Vacation bench: सुप्रीम कोर्ट में क्रिसमस और नए साल की छुट्टियों के बावजूद ‘स्पेशल वेकेशन बेंच’ (विशेष अवकाश पीठ) ने काम शुरू कर दिया है।
सीजेआई की दो टूक
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्य बागची की बेंच ने स्पष्ट किया कि छुट्टियों के दौरान केवल उन्हीं मामलों की सुनवाई होगी जो बेहद जरूरी हैं। मामले में अगर रजिस्ट्री कार्यालय संतुष्ट होती है, तो उन मामलों को 26 या 29 दिसंबर को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा।
क्या है नई व्यवस्था?
सुनवाई शुरू होते ही वकीलों ने अपने केसों को ‘अर्जेंट’ बताकर मेंशन करना शुरू कर दिया। इस पर CJI ने निर्देश दिया:
- सीधे रजिस्ट्री जाएं: अब वकीलों को कोर्ट में मेंशनिंग करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में आवेदन देना होगा।
- कारणों की जांच: रजिस्ट्री पहले उन कारणों की बारीकी से जांच (Scrutiny) करेगी कि मामला वाकई में तुरंत सुनवाई के योग्य है या नहीं।
- तय होगी तारीख: अगर रजिस्ट्री संतुष्ट होती है, तो उन मामलों को 26 या 29 दिसंबर को सुनवाई के लिए लिस्ट किया जाएगा।
CJI ने निभाया अपना वादा: छुट्टियों के पहले दिन ही बैठे
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पिछले शुक्रवार को ही कहा था कि वे छुट्टियों के पहले दिन यानी 22 दिसंबर को बैठने के लिए तैयार हैं ताकि जरूरी न्यायिक हस्तक्षेप (Judicial Intervention) में देरी न हो। इसी वादे के मुताबिक सोमवार को विशेष बेंच ने उन मामलों पर विचार किया जिनमें तुरंत राहत की आवश्यकता थी।
क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
आमतौर पर छुट्टियों के दौरान सुप्रीम कोर्ट का कामकाज सीमित रहता है। लेकिन ‘पेंडिंग’ केसों के दबाव और तत्काल न्याय की जरूरत को देखते हुए CJI का यह फैसला ऐतिहासिक माना जा रहा है। बेंच ने साफ किया कि यह विशेष व्यवस्था केवल इसलिए की गई है ताकि किसी नागरिक के अधिकारों का हनन न हो।
क्या है वेकेशन बेंच?
जब सुप्रीम कोर्ट लंबी छुट्टियों (जैसे गर्मी या सर्दी की छुट्टियां) पर होता है, तब ‘वेकेशन बेंच’ का गठन किया जाता है। यह बेंच उन मामलों की सुनवाई करती है जिन्हें अगली नियमित सुनवाई तक नहीं टाला जा सकता, जैसे कि फांसी की सजा पर रोक या गंभीर व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामले।

