Friday, October 9, 2026
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Appearing Without Uniform: वर्चुअल सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता जहांगीर गनई; अदालत पर अपमानजनक टिप्पणी, आचरण पर कोई पछतावा भी नहीं

सुनवाई के दौरान घटी घटना और ट्रिब्यूनल का रुख

  1. बिना वीडियो और यूनिफॉर्म के उपस्थिति:आदेश के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता गनाई शुरुआत में केवल ऑडियो मोड में पेश हुए और बिना वीडियो ऑन किए अपनी दलीलें देने लगे। जब ट्रिब्यूनल ने बार-बार अनुरोध करके उनका वीडियो चालू करवाया, तो पाया गया कि वे निर्धारित यूनिफॉर्म (वकीलों की ड्रेस) में नहीं थे।
  2. अदालत पर टिप्पणी और बिना पछतावे का रवैया:आदेश में ट्रिब्यूनल ने दर्ज किया:“मामले पर चर्चा के दौरान उन्होंने अदालत के प्रति अपमानजनक टिप्पणियाँ कीं… वे बिना यूनिफॉर्म के उपस्थित होने को लेकर बिल्कुल भी क्षमाप्रार्थी (Unapologetic) प्रतीत नहीं होते हैं।”

वर्चुअल अदालतों में ड्रेस कोड का महत्व

कोविड-19 महामारी के बाद से भारत में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालयों और ट्रिब्यूनलों ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान भी वकीलों के लिए औपचारिक यूनिफॉर्म (या कम से कम सोबर/औपचारिक पोशाक) में उपस्थित होने के कड़े नियम लागू किए हैं। पूर्व में भी सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाईकोर्ट्स ने टी-शर्ट, बिस्तर पर लेटे हुए या गाड़ी चलाते समय वर्चुअल कोर्ट अटेंड करने वाले वकीलों पर कड़ा रुख अपनाया है।

जम्मू: आभासी अदालती कार्यवाहियों (Virtual Court Proceedings) के दौरान निर्धारित अधिवक्ता वेशभूषा (Advocate Uniform / Dress Code) की अनिवार्यता, अदालत की मर्यादा व गरिमा बनाए रखने के दायित्व, तथा न्यायाधिकरण के प्रति अनुचित व अपमानजनक टिप्पणियों पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की जम्मू बेंच ने कड़ा रुख अपनाया है। कैट ने वर्चुअल सुनवाई के दौरान बिना निर्धारित यूनिफॉर्म के पेश होने और अदालत पर अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता जहांगीर गनई (Senior Advocate Jahangir Ganai) पर ₹10,000 का जुर्माना (Cost) लगाया है।

कैट की दो-सदस्यीय पीठ, जिसमें न्यायिक सदस्य दिवाकर सिंह और प्रशासनिक सदस्य राम मोहन जौहरी शामिल थे, ने 7 अक्टूबर 2026 को पारित अपने आदेश में वरिष्ठ अधिवक्ता को यह राशि एक सप्ताह के भीतर जमा करने का सख्त निर्देश दिया। पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि अधिवक्ता के हाव-भाव में बिना गणवेश उपस्थित होने को लेकर कोई खेद या पश्चाताप (Unapologetic) नहीं दिखाई दिया।

न्यायाधिकरण का आदेश एवं घटनाक्रम का ब्योरा

1. केवल ऑडियो मोड में उपस्थिति और वीडियो ऑन करने पर बिना यूनिफॉर्म दिखना

न्यायाधिकरण के आदेश के अनुसार:

  • एक सेवा मामले (Service Matter) में प्रतिवादी का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जहांगीर गनई प्रारंभ में केवल ऑडियो मोड (Audio Mode) के माध्यम से पेश हुए और अपनी दलीलें रखनी शुरू कर दीं।
  • अधिकरण द्वारा बार-बार अनुरोध किए जाने के बाद जब उन्होंने अपना वीडियो ऑन किया, तो पाया गया कि वे निर्धारित अधिवक्ता यूनिफॉर्म (गाउन, बैंड और कोट) में नहीं थे।

2. ‘अदालत पर अपमानजनक टिप्पणियां कीं और कोई पश्चाताप नहीं दिखाया’

पीठ ने आदेश में दर्ज किया:“वे बिना यूनिफॉर्म के अपनी उपस्थिति को लेकर पूरी तरह से बेपरवाह और पश्चाताप-रहित (Unapologetic) प्रतीत हुए। जब मामले पर चर्चा चल रही थी, उसी दौरान उन्होंने अदालत के संबंध में अपमानजनक टिप्पणियां (Derogatory Remarks upon the Court) कीं।”

अधिकरण ने इस आचरण को संस्थागत गरिमा के प्रतिकूल मानते हुए वरिष्ठ वकील पर ₹10,000 का हर्जाना अधिरोपित किया।

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मामले में विधिक प्रतिनिधित्व

  • आवेदक की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता अभिनव शर्मा, साथ में अधिवक्ता विशाल शर्मा
  • राज्य की ओर से: अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) राजेश थप्पा
  • प्रतिवादियों की ओर से:
    • वरिष्ठ अधिवक्ता जहांगीर गनई
    • वरिष्ठ अधिवक्ता पवन कुंडल, साथ में अधिवक्ता जगदीप कौर

विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?

  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियम (BCI Rules – Chapter IV, Form of Dresses):
    • अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत बनाए गए बीसीआई नियमों के अध्याय IV के अंतर्गत प्रत्येक अधिवक्ता के लिए अदालत, अधिकरण या अर्द्ध-न्यायिक मंच के समक्ष उपस्थित होते समय निर्धारित पोशाक (काला कोट, सफेद शर्ट और बैंड/गाउन) पहनना अनिवार्य है।
    • सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि वर्चुअल या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई भी एक खुली अदालत की औपचारिक कार्यवाही है; अतः उसमें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के सभी शिष्टाचार और ड्रेस कोड समान रूप से लागू होते हैं।
  • प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 (Administrative Tribunals Act, 1985):
    • अधिकरण की धारा 22 के तहत न्यायाधिकरण को अपनी कार्यवाहियों को विनियमित करने और अनुशासनात्मक उल्लंघन पर लागत (Cost) अधिरोपित करने की शक्तियां प्राप्त हैं।
    • अदालत के समक्ष अपमानजनक व्यवहार अधिकरण की अवमानना (Contempt of Tribunal under Section 17) का भी आधार बन सकता है।

विधिक विवरण

  • न्यायिक मंच: केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जम्मू बेंच
  • पीठ: दिवाकर सिंह (न्यायिक सदस्य) एवं राम मोहन जौहरी (प्रशासनिक सदस्य)
  • आदेश की तिथि: 7 अक्टूबर 2026
  • संबद्ध पक्षकार: सेवा मामले में प्रतिवादी बनाम आवेदक
  • प्रभावित वरिष्ठ अधिवक्ता: वरिष्ठ अधिवक्ता जहांगीर गनई (पूर्व एडवोकेट जनरल, जम्मू-कश्मीर)
  • अधिरोपित जुर्माना: ₹10,000 (एक सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश)
  • प्रासंगिक कानून एवं नियम:
    • प्रशासनिक अधिकरण अधिनियम, 1985 की धारा 17 एवं 22
    • अधिवक्ता अधिनियम, 1961 एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियम (ड्रेस कोड नियम)
  • अंतिम परिणाम: वर्चुअल सुनवाई में बिना ड्रेस कोड पेश होने और अपमानजनक टिप्पणी करने पर ₹10,000 का हर्जाना अधिरोपित; एक सप्ताह के भीतर भुगतान का आदेश।

Appearing Without Uniform:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)

विवरणजानकारी
संबंधित अदालत/ट्रिब्यूनलकेन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT), जम्मू बेंच
संबंधित व्यक्तिवरिष्ठ अधिवक्ता जहाँगीर गनाई (प्रतिवादी के वकील)
मुख्य मुद्दाबिना यूनिफॉर्म के वर्चुअल कोर्ट में पेश होना और अमर्यादित टिप्पणी करना
ट्रिब्यूनल का आदेश₹10,000 का जुर्माना, जिसे 1 सप्ताह के भीतर जमा करना अनिवार्य है
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