UKD-HC उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में 140 ऐसे कैदियों की रिहाई न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है, जो सरकार की नीति के तहत रिहाई के पात्र हैं।
रिहाई के पात्र कैदी 5-6 साल से जेलों में बंद
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जी. नरेंद्र और जस्टिस राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने कहा कि नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी, स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और जिला लीगल सर्विसेज अथॉरिटी की लगातार कोशिशों के बावजूद रिहाई के पात्र कैदी 5-6 साल से जेलों में बंद हैं। कोर्ट ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण बताया और दो हफ्ते के भीतर एक सक्षम प्राधिकरण बोर्ड बनाने का आदेश दिया, जो इन मामलों की समीक्षा कर रिहाई पर फैसला ले।
140 कैदी समय से पहले रिहाई के पात्र हैं
कोर्ट के सामने पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 140 कैदी ऐसे हैं, जो सरकार की नीति के तहत समय से पहले रिहाई के पात्र हैं। इनमें से पहले तीन कैदी 2019, 2020 और 2021 से रिहाई के योग्य हैं, लेकिन अब तक जेल में हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए, ताकि पात्र कैदियों को जल्द से जल्द राहत मिल सके।

