SC news: सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाईकोर्ट के एक मौजूदा जज पर आपत्तिजनक आरोप लगाने के मामले में याचिकाकर्ता, उनके एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड और ड्राफ्टिंग वकील को अवमानना नोटिस जारी किया है।
यह रही शीर्ष कोर्ट की सख्त टिप्पणी
कोर्ट ने याचिका में इस्तेमाल की गई भाषा को गंभीरता से लेते हुए वकील की माफी और याचिका वापस लेने की कोशिश को खारिज कर दिया। मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के मौजूदा जज पर आरोप लगाना अवमानना को आमंत्रित करना है। कोर्ट ने कहा कि जो वकील ऐसी याचिकाओं पर हस्ताक्षर करते हैं, वे भी कानून के तहत अवमानना के लिए समान रूप से जिम्मेदार होते हैं।
नसीहत…हस्ताक्षर करने से पहले सावधानी बरतें
CJI ने वकील से पूछा, “क्या यह आपकी जिम्मेदारी नहीं है कि कोर्ट के एक जिम्मेदार अधिकारी के रूप में ऐसी याचिका पर हस्ताक्षर करने से पहले सावधानी बरतें?” कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना उसकी जिम्मेदारी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि हम जजों को कटघरे में खड़ा करने की इजाजत नहीं दे सकते, जबकि वकील और याचिकाकर्ता उन पर आरोप लगाते रहें।
याचिका वापसी की कोशिश खारिज
कोर्ट ने कहा कि जब हमने याचिका की भाषा पर नाराजगी जताई, तब वकील ने याचिका वापस लेने की कोशिश की। लेकिन हम इसे अनुमति नहीं दे सकते। याचिका खारिज की जाती है।
अब सभी से जवाब मांगा गया
कोर्ट ने अब याचिकाकर्ता, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड और ड्राफ्टिंग वकील से पूछा है कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

