Thursday, October 1, 2026
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CSEAM Report: बाल यौन शोषण सामग्री की रिपोर्ट न करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आपराधिक कार्रवाई की मांग; केंद्र सरकार को नोटिस

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
मामले का नामजस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस बनाम एस. हरीश व अन्य (JRCA v. S. Harish & Ors)
माननीय पीठन्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला एवं न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन
मुख्य मुद्दासोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) की अनिवार्य रिपोर्टिंग में लापरवाही और भारतीय पुलिस को सूचना न देना।
अदालत का कदमयाचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया।
एडवोकेट ऑन रिकॉर्डअधिवक्ता सक्षम महेश्वरी

CSEAM Report: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उन सोशल मीडिया मध्यस्थों (Social Media Intermediaries) के खिलाफ सख्त आपराधिक कार्रवाई और केंद्र सरकार द्वारा एक समान ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) बनाए जाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जो प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) की अनिवार्य रिपोर्टिंग करने में विफल रहते हैं।

न्यायमूर्ति जे.बी. पारडीवाला (Justice JB Pardiwala) और न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन (Justice Vinod Chandran) की पीठ ने ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस’ (JRCA) द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश जारी किया।

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याचिका की मुख्य मांगें और कानूनी तर्क

  1. सितंबर 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन
    • याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2024 के ऐतिहासिक फैसले को लागू करने की मांग की गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि POCSO अधिनियम, 2012 और उसके तहत बने नियमों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए बाल यौन शोषण से संबंधित अपराधों की जानकारी तुरंत विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) या स्थानीय पुलिस को देना अनिवार्य (Mandatory) है।
  2. आईटी एक्ट की धारा 79 (Safe Harbour Protection) की सीमा
    • 2024 के फैसले के अनुसार, कोई भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आईटी एक्ट, 2000 की धारा 79 के तहत कानूनी छूट (Immunity) का दावा तब तक नहीं कर सकता जब तक कि वह POCSO अधिनियम के तहत उचित सावधानी (Due Diligence) और अनिवार्य दायित्वों का पालन न करे।
  3. अनुपालन न करने पर आपराधिक कार्रवाई (Criminal Action)
    • याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि जो प्लेटफॉर्म भारत में कानूनन अनिवार्य रिपोर्टिंग आवश्यकताओं का पालन करने में विफल रहते हैं, उनके खिलाफ उपयुक्त आपराधिक कार्यवाही शुरू की जानी चाहिए।
  4. एक समान SOP की मांग
    • CSEAM की पहचान (Detection), अनिवार्य रिपोर्टिंग, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण (Preservation) और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल के लिए एक सर्वव्यापी और पारदर्शी Standard Operating Procedure (SOP) अधिसूचित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका का संदर्भ (BBC की रिपोर्ट का खुलासा)

  • बीबीसी (BBC) की रिपोर्ट: याचिका बीबीसी की एक खोजी रिपोर्ट के बाद दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर CSEAM को बढ़ावा देने वाले सशुल्क विज्ञापन (Paid Ads) दिखाई दे रहे थे, जो उपयोगकर्ताओं को टेलीग्राम चैनलों पर ले जाते थे जहां पैसे लेकर यह सामग्री दी जा रही थी।
  • मेटा (Meta) का रुख और खामी: बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा ने कहा कि जब भी उसे ऐसे मामलों का पता चलता है, तो वह अमेरिका स्थित नेशनल सेंटर फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लॉइटेड चिल्ड्रन (NCMEC) को रिपोर्ट करता है।
  • भारतीय कानून का उल्लंघन: याचिका में कहा गया कि मेटा यह नहीं बता पाया कि क्या इन मामलों की रिपोर्ट POCSO एक्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत भारतीय पुलिस को दी गई या नहीं। यह मुद्दा केवल मेटा का नहीं, बल्कि भारत में काम कर रहे सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का है।

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