Yamuna floodplain area: दिल्ली हाईकोर्ट ने यमुना के इको-सिस्टम को बचाने के लिए कड़ा रुख अपनाया है।
31 मार्च के बाद खादर क्षेत्र में मेट्रो कब्जा नहीं रख सकेगी
हाईकोर्ट ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) को अल्टीमेटम दे दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 मार्च 2026 के बाद मेट्रो यमुना के खादर (floodplain) क्षेत्र में अपना कब्जा जारी नहीं रख सकेगी। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की बेंच ने मेट्रो को अपने ‘बैचिंग प्लांट’ और ‘कास्टिंग यार्ड’ हटाने के लिए यह आखिरी मोहलत दी है।
‘मेट्रो की जरूरत समझते हैं, पर नियम सबके लिए एक’
- अदालत ने कहा कि दिल्ली मेट्रो शहर का एक महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट है, इसे ध्यान में रखते हुए ही यह ‘अपवाद’ स्वरूप अतिरिक्त समय दिया जा रहा है।
- रोक की तारीख: 1 अप्रैल 2026 से DMRC को इस क्षेत्र में किसी भी तरह की गतिविधि करने की इजाजत नहीं होगी।
- सफाई का आदेश: कोर्ट ने आदेश दिया कि प्लांट और मशीनरी हटाने के बाद DMRC बागवानी और वन विभाग के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करे कि जमीन को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। वहां किसी भी तरह का मलबा या मशीनरी का हिस्सा नहीं बचना चाहिए।
हैरानी है कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- सुनवाई के दौरान कोर्ट ने हैरानी जताई कि 11 दिसंबर को दिए गए पिछले निर्देशों के बावजूद अभी तक इन प्लांट्स को हटाने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।
- DMRC का तर्क: मेट्रो के वकील ने दलील दी कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू ‘ग्रेप’ (GRAP) पाबंदियों की वजह से काम में देरी हुई है, लेकिन मार्च 2026 तक सारा ढांचा हटा लिया जाएगा।
- DDA को निर्देश: जमीन को पूरी तरह साफ करने के बाद इसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को सौंपना होगा। DDA को 10 अप्रैल तक इस पर अपनी अनुपालन रिपोर्ट (Compliance Report) पेश करनी होगी।
क्यों हटाया जा रहा है यार्ड?
यमुना का डूब क्षेत्र (Floodplain) पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील होता है। वहां सीमेंट मिक्सिंग प्लांट (बैचिंग प्लांट) और कंक्रीट स्ट्रक्चर बनाने वाले यार्ड (कास्टिंग यार्ड) के संचालन से नदी की जमीन और भूजल पर बुरा असर पड़ता है।

