Special Court: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि वे गैंगस्टरों से जुड़े मामलों की तेजी से सुनवाई के लिए अलग कोर्ट बनाने पर विचार करें।
फिलहाल सीमित संख्या में कोर्ट हैं: कोर्ट
कोर्ट ने कहा कि फिलहाल सीमित संख्या में कोर्ट हैं, जो आईपीसी, एनडीपीएस और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों के साथ-साथ गैंगस्टरों के केस भी देख रहे हैं। इससे सुनवाई में देरी हो रही है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि जैसे पहले गंभीर अपराधों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए थे, वैसे ही गैंगस्टरों के लिए भी अलग कोर्ट बनाए जा सकते हैं। इससे ट्रायल तेजी से पूरा होगा और अपराधियों को जमानत नहीं मिलेगी।
कोर्ट ने कहा- समाज को इन अपराधियों से छुटकारा चाहिए
बेंच ने कहा, “हम किसी मामूली अपराध की बात नहीं कर रहे, ये कड़े अपराधी हैं। समाज को इनसे छुटकारा चाहिए। कानून का राज कायम होना चाहिए और पुलिस को सख्ती से काम करना होगा। दिल्ली सरकार के हलफनामे का हवाला देते हुए कोर्ट ने बताया कि 288 मामलों में से सिर्फ 108 में आरोप तय हुए और उनमें से भी सिर्फ 25 मामलों में गवाहों की जांच शुरू हुई। 180 मामलों में अब तक आरोप तय नहीं हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि चार्ज तय होने और गवाहों की जांच शुरू होने में 3-4 साल का अंतर है।
जमानत का विरोध करने के बजाय ट्रायल पूरा करें: कोर्ट
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आंकड़े खुद बता रहे हैं कि कैसे गैंगस्टर ट्रायल में देरी करवा कर जमानत पा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष को जमानत का विरोध करने के बजाय ट्रायल पूरा करने पर ध्यान देना चाहिए। जस्टिस बागची ने कहा कि सरकारी वकील विशेष कानूनों के मामलों पर ध्यान नहीं दे पा रहे क्योंकि वे अन्य मामलों में व्यस्त हैं। उन्होंने कहा, “अब यह ट्रेंड बन गया है कि हर केस गिरफ्तारी से शुरू होता है और जमानत पर खत्म हो जाता है। न सजा होती है, न बरी किया जाता है।
गवाहों को सुरक्षा नहीं, इसलिए वे बयान नहीं देते
कोर्ट ने कहा कि गवाहों को सुरक्षा नहीं मिलने से वे गैंगस्टरों के खिलाफ गवाही देने से डरते हैं। जस्टिस बागची ने कहा, “गवाहों को जेल में नहीं रखा जा सकता। वे समाज में रहते हैं और उन्हें सुरक्षा मिलनी चाहिए। वे अभियोजन की आंख और कान हैं। अगर ये कमजोर पड़ते हैं तो सजा नहीं हो सकती।”
दिल्ली हाईकोर्ट को कोई आपत्ति नहीं, सरकार को मंजूरी देनी होगी
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को ऐसे मामलों के लिए अलग कोर्ट बनाने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसके लिए सरकार को अतिरिक्त जजों की नियुक्ति और जरूरी ढांचा तैयार करना होगा। कोर्ट ने यह टिप्पणी गैंगस्टर महेश खत्री उर्फ भोली की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। खत्री पर दिल्ली में 55 केस दर्ज हैं और वह दो मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में 95 गैंग सक्रिय हैं और वे ट्रायल में देरी का फायदा उठाकर जमानत ले रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को तीन हफ्ते में गैंगस्टरों के मामलों के लिए अलग कोर्ट बनाने का प्रस्ताव पेश करने को कहा है।

