Wrong Jokes: सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगों और दुर्लभ जेनेटिक बीमारियों से पीड़ित लोगों की गरिमा की रक्षा के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत बताई है।
सजा के प्रावधान पर हुई बात
शीर्ष कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह ऐसा कानून बनाए, जिसमें दिव्यांगों का मजाक उड़ाना या अपमानजनक टिप्पणी करना अपराध माना जाए, वैसे ही जैसे एससी-एसटी एक्ट में जातिसूचक टिप्पणियों को अपराध माना गया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि अगर किसी को नीचा दिखाने पर सजा हो सकती है, तो दिव्यांगों के मामले में भी ऐसा ही होना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट की बात का समर्थन करते हुए कहा कि किसी की गरिमा के साथ मजाक नहीं किया जा सकता।
ऑनलाइन कंटेंट पर नियंत्रण के लिए स्वतंत्र संस्था की जरूरत
शीर्ष कोर्ट ने कहा, सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आपत्तिजनक, अश्लील या अवैध कंटेंट को रोकने के लिए एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और स्वायत्त संस्था की जरूरत है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने जानकारी दी कि इस दिशा में गाइडलाइन तैयार की जा रही हैं। कोर्ट ने कहा, इन गाइडलाइंस को सार्वजनिक चर्चा के लिए जारी किया जाए और मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
यह है मामला
एसएमए क्योर फाउंडेशन स्पाइनल मस्कुलर एट्रॉफी (एसएमए) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित लोगों के लिए काम करती है। इस बीमारी में लोगों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। याचिका में बताया गया कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समय रैना, विपुन गोयल, बलराज परविंदर सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर ने दिव्यांगों का मजाक उड़ाया। कोर्ट ने इन कॉमेडियनों को भविष्य में सतर्क रहने की हिदायत दी और निर्देश दिया कि वे हर महीने दो शो करें, जिनमें दिव्यांगों की सफलता की कहानियां बताई जाए।
दिव्यांगों को मंच पर बुलाकर फंड जुटाएं
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि ये इन्फ्लुएंसर अपने प्लेटफॉर्म पर दिव्यांगों को बुलाकर उनके लिए फंड जुटाने का काम करें, ताकि एसएमए जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को समय पर इलाज मिल सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर ये लोग ईमानदारी से काम करेंगे तो दिव्यांग भी उनके मंच पर आने को तैयार होंगे।
अश्लील कंटेंट विवाद से जुड़ा है मामला
अश्लील कंटेंट विवाद के दौरान इसी साल फरवरी में समय रैना ने अपने शो इंडियाज गॉट लैटेंट के कुछ एपिसोड में दिव्यांग लोगों का मजाक उड़ाया था। खासकर पर उनका जो दृष्टिहीन, स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (एसएमए) जैसी दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे थे। इस मामले पर भी सुप्रीम कोर्ट में अश्लील कंटेंट विवाद के साथ सुनवाई हो रही थी।
फाउंडेशन ने 2.5 लाख रुपए की पेशकश ठुकराई
फाउंडेशन की ओर से वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह ने बताया कि एसएमए से पीड़ित कई बच्चों ने जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। उनके माता-पिता इलाज के लिए क्राउडफंडिंग से पैसे जुटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि समय रैना ने 2.5 लाख रुपए देने की पेशकश की थी, लेकिन संस्था ने इसे ठुकरा दिया क्योंकि यह सम्मान का सवाल है।

