Sunday, June 14, 2026
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Quashing Petition: पहली याचिका में न उठाए गए आधारों पर दूसरी क्वैशिंग याचिका नहीं चलेगी…यह रहा सुप्रीम निर्देश

Quashing Petition: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 482 के तहत दूसरी याचिका तभी स्वीकार की जा सकती है जब परिस्थितियों में कोई नया बदलाव हुआ हो।

मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल

23 जुलाई 2025 के आदेश में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दायर की गई क्वैशिंग याचिका में यदि कोई आधार पहले से उपलब्ध था, लेकिन उसे पहली याचिका में नहीं उठाया गया, तो उस आधार पर दूसरी याचिका दायर नहीं की जा सकती। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने यह फैसला उस मामले में सुनाया, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट ने पहले दिसंबर 2021 में आरोपी की पहली क्वैशिंग याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन बाद में सितंबर 2022 में उसी तरह के आधारों पर दूसरी याचिका स्वीकार कर ली थी। इस पर शिकायतकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।

पहले से उपलब्ध था आधार, फिर भी नहीं उठाया गया

कोर्ट ने कहा कि आरोपी-प्रतिवादियों के खिलाफ तंजावुर की संपत्तियों को लेकर दर्ज की गई एक अन्य शिकायत को हाईकोर्ट ने 9 मार्च 2020 को खारिज कर दिया था। यह फैसला पहली क्वैशिंग याचिका खारिज होने से पहले का था, यानी यह आधार पहले से उपलब्ध था। इसके बावजूद आरोपी ने इसे पहली याचिका में नहीं उठाया। ऐसे में वे बाद में इसी आधार पर दूसरी याचिका दाखिल नहीं कर सकते।

हाईकोर्ट ने खुद का फैसला ही रिव्यू कर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने दूसरी याचिका स्वीकार कर अपने ही पहले फैसले की समीक्षा कर दी, जो कि CrPC की धारा 362 का उल्लंघन है। यह धारा स्पष्ट रूप से कहती है कि कोर्ट अपने किसी अंतिम आदेश या फैसले की समीक्षा नहीं कर सकता, सिवाय टाइपिंग या गणना की गलती सुधारने के। कोर्ट ने कहा, “दूसरी याचिका पर दिया गया हाईकोर्ट का आदेश, पहली याचिका पर दिए गए आदेश की सीधी समीक्षा है। चूंकि परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ था और कोई नया आधार भी सामने नहीं आया था, इसलिए यह आदेश कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है।”

पहले ही तय मुद्दों पर दोबारा सुनवाई नहीं

कोर्ट ने 2023 के एक फैसले (भिषम लाल वर्मा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) का हवाला देते हुए कहा कि CrPC की धारा 482 का इस्तेमाल उन्हीं मामलों में किया जा सकता है, जिनमें नए तथ्य या परिस्थितियां सामने आई हों। पहले से उपलब्ध मुद्दों पर दोबारा सुनवाई नहीं हो सकती।

Crl. Appeal @ SLP (Crl.) No (s). 12715 of 2022

M.C. RAVIKUMAR VERSUS D.S. VELMURUGAN
& ORS

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