Sunday, October 4, 2026
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Action Against CM: क्या पदस्थ मुख्यमंत्री के खिलाफ अपराध पर CBI जांच कर सकती है?…ED ने सुप्रीम कोर्ट से निर्णय लेने का किया अनुरोध

मामला सारांश (At a Glance)

पहलूविवरण
माननीय पीठन्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा एवं न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया
याचिकाकर्ताEnforcement Directorate (ED)
मूल प्रश्नक्या राज्य पुलिस के बजाय CBI पदस्थ मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित अपराधों की स्वतंत्र जांच कर सकती है?
अगली सुनवाई2 सितंबर 2026

Action Against CM: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) से यह संवैधानिक सवाल तय करने का आग्रह किया है कि यदि कोई पदस्थ मुख्यमंत्री किसी अपराध में शामिल होता है, तो क्या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) उस मामले की निष्पक्ष जांच कर सकता है या नहीं।

न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ कोलकाता स्थित राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के कार्यालय पर छापेमारी के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा कथित बाधा डालने के मामले की सुनवाई कर रही थी।

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Action Against CM: दलीलें और अदालत की मुख्य कार्यवाही

  • संवैधानिक प्रश्न पर निर्णय की मांग
    • अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. वी. राजू ने मुख्य कानूनी सवाल उठाते हुए तर्क दिया: “मुद्दा यह है कि यदि कोई पदस्थ मुख्यमंत्री, जो राज्य का गृह मंत्री भी होता है, कोई अपराध करता है, तो क्या यह मामला CBI द्वारा जांच के लिए उपयुक्त है या नहीं?”
    • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि कोर्ट को केवल सत्ता परिवर्तन या राज्य के फैसले के आधार पर मामला बंद करने के बजाय इस व्यापक कानूनी मुद्दे का निपटारा करना चाहिए, ताकि बाद में राजनीतिक पूर्वाग्रह का कोई आरोप न लगे।
  • बचाव पक्ष का तर्क
    • ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने प्रस्तुत किया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य सरकार स्वयं जांच या मंजूरी के संबंध में निर्णय ले सकती है।
  • सर्वोच्च अदालत का रुख
    • सुनवाई के दौरान पीठ ने संकेत दिया कि यदि याचिका पोषणीय (Maintainable) पाई जाती है, तो मामले को CBI को सौंपा जा सकता है। शीर्ष अदालत पूर्व में यह टिप्पणी कर चुकी है कि यदि कोई मुख्यमंत्री चल रही जांच में हस्तक्षेप करता है, तो इससे “लोकतंत्र खतरे में पड़ता है”।

Action Against CM: मामले की पृष्ठभूमि

  1. I-PAC छापेमारी घटना (जनवरी 2026): ED ने आरोप लगाया था कि जब उसकी टीम कोलकाता में I-PAC के कार्यालय और उसके निदेशक के परिसर में छापेमारी कर रही थी, तब तत्कालीन मुख्यमंत्री ने पुलिस बल के साथ व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप कर साक्ष्य जब्ती और जांच कार्यवाही में बाधा डाली थी।
  2. CBI जांच की मांग: ED ने राज्य पुलिस बल और शीर्ष अधिकारियों पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए इस मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी (CBI) को स्थानांतरित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था।

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