US-SUPREME COURT: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के रूढ़िवादी बहुमत वाले जजों ने उन राज्य कानूनों के प्रति संदेह जताया है जो चुनाव के बाद पहुंचने वाले डाक मतपत्रों (Mail-in Ballots) की गिनती की अनुमति देते हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से इन कानूनों का विरोध करते रहे हैं।यदि अदालत जून के अंत तक इन मतपत्रों की गिनती पर रोक लगाने का फैसला सुनाती है, तो 14 राज्यों और कोलंबिया जिले को 2026 के मध्यावधि चुनावों (Midterm Elections) से ठीक पहले अपने नियम बदलने के लिए संघर्ष करना होगा।
मामले का मुख्य विवाद
- एकल चुनाव दिवस”यह कानूनी लड़ाई मिसिसिपी राज्य और ट्रंप प्रशासन के बीच है।
- मुख्य मुद्दा यह है: संघीय कानून बनाम राज्य कानून: क्या संघीय कानून एक ‘एकल चुनाव दिवस’ (Single Election Day) निर्धारित करता है, जिसका अर्थ है कि मतपत्र न केवल उस दिन तक डाले जाने चाहिए, बल्कि अधिकारियों को प्राप्त भी हो जाने चाहिए?
- ट्रंप का रुख: ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि चुनाव के बाद मतपत्र प्राप्त करना धोखाधड़ी को बढ़ावा देता है।राज्यों का तर्क: कैलिफोर्निया, टेक्सास और न्यूयॉर्क जैसे राज्यों का कहना है कि डाक की देरी या खराब मौसम (जैसे अलास्का में) के कारण मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
जजों की अलग-अलग राय
न्यायाधीश झुकाव / टिप्पणी
जस्टिस सैमुअल अलिटो धोखाधड़ी की संभावना पर चिंता जताई। उन्होंने पूछा कि क्या होगा यदि चुनाव के बाद आने वाले मतपत्रों का बड़ा ढेर अचानक चुनाव परिणाम पलट दे।
जस्टिस सोनिया सोटोमेयर उन्होंने कहा कि यह फैसला अदालतों का नहीं, बल्कि कांग्रेस और राज्यों का होना चाहिए। उन्होंने 2000 के ‘बुश बनाम गोर’ मामले का उदाहरण भी दिया।
जस्टिस नील गोर्सच उन्होंने चिंता जताई कि यदि राज्यों को छूट दी गई, तो वे अगले कांग्रेस सत्र शुरू होने तक (2 महीने बाद तक) मतपत्र ले सकते हैं।
जस्टिस ऐलेना कागन उन्होंने तर्क दिया कि यदि देर से आने वाले मतपत्रों पर रोक लगी, तो भविष्य में ‘अर्ली वोटिंग’ और ‘एब्सेंटी बैलेट’ पर भी संकट आ सकता है।
प्रमुख बिंदु और प्रभाव
- धोखाधड़ी के सबूत: मिसिसिपी के सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन अभी तक देर से आने वाले मतपत्रों के कारण धोखाधड़ी का एक भी मामला पेश नहीं कर पाया है।
- प्रभावित राज्य: 14 मुख्य राज्यों के अलावा, 15 अन्य राज्य जो सैन्य और विदेशी मतदाताओं (Military and Overseas voters) को छूट देते हैं, वे भी इस फैसले की चपेट में आ सकते हैं।
- रिपब्लिकन राज्यों का कदम: पिछले साल ओहियो, कंसास, नॉर्थ डकोटा और यूटा जैसे रिपब्लिकन प्रभुत्व वाले राज्यों ने पहले ही अपनी ‘ग्रेस पीरियड’ (छूट की अवधि) को समाप्त कर दिया है।
निष्कर्ष
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स और जस्टिस एमी कोनी बैरेट इस मामले में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। यदि अदालत निचली अदालत (5th Circuit) के फैसले को बरकरार रखती है, तो अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव आएगा, जिससे लाखों डाक मतपत्रों की वैधता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

