Saturday, September 19, 2026
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Internet Based Content: ऑनलाइन अश्लील कंटेंट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की दो टूक…आधार से हो उम्र का सत्यापन

Internet Based Content: सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन अश्लील कंटेंट को लेकर केंद्र सरकार को कई अहम सुझाव दिए हैं।

मोबाइल पर भी आ सकती है अश्लील कंटेंट

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि अश्लीलता सिर्फ किताबों या पेंटिंग में नहीं होती, यह मोबाइल पर भी आ सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति फोन ऑन करता है और उसे जबरन ऐसा कंटेंट दिखाया जाता है, जिसे वह नहीं देखना चाहता, तो क्या किया जाए? शीर्ष कोर्ट ने कहा कि ऐसी सामग्री देखने से पहले यूजर की उम्र आधार कार्ड के जरिए सत्यापित की जा सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह के कंटेंट पर चेतावनी देना जरूरी है, ताकि आम दर्शकों को पहले से जानकारी मिल सके कि यह उनके लिए उपयुक्त है या नहीं।

यह रही सीजेआई की चेतावनी

सीजेआई ने कहा कि सिर्फ चेतावनी देना काफी नहीं है। जब तक व्यक्ति तय करता है कि उसे कंटेंट देखना है या नहीं, तब तक शो शुरू हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि कंटेंट शुरू होने से पहले आधार कार्ड के जरिए उम्र की पुष्टि की जाए। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सुझाव है, इस पर विशेषज्ञों की टीम विचार कर सकती है। अगर इससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर पड़ता है, तो बाद में इसे बदला जा सकता है।

स्वतंत्र नियामक संस्था की जरूरत पर दिया जोर

सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें कुछ कॉमेडियन और पॉडकास्टर्स के ऑनलाइन व्यवहार को लेकर शिकायत की गई थी। कोर्ट ने दोहराया कि ऑनलाइन कंटेंट को रेगुलेट करने की जरूरत है और इसके लिए एक स्वतंत्र संस्था बनाई जानी चाहिए, जो तय करे कि क्या दिखाया जा सकता है और क्या नहीं।

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