VULGAR MESSAGES: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि किसी विवाहित वर्दीधारी अधिकारी द्वारा किसी अन्य महिला के साथ संबंध रखना और उसे अश्लील संदेश भेजना “वर्दीधारी बल के अधिकारी के लिए अनुचित आचरण (unbecoming of an officer)” है।
CISF के उप-निरीक्षक पर लगाए गए दंड को बरकरार रखा
न्यायालय ने यह टिप्पणी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक उप-निरीक्षक पर लगाए गए दंड को बरकरार रखते हुए की, जिस पर एक महिला सहकर्मी को अशोभनीय संदेश भेजने और फोन पर परेशान करने का आरोप था। न्यायमूर्ति सुभ्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव की पीठ ने कहा, याचिकाकर्ता एक वर्दीधारी सेवा का सदस्य होने के नाते पहले से विवाहित था और उसे किसी अन्य महिला के साथ संबंध रखने या उसे अश्लील संदेश भेजने का कोई अधिकार नहीं था। यह आचरण निश्चित रूप से वर्दीधारी बल के अधिकारी के लिए अनुचित है। पीठ ने 22 सितंबर को पारित अपने निर्णय में कहा कि अधिकारी को दी गई सजा “उचित” है और उसे “बहुत हल्के में लिया गया” है। यह फैसला 14 अक्टूबर को अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। अधिकारी पर दो वर्षों के लिए वेतन में कटौती की सजा दी गई थी, जिसके दौरान उसे कोई वेतनवृद्धि नहीं मिलेगी और यह अवधि पूरी होने के बाद उसकी भविष्य की वेतनवृद्धि भी विलंबित होगी।
यह था मामला
महिला कर्मी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि अधिकारी ने बातचीत के दौरान आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और दुर्भावनापूर्ण इरादे से उसके घर में प्रवेश किया। शिकायत के बाद विभागीय जांच हुई, आरोप सिद्ध पाए गए और सजा दी गई। अधिकारी ने अपने बचाव में कहा था कि उसकी दलीलों पर विचार नहीं किया गया, लेकिन पुनरीक्षण प्राधिकारी (revisional authority) ने उसकी अपील यह कहते हुए खारिज कर दी कि उसके आरोप अस्पष्ट और अस्थिर थे। हाईकोर्ट ने कहा कि जांच समिति ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किया और किसी बाहरी या अप्रासंगिक सामग्री पर विचार नहीं किया। अदालत ने यह भी कहा कि विवाहित अधिकारी पर नैतिक दायित्व था कि वह किसी अन्य महिला से अनुचित संबंध न रखे या उसे अभद्र संदेश न भेजे।

