Tuesday, October 6, 2026
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Child Education: बच्चों को छुट्टियों की क्लास भेजने के बजाय शिष्टाचार और तमीज सिखाएं; लड़कियों और महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए

मुख्य बिंदु (Key Indicators)

  • समर वैकेशन क्लासों पर सवाल: कोर्ट ने टिप्पणी की कि गर्मियों की छुट्टियों के पहले दिन से आखिरी दिन तक बच्चों को क्लास में व्यस्त रखने से उन्हें छुट्टियों का आनंद लेने का मौका ही नहीं मिलता।
  • नैतिक शिक्षा और लैंगिक संवेदनशीलता: पीठ ने कहा कि माता-पिता को लड़कों को महिलाओं और लड़कियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने के संस्कार देने चाहिए।
  • पेरेंटिंग में होड़ (Competition): जजों ने कहा कि बच्चों को मार्शल आर्ट, म्यूजिक या आर्ट क्लास में भेजना अक्सर माता-पिता के बीच की होड़ (प्रतिस्पर्धा) बन चुका है।
  • साझा पालन-पोषण (Shared Parenting): कस्टडी विवाद के बावजूद कोर्ट ने सुझाव दिया कि बच्चे के जन्मदिन जैसे अवसरों पर दोनों माता-पिता को मिलकर खुशियां मनानी चाहिए।

Child Education: बच्चों की छुट्टियों के दौरान उन पर एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज (Extracurricular Classes) और लगातार क्लासेज का बोझ डालने की प्रवृत्ति पर सर्वोच्च न्यायालय ने सवाल उठाए हैं।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने एक बाल संरक्षण (Child Custody) मामले की सुनवाई के दौरान ये मौखिक टिप्पणियां कीं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि ग्रीष्मकालीन छुट्टियां बच्चों को सिर्फ नई क्लासेज में भेजने के बजाय उनके साथ समय बिताने, उन्हें नैतिक मूल्य (Values), शिष्टाचार (Etiquette) और लड़कों को महिलाओं व लड़कियों के प्रति सम्मानजनक आचरण सिखाने का सबसे आदर्श समय होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां

  1. ‘कब आनंद लेंगे बच्चे अपनी छुट्टियों का?’
    • न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना ने पूछा: “गर्मी की छुट्टियों के पहले दिन से लेकर आखिरी दिन तक बच्चों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। इसके तुरंत बाद स्कूल खुल जाते हैं। बच्चे आखिर अपनी छुट्टियों का आनंद कब लेंगे?”
  2. लड़कों को महिलाओं का सम्मान सिखाने की सलाह
    • पीठ ने जोर देकर कहा कि माता-पिता को बच्चों को आर्ट, म्यूजिक या ताइक्वांडो क्लास भेजने के बजाय खुद उनके साथ बैठकर बातचीत करनी चाहिए।
    • न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा: “बच्चों, खासकर लड़कों को अच्छा शिष्टाचार और तमीज सिखाएं कि उन्हें लड़कियों और महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए। माता-पिता को उन्हें अतिरिक्त कक्षाओं में भेजने के बजाय खुद यह सब सिखाना चाहिए। इसी से माता-पिता और बच्चों के बीच मजबूत बंधन विकसित होगा।”
  3. अभिभावकों के बीच ‘प्रतिस्पर्धा’ (Parents’ Competition)
    • कोर्ट ने कहा कि बच्चों को दर्जनों क्लासेज में भेजना माता-पिता के बीच की आपसी होड़ बन चुका है।
    • पीठ ने कहा: “हम उन्हें इन कक्षाओं में भेजते रहते हैं और यह माता-पिता के बीच प्रतिस्पर्धा बन गई है—’मैं अपनी बेटी को इस क्लास में भेज रहा हूं, मैं अपने बेटे को उस क्लास में।’ फिर 11वीं और 12वीं में CLAT, NEET जैसी कोचिंग शुरू हो जाती है। दिन-रात पढ़ाई। उनके पास नहाने का भी समय नहीं होता। हम अपने बच्चों को ऐसा बना रहे हैं।”
  4. कस्टडी विवाद के बावजूद संयुक्त उत्सव
    • बच्चे के जन्मदिन का जिक्र करते हुए पीठ ने सुझाव दिया कि भले ही माता-पिता के बीच कस्टडी को लेकर कानूनी विवाद चल रहा हो, लेकिन बच्चे के जन्मदिन पर दोनों को साथ आकर केक काटना चाहिए। इससे बच्चे को सबसे ज्यादा खुशी मिलेगी।

याचिका का संदर्भ

यह टिप्पणी एक बच्चे की कस्टडी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान आई, जब मां के वकील ने दलील दी कि छुट्टियां बच्चों के सर्वांगीण विकास (Overall Development) के लिए एक्स्ट्रा क्लासेज में बिताई जा रही हैं। अदालत ने दोनों पक्षों (माता-पिता) के दावों को सुनते हुए अंततः उन्हें साझा पालन-पोषण (Shared Parenting) का सौहार्दपूर्ण मार्ग तलाशने का निर्देश दिया।

यहां पढ़ें: Child Maintenance: मां की ₹1.5 लाख प्रति माह की कमाई बच्चों के रखरखाव के लिए पिता की जिम्मेदारी कम करने का आधार नहीं; सुप्रीम कोर्ट

मामले के मुख्य तथ्य और कानूनी विश्लेषण

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने बच्चे की कस्टडी से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की। सुनवाई के दौरान मां की ओर से पेश वकील ने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे एक्स्ट्रा-करिकुलर क्लासों में व्यस्त रहते हैं, जो उनके विकास के लिए अच्छे हैं।

संस्कार और पारिवारिक जुड़ाव पर जोर इस तर्क पर न्यायमूर्ति नागरत्ना ने कहा: उन्हें अच्छे संस्कार और शिष्टाचार दें। विशेष रूप से लड़कों को सिखाएं कि लड़कियों और महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार किया जाना चाहिए। माता-पिता को एक्स्ट्रा क्लास भेजने के बजाय खुद यह सिखाना चाहिए। इसी से माता-पिता और बच्चों के बीच का संबंध मजबूत होगा।

अत्यधिक कक्षाओं से मानसिक दबाव अदालत ने कहा कि बचपन से ही आर्ट, म्यूजिक, ताइक्वांडो जैसी अनगिनत क्लासों में भेजने और फिर 11वीं-12वीं में CLAT जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की दिन-रात की कोचिंग में झोंकने से बच्चों का स्वाभाविक बचपन छीन जाता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों के साथ बैठकर सीधे बातचीत करें।

कस्टडी विवाद पर निर्देश मामले में मां के वकील ने घरेलू हिंसा का हवाला दिया, जबकि पिता के पक्ष ने कहा कि उन्हें साल में केवल एक बार बच्चों से मिलने का मौका मिलता है। इस पर कोर्ट ने दोनों पक्षों को आपसी कड़वाहट भूलकर बच्चे के बेहतर भविष्य के लिए ‘शेयर्ड पेरेंटिंग’ (साझा पालन-पोषण) का रास्ता तलाशने का निर्देश दिया।

केस अवलोकन टेबल (Case Snapshot)

पहलूविवरण
अदालत / पीठभारत का सर्वोच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना एवं न्यायमूर्ति आर. महादेवन)
मुख्य विषयछुट्टियों में बच्चों पर एक्स्ट्रा क्लासेज के बोझ के बजाय नैतिक मूल्यों की शिक्षा और ‘Shared Parenting’
अदालत का संदेशलड़कों को महिलाओं/लड़कियों का सम्मान करना सिखाना माता-पिता का प्राथमिक दायित्व है।

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