही यह दोहराया कि एक बार धारा 13(8) के तहत नीलामी नोटिस जारी हो जाने पर उधारकर्ता का संपत्ति रिडीम करने का अधिकार समाप्त हो जाता है।






