Monday, August 17, 2026
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Witnesses Hostile: SC ने कहा- मामूली फर्क पर गवाह को hostile कहना गलत

Witnesses Hostile: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, गवाह के बयान में मामूली अंतर या विरोधाभास आने पर उसे “शत्रुतापूर्ण (Hostile)” घोषित करना गलत प्रथा है।

अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करें अदालत

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि अदालतें धारा 154 (अब 157, भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023) के तहत अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल “सावधानी और अपवादस्वरूप परिस्थितियों” में ही करें। अदालत ने कहा कि यह कदम सिर्फ तभी उठाया जाना चाहिए, जब गवाह पूरी तरह से अभियोजन के केस से पलट जाए, झूठ बोले या खुली शत्रुता दिखाए।

कोर्ट बोली — “अक्सर बिना वजह गवाहों को hostile घोषित कर देते हैं”

बेंच ने कहा, “हम बार-बार देख रहे हैं कि अभियोजक बिना ठोस वजह के गवाह को hostile घोषित करने की मांग करते हैं, और अदालतें भी बिना जांचे-परखे मंजूरी दे देती हैं। यह उचित नहीं है।”
कोर्ट ने कहा कि किसी गवाह को hostile तभी कहा जा सकता है जब उसके बयान में झूठ या अभियोजन पक्ष के प्रति स्पष्ट विरोध का तत्व दिखे।

केस की पृष्ठभूमि

यह मामला एक नाबालिग दलित लड़की के अपहरण और दुष्कर्म से जुड़ा था, जिसमें आरोपी को निचली अदालत और हाईकोर्ट दोनों ने दोषी ठहराया था। सुनवाई के दौरान पीड़िता के पिता ने अधिकांश बातें अभियोजन के पक्ष में कही थीं, लेकिन एक मामूली बात कि उन्होंने आरोपी से अगली सुबह मुलाकात की या नहीं इस पर थोड़ा फर्क आया। इसके बावजूद अभियोजक ने उन्हें hostile घोषित करने की अनुमति मांगी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा, हमें समझ नहीं आता कि इस गवाह को hostile मानने की जरूरत ही क्या थी?

कोर्ट ने कहा, “छोटे फर्क पर hostile कहना गलत”

फैसला लिखते हुए जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि अदालतों को अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल सिर्फ विशेष मामलों में ही करना चाहिए। कोर्ट ने 1976 के Sri Rabindra Kumar Dey बनाम State of Orissa के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि गवाह को hostile तभी कहा जा सकता है जब उसने अपने पहले दिए गए महत्वपूर्ण बयान से पलटी खाई हो, वह झूठ बोल रहा हो, या उसके बयान में शत्रुता का भाव साफ झलके। “छोटे-मोटे विरोधाभास या भूल को hostile मानना गलत है। अदालत को फैसला लेने से पहले पूरे हालात को परखना चाहिए, न कि इसे सामान्य प्रक्रिया बना देना चाहिए।

IN THE SUPREME COURT OF INDIA
CRIMINAL APPELLATE JURISDICTION
CRIMINAL APPEAL NO.4502 OF 2025
(@ SPECIAL LEAVE PETITION (CRIMINAL) NO.14625 OF 2024)
Shivkumar @ Baleshwar Yadav …Appellant(s) VERSUS The State of Chhattisgarh …Respondent(s)

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