Friday, October 9, 2026
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Real Estate Fraud: रियल एस्टेट बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई करने में हिचकिचा रही है रोहतक पुलिस, अन्य घोटालों में लिप्त आरोपियों को भी निचली अदालत से मिल रही थी राहत

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ और मुख्य बिंदु

  1. जजों को सुनवाई से रोकने का असाधारण आदेश:अदालत ने रोहतक की निचली अदालतों के आचरण और जमानत देने के तरीकों पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट आदेश दिया:“सत्र मंडल, रोहतक में तैनात न्यायिक अधिकारियों को वर्तमान मामले में किसी भी जमानत याचिका पर सुनवाई करने से रोका जाता है।”नोट: जज ने यह भी कहा कि कुछ अन्य तथ्य भी उनके संज्ञान में लाए गए हैं, लेकिन न्यायिक आदेश में उन्हें उजागर करना उचित नहीं होगा।
  2. रोहतक पुलिस की भूमिका पर सवाल:अदालत ने पाया कि स्थानीय पुलिस आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही थी और FIR दर्ज होने के चार महीने बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई:“यह स्पष्ट है कि रोहतक में तैनात पुलिस अधिकारी रियल एस्टेट प्रमोटरों/डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई करने में संकोच कर रहे हैं।”
  3. बिल्डरों की संगठित धोखाधड़ी का पैटर्न:हाईकोर्ट ने रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों के साथ हो रही धोखाधड़ी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा:“डेवलपर्स का आचरण धोखाधड़ी भरे लेन-देन के एक बार-बार दोहराए जाने वाले पैटर्न को दर्शाता है। ऐसे व्यवस्थित घोटालों को केवल अनुबंध के विवाद के रूप में पेश किया जाता है, लेकिन जब अदालतें जांच करती हैं, तो यह निर्दोष खरीदारों की जीवन भर की कमाई को ठगने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा पाई जाती हैं।”

चंडीगढ़/रोहतक: रियल एस्टेट प्रमोटरों द्वारा आम जनता और होमबायर्स से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने, पुलिस अधिकारियों द्वारा रसूखदार बिल्डरों को संरक्षण देने, और सत्र न्यायालयों (Sessions Courts) द्वारा अन्य घोटालों में संलिप्त मुख्य आरोपियों को यांत्रिक रूप से जमानत देने की गंभीर परिस्थितियों पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने असाधारण व अभूतपूर्व रुख अपनाया है।

‘गुप्ता प्रॉपर्टी डेवलपर्स लिमिटेड’ के निदेशक सुभाष गुप्ता द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका

न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत की एकल पीठ ने ‘गुप्ता प्रॉपर्टी डेवलपर्स लिमिटेड’ के निदेशक सुभाष गुप्ता द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए 30 सितंबर को यह सख्त आदेश पारित किया। यह मामला रोहतक के सेक्टर-27A स्थित आवासीय प्रोजेक्ट ‘DHL न्यू टाउन’ (DHL New Town) में 30 से अधिक फ्लैट खरीदारों से लगभग ₹11.69 करोड़ की ठगी से जुड़ा है। अदालत ने पाया कि एफआईआर दर्ज होने के चार महीने बाद भी रोहतक पुलिस प्रमोटरों के खिलाफ कार्रवाई करने में झिझक रही थी और जांच अधिकारी आरोपियों की मदद करने में लगे थे। न्यायिक शुचिता और निष्पक्षता की रक्षा के लिए उच्च न्यायालय ने रोहतक सत्र प्रभाग के सभी न्यायिक अधिकारियों (Judicial Officers) को इस मामले में किसी भी आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।

उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां

1. ‘रोहतक के न्यायिक अधिकारी इस मामले में जमानत अर्जियों पर सुनवाई से प्रतिबंधित’ न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत ने निचली अदालत द्वारा पूर्व में अन्य घोटालों में नामजद आरोपियों को दी गई जमानतों और रिकॉर्ड पर लाई गई संवेदनशील जानकारियों का संज्ञान लेते हुए आदेश दिया: “सत्र प्रभाग, रोहतक (Sessions Division, Rohtak) में तैनात सभी न्यायिक अधिकारियों को वर्तमान मामले में किसी भी जमानत आवेदन पर विचार करने या सुनवाई करने से रोका (Restrained) जाता है।”

अदालत ने यह भी जोड़ा कि मामले से जुड़े कुछ अन्य तथ्य भी न्यायालय के संज्ञान में लाए गए हैं, परंतु उन्हें न्यायिक आदेश में सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा।

2. पुलिस और जांच अधिकारी की भूमिका पर गंभीर फटकार:

  • अदालत ने रोहतक पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा:“यह स्पष्ट रूप से प्रतीत होता है कि रोहतक में तैनात पुलिस अधिकारी रियल एस्टेट प्रमोटरों/डेवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई करने में हिचकिचा रहे हैं। एफआईआर दर्ज होने के चार महीने बीत जाने के बाद भी उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। जांच अधिकारी आरोपियों की मदद करने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है।”
  • उच्च न्यायालय ने स्मरण कराया कि अगस्त में भी उसने मौखिक टिप्पणी की थी कि करोड़ों रुपये ठगने वाले असली दोषियों को बचाने का पूरा प्रयास स्थानीय पुलिस द्वारा किया जा रहा था।

3. बिल्डरों की कार्यप्रणाली: ‘गुलाबी सपने दिखाकर जीवनभर की कमाई हड़पना’: पीठ ने रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों के साथ होने वाली सुनियोजित धोखाधड़ी की कार्यप्रणाली (Modus Operandi) का विश्लेषण किया:

  • प्रमोटर जनता को समय पर पजेशन देने की सुनहरी और लुभावनी तस्वीर दिखाकर करोड़ों रुपये एकत्र करते हैं, जबकि वे भली-भांति जानते हैं कि किए गए वादों के अनुरूप प्रोजेक्ट पूरा करना उनके लिए संभव ही नहीं है।
  • अदालत ने टिप्पणी की:“ऐसे डेवलपर्स का आचरण धोखाधड़ी भरे लेन-देन के एक नियमित पैटर्न को दर्शाता है। ऐसे सुनियोजित घोटालों को मात्र संविदात्मक संबंधों से उपजा सामान्य विवाद (Contractual Dispute) बताकर पेश किया जाता है, परंतु जब अदालतें इनकी पड़ताल करती हैं, तो यह मासूम खरीदारों की जीवनभर की कमाई को हड़पने की एक बड़ी आपराधिक साजिश (Larger Conspiracy) का हिस्सा निकलता है।”

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मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि: सेक्टर-27A ‘DHL न्यू टाउन’ प्रोजेक्ट

  • प्रोजेक्ट और झूठे वादे:
    • ‘डीएचएल इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड’ (DHL Infratech Pvt Ltd) और ‘गुप्ता प्रॉपर्टी डेवलपर्स’ ने रोहतक के सेक्टर-27A में ‘डीएचएल न्यू टाउन’ नाम से आवासीय परियोजना शुरू की थी।
    • निवेशकों को झूठे आश्वासन दिए गए कि सभी सरकारी स्वीकृतियां प्राप्त हैं और निर्धारित समय पर पजेशन व रजिस्ट्री (Sale Deed) निष्पादित कर दी जाएगी।
  • ₹11.69 करोड़ का गबन:
    • प्रारंभिक जांच में सामने आया कि कम से कम 30 खरीदारों से लगभग ₹11.69 करोड़ की भारी रकम वसूली गई।
    • रकम वसूलने के बावजूद न तो आवासीय इकाइयों का पजेशन दिया गया और न ही कोई सेल डीड निष्पादित की गई। एकत्र की गई भारी राशि को अन्यत्र स्थानांतरित (Siphon off) कर दिया गया।
  • रोहतक कोर्ट द्वारा पूर्व में जमानतें:
    • उच्च न्यायालय ने पाया कि डीएचएल इंफ्राटेक के निदेशकों, जो अन्य वित्तीय घोटालों में भी आरोपी थे, को रोहतक की निचली अदालत द्वारा आसानी से जमानत दे दी गई थी। इसके चलते हाईकोर्ट को मामले में सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा।

उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देश

  1. रोहतक के जजों पर रोक: रोहतक की सत्र अदालत या कोई भी मजिस्ट्रेट इस मामले में किसी भी आरोपी की किसी भी प्रकार की जमानत याचिका (अग्रिम या नियमित) पर सुनवाई नहीं करेगा।
  2. वरिष्ठ IPS अधिकारी से जांच कराने की अपेक्षा:
    • उच्च न्यायालय ने हरियाणा सरकार से अपेक्षा की कि वह इस बहु-करोड़ी घोटाले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी (Senior IPS Officer) को नियुक्त करे।
  3. स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश: सरकार और जांच एजेंसी को अगली सुनवाई की तारीख पर या उससे पहले विस्तृत जांच प्रगति रिपोर्ट (Status Report) अदालत में पेश करनी होगी।
  4. अगली सुनवाई: मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।

विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

  • संविधान का अनुच्छेद 227 एवं दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 407 (मामलों का अंतरण एवं अधीक्षण):
    • उच्च न्यायालय को अपने अधीनस्थ सभी अदालतों पर अधीक्षण की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
    • यदि निष्पक्ष न्याय प्रशासन पर कोई संदेह उत्पन्न होता है या किसी विशिष्ट जिले की अदालतों से निष्पक्षता प्रभावित होने की आशंका बनती है, तो उच्च न्यायालय किसी मामले या विशेष कार्यवाहियों (जैसे जमानत) की सुनवाई को प्रतिबंधित कर सकता है या अन्यत्र स्थानांतरित कर सकता है।
  • सिविल विवाद बनाम आपराधिक षड्यंत्र (Mens Rea at Inception):
    • रियल एस्टेट मामलों में प्रमोटर अक्सर अनुबंध के उल्लंघन (Breach of Contract) का बहाना लेकर इसे केवल दीवानी मामला बताते हैं।
    • परंतु सर्वोच्च न्यायालय ने सुनील भारती मित्तल और राकेश रंजन गुप्ता मामलों में स्पष्ट किया है कि यदि शुरुआत से ही धोखाधड़ी करने और पैसा डायवर्ट करने का आपराधिक आशय रहा हो, तो यह भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और धारा 120B (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत गंभीर अपराध बनता है।

विधिक विवरण

  • केस संदर्भ: सुभाष गुप्ता बनाम हरियाणा राज्य [अग्रिम जमानत याचिका – पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय]
  • पीठ: न्यायमूर्ति एन.एस. शेखावत (एकल पीठ)
  • आदेश की तिथि: 30 सितंबर 2026
  • अगली सुनवाई: 28 अक्टूबर 2026
  • विधिक प्रतिनिधित्व:
    • याचिकाकर्ता (सुभाष गुप्ता) की ओर से: अधिवक्ता दिनेश अरोड़ा, जतिन सेहरा एवं आशीष खटकड़
    • राज्य (हरियाणा) की ओर से: वरिष्ठ उप-महाधिवक्ता (Senior DAG) राजीव सिद्धू
    • शिकायतकर्ताओं (होमबायर्स) की ओर से: अधिवक्ता आर.एस. ढुल
  • प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
    • भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) की धाराएं 420 (धोखाधड़ी), 406 (आपराधिक अमानत में खयानत), 120B (आपराधिक षड्यंत्र)
    • दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) की धारा 438 (अग्रिम जमानत) एवं धारा 407 (उच्च न्यायालय की स्थानांतरण शक्तियां)
    • भारत का संविधान – अनुच्छेद 227 (उच्च न्यायालय का अधीक्षण क्षेत्राधिकार)
  • अंतिम परिणाम: रोहतक के सभी न्यायिक अधिकारी मामले में जमानत अर्जियां सुनने से निषिद्ध; हरियाणा सरकार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी से जांच कराने और 28 अक्टूबर 2026 तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का निर्देश।

Real Estate Fraud:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालतपंजाब एंड हरियाणा उच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति एन. एस. शेखावत)
याचिकाकर्तासुभाष गुप्ता (गुप्ता प्रॉपर्टी डेवलपर्स के निदेशक – अग्रिम जमानत याचिका)
प्रोजेक्ट का नाम‘DHL New Town’ (सेक्टर-27A, रोहतक)
मुख्य आरोपधोखाधड़ी से 30 खरीदारों से लगभग ₹11.69 करोड़ हड़पना
हाईकोर्ट का बड़ा आदेशरोहतक के जज इस केस में जमानत पर सुनवाई नहीं करेंगे; हरियाणा सरकार निष्पक्ष जांच के लिए सीनियर IPS अधिकारी नियुक्त करे।
अगली सुनवाई28 अक्टूबर (2026)
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