Tuesday, October 6, 2026
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3-Language Policy: अंग्रेजी को गैर-देशी भाषा कैसे माना जा सकता है?’ CBSE की 3-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी को ध्यान से पढ़िए

मुख्य बिंदु (Key Indicators)

  • अंग्रेजी की स्थिति पर संवैधानिक सवाल: पीठ ने कहा कि अंग्रेजी भारत के कई राज्यों की आधिकारिक भाषा है और इसका एक ऐतिहासिक आधार है, ऐसे में इसे “गैर-देशी” या “विदेशी” मानना संवैधानिक और व्यावहारिक दृष्टि से गलत है।
  • कक्षा 6 के छात्रों को राहत का सुझाव: कोर्ट ने सीबीएसई से कहा कि इस शैक्षणिक वर्ष (2026-27) के कक्षा 6 के उन छात्रों को राहत दी जाए जो पहले से ही किसी भाषा को चुन चुके हैं, ताकि उन पर अचानक नई भाषा न थोपी जाए।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की कमी पर सवाल: सुप्रीम कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) से पूछा कि 23 भारतीय भाषाओं को पढ़ाने के लिए कितने स्कूलों में प्रशिक्षित शिक्षक और पाठ्यपुस्तकें वास्तव में उपलब्ध हैं।
  • नीति पर रोक नहीं, लेकिन सुधार की जरूरत: सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि नई भाषाएं सीखना अच्छी बात है, लेकिन इसे लागू करने से जुड़ी शुरुआती व्यावहारिक समस्याओं (Teething Issues) को दूर करना जरूरी है।

3-Language Policy: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई 3-भाषा नीति (3-Language Policy) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, NCERT और CBSE को इस नीति पर पुनर्विचार (Revisit) करने का आग्रह किया है।

अदालत ने अंग्रेजी को “गैर-देशी/गैर-स्वदेशी भाषा” (Non-indigenous Language) के रूप में वर्गीकृत करने पर गंभीर संवैधानिक आपत्ति जताई और कहा कि इस शैक्षणिक सत्र के कक्षा 6 के छात्रों को तत्काल राहत (Reprieve/Relaxation) दी जानी चाहिए।

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सुनवाई की मुख्य बातें एवं सुप्रीम कोर्ट के प्रश्न

  1. अंग्रेजी को गैर-देशी मानने पर आपत्ति
    • न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि “Native” (देशी) शब्द में औपनिवेशिक मानसिकता झलकती है, इसके बजाय “Indigenous” शब्द होना चाहिए।
    • कोर्ट ने कहा: “भारत में अंग्रेजी की ऐतिहासिक जड़ों और कई राज्यों की आधिकारिक भाषा (Official Language) होने के नाते, हमें इसका संवैधानिक विश्लेषण करना होगा कि अंग्रेजी को स्वदेशी माना जाए या गैर-स्वदेशी।”
  2. कक्षा 6 के छात्रों को राहत का प्रस्ताव
    • पीठ ने सुझाव दिया कि जो छात्र पहले से ही किसी विशिष्ट भाषा को पढ़ रहे हैं, उन पर अचानक नई भाषा नहीं थोपी जानी चाहिए।
    • CJI सूर्यकांत और न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि इस नीति को कक्षा 6 के वर्तमान बैच को राहत देते हुए अगले शैक्षणिक सत्र से नए बैच के लिए चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना चाहिए ताकि छात्रों और अभिभावकों को सूचित निर्णय लेने का अवसर मिले।
  3. शिक्षकों और पुस्तकों की उपलब्धता पर सवाल
    • पीठ ने CBSE से सवाल किया कि 23 मान्यता प्राप्त स्वदेशी भाषाओं को पढ़ाने के लिए कितने स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और अध्ययन सामग्री मौजूद है?
    • एएसजी ऐश्वर्या भाटी से इस बात का पूरा रोडमैप (Roadmap) मांगा गया कि इन क्षेत्रीय भाषाओं को पढ़ाने के लिए आधारभूत ढांचा (Infrastructure) कैसे तैयार किया जाएगा।

वकीलों की प्रमुख दलीलें

  • याचिकाकर्ताओं का पक्ष (वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल संकरनारायणन व आनंद ग्रोवर)
    • CBSE के सर्कुलर (Acad-33/2026) के तहत कक्षा 9 से छात्रों को दो भारतीय भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जिससे उन्हें पिछले 5 वर्षों से पढ़ी जा रही भाषा को छोड़ना पड़ रहा है।
    • दक्षिण भारत के छात्र पर अचानक पंजाबी या उत्तर भारत के छात्र पर तमिल थोपना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि पाठ्यपुस्तकों में बेसिक वर्णमाला सिखाए बिना ही एडवांस वाक्य रचना दी गई है।
  • केंद्र सरकार का पक्ष (ASG ऐश्वर्या भाटी)
    • केंद्र ने दलील दी कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देना आवश्यक है और इसके लिए आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां की गई हैं।

मामले के मुख्य तथ्य और कानूनी विश्लेषण

यह याचिकाएं सीबीएसई के उस सर्कुलर के खिलाफ दायर की गई हैं, जिसके तहत सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जिनमें से कम से कम दो भारतीय (Native) भाषाएं होनी चाहिए। इस नीति के तहत अंग्रेजी को गैर-भारतीय श्रेणी में रखा गया है, जिसका विरोध याचिकाकर्ताओं ने किया।

अंग्रेजी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने अंग्रेजी को “Non-Native” कहे जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा: पहली बात तो मुझे ‘Native’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति है क्योंकि यह औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है, इसकी जगह ‘Indigenous’ होना चाहिए। दूसरी बात, भारत में अंग्रेजी के ऐतिहासिक प्रभाव और राज्यों की आधिकारिक भाषा होने के नाते यह विश्लेषण करना जरूरी है कि क्या इसे गैर-भारतीय माना जा सकता है।

कार्यान्वयन में व्यावहारिक समस्याएं याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं (गोपाल शंकरनारायणन और आनंद ग्रोवर) ने तर्क दिया कि दक्षिण भारत के छात्रों पर अचानक पंजाबी या उत्तर भारत के छात्रों पर तमिल थोप दी गई है, जबकि उनके पास न तो बुनियादी एबीसी/वर्णमाला सिखाने वाली किताबें हैं और न ही शिक्षक।

सीजेआई और पीठ का निर्देश सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भाषा सीखना कभी बेकार नहीं जाता, लेकिन नीति को इस तरह लागू नहीं किया जा सकता कि छात्रों का पढ़ाई से ध्यान भटक जाए। पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को निर्देश दिया कि वे शिक्षा नीति निर्माताओं के साथ बैठक करें और शिक्षकों व अध्ययन सामग्री की उपलब्धता का एक विस्तृत रोडमैप कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें।

केस अवलोकन टेबल (Case Snapshot)

पहलूविवरण
अदालतभारत का सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India)
पीठCJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी. मोहना
विवाद का केंद्रCBSE का सर्कुलर (Acad-33/2026) – 3-भाषा नीति का कार्यान्वयन
मुख्य बिंदुअंग्रेजी की भाषाई स्थिति पर पुनर्विचार, शिक्षकों/पुस्तकों की कमी, और कक्षा 6 के छात्रों को अंतरिम राहत
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