हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और कानूनी सिद्धांत
- BNS की धारा 69 की व्याख्या:न्यायमूर्ति शेट्टी ने कहा:“पीड़िता से शादी का कथित वादा आरोपी द्वारा यौन संबंध बनाने की घटना के बाद किया गया था। BNS, 2023 की धारा 69 के तहत अपराध आकर्षित होने के लिए, किसी व्यक्ति को महिला के साथ शादी का ऐसा वादा करके (बिना उसे पूरा करने की मंशा के) या छल-कपट के साधनों से यौन संबंध बनाना चाहिए, जो दुष्कर्म (Rape) का अपराध न बनता हो।”
- घटनाक्रम और सहमति:
- शिकायतकर्ता और आरोपी एक ही कार्यस्थल पर मिले थे और महिला को पता था कि आरोपी पहले से ही किसी अन्य महिला के साथ संबंध में है।
- 6 जनवरी 2026 को आरोपी ने यौन संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा, जिसके लिए शिकायतकर्ता ने शुरुआत में मना करने का दावा किया।
- शारीरिक संबंध बनने के बाद, आरोपी ने महिला से शादी करने का वादा किया और संबंध जारी रखा। बाद में माता-पिता की असहमति के कारण जब उसने शादी से इनकार कर दिया और बातचीत बंद कर दी, तो महिला ने पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई।
- जमानत की शर्तें:निचली अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उच्च न्यायालय ने उसे ₹1,00,000 के निजी बांड और दो जमानतियों पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही, निचली अदालत की पूर्व अनुमति के बिना उसके क्षेत्राधिकार से बाहर न जाने का निर्देश दिया।
बेंगलुरु: भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 69—जो शादी का झूठा वादा कर या कपटपूर्ण साधनों (Deceitful Means) से यौन संबंध बनाने को दंडनीय अपराध घोषित करती है—के अनिवार्य वैधानिक तत्वों, सहमति से बने संबंधों के कालक्रम (Sequence of Events), तथा शारीरिक संबंध स्थापित होने के पश्चात किए गए शादी के वादे के विधिक प्रभाव पर कर्नाटक हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण व्याख्या प्रस्तुत की है।
न्यायमूर्ति एस. विश्वजीत शेट्टी की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता मोहम्मद अयान द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 439 / भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के तहत दायर नियमित जमानत याचिका को स्वीकार करते हुए यह कानूनी सिद्धांत प्रतिपादित किया। निचली अदालत द्वारा जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद आरोपी ने हाईकोर्ट का रुख किया था। अदालत ने स्पष्ट व्यवस्था दी है कि यदि शादी का कथित वादा यौन संबंध बनाने के बाद किया गया हो, तो वह BNS की धारा 69 के तहत अपराध का आवश्यक तत्व पूरा नहीं करता।
उच्च न्यायालय के प्रमुख विधिक निष्कर्ष एवं न्यायिक टिप्पणियां
1. BNS की धारा 69 के आवश्यक तत्वों का विश्लेषण
न्यायमूर्ति एस. विश्वजीत शेट्टी ने प्राथमिकी के तथ्यों और BNS की धारा 69 की वैधानिक भाषा की तुलना करते हुए कहा:
“पीड़िता से विवाह करने का कथित वादा आरोपी द्वारा शारीरिक संबंध बनाने के कृत्य के बाद (After the act of sexual intercourse) किया गया है। भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 69 के तहत दंडनीय अपराध को आकर्षित करने के लिए, किसी व्यक्ति द्वारा कपटपूर्ण साधनों का उपयोग करके अथवा पूरा करने के इरादे के बिना (Without intention of fulfilling) शादी का वादा करके किसी महिला के साथ यौन संबंध स्थापित किया जाना चाहिए, जो बलात्कार का अपराध न बनता हो।”
2. कार्य-कारण संबंध (Causal Link) की अनिवार्यता:
- अदालत ने रेखांकित किया कि धारा 69 का मूल उद्देश्य उन मामलों को दंडित करना है जहां शादी का झूठा वादा या कपट ही महिला की सहमति प्राप्त करने का कारण बना हो।
- यदि शारीरिक संबंध स्थापित होने के समय ऐसा कोई प्रलोभन या वादा मौजूद नहीं था और संबंध बनने के बाद विवाह का वादा किया गया, तो यह नहीं कहा जा सकता कि यौन संबंध शादी के वादे के आधार पर “कपटपूर्ण साधनों द्वारा प्राप्त” किए गए थे।
मामले की तथ्यात्मक पृष्ठभूमि
- परिचय और संबंध:
- पीड़िता की आरोपी से मुलाकात कार्यस्थल (Workplace) पर हुई थी। पीड़िता को इस बात की पूरी जानकारी थी कि आरोपी पहले से ही किसी अन्य महिला के साथ रिश्ते में है।
- 6 जनवरी 2026 की घटना:
- 6 जनवरी 2026 को याचिकाकर्ता ने पीड़िता के समक्ष शारीरिक संबंध बनाने का प्रस्ताव रखा। पीड़िता का आरोप है कि उसने प्रारंभ में इसके लिए सहमति देने से इनकार किया था।
- हालांकि, शारीरिक संबंध बनने के बाद, याचिकाकर्ता ने पीड़िता से वादा किया कि वह उससे शादी करेगा और इसके उपरांत दोनों के बीच संबंध जारी रहे।
- विवाद और प्राथमिकी:
- बाद में जब याचिकाकर्ता ने बातचीत बंद कर दी और यह कहते हुए शादी से इनकार कर दिया कि उसके माता-पिता इस विवाह के लिए तैयार नहीं हैं, तो पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
- पुलिस ने आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 69 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
जमानत की शर्तें
अदालत ने आरोपी को निम्नलिखित शर्तों पर नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया:
- आरोपी ₹1,00,000 (एक लाख रुपये) का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो स्थानीय जमानतदार प्रस्तुत करेगा।
- आरोपी विचारण न्यायालय (Trial Court) की कार्यवाहियों में नियमित रूप से उपस्थित रहेगा।
- विचारण न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना वह उसके क्षेत्राधिकार से बाहर नहीं जाएगा।
विधिक एवं विधायी विश्लेषण: BNS की धारा 69 की रूपरेखा
- IPC बनाम BNS का नया प्रावधान:
- पूर्ववर्ती भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) में शादी के झूठे वादे पर यौन संबंध बनाने के लिए कोई पृथक धारा नहीं थी; ऐसे मामलों को धारा 375 (बलात्कार) और धारा 90 (तथ्य के भ्रम में दी गई सहमति) के तहत अभियोजित किया जाता था।
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 में धारा 69 को एक विशिष्ट अपराध के रूप में शामिल किया गया: “जो कोई किसी महिला के साथ कपटपूर्ण साधनों से या पूरा करने के इरादे के बिना शादी का वादा करके यौन संबंध बनाएगा, जो बलात्कार का अपराध नहीं बनता…”
- सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित सिद्धांत (प्रमोद सूर्यभान पवार बनाम महाराष्ट्र राज्य, 2019):
- सुप्रीम कोर्ट ने स्थापित किया है कि ‘शादी के झूठे वादे’ (False Promise) और ‘वादा पूरा करने में विफलता’ (Breach of Promise) के बीच स्पष्ट अंतर होता है।
- कपट सिद्ध करने के लिए यह स्थापित होना आवश्यक है कि वादा करते समय ही आरोपी का कभी शादी करने का इरादा नहीं था और उसी वादे के सीधे प्रभाव में महिला ने संबंध बनाने की सहमति दी थी। यदि वादा संबंध बनने के बाद किया गया हो, तो सहमति वादे से दूषित नहीं मानी जा सकती।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: मोहम्मद अयान बनाम कर्नाटक राज्य [आपराधिक याचिका – कर्नाटक उच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति एस. विश्वजीत शेट्टी (एकल पीठ)
- निर्णय की तिथि: अक्टूबर 2026
- विधिक प्रतिनिधित्व:
- याचिकाकर्ता की ओर से: वरिष्ठ अधिवक्ता टॉमी सेबेस्टियन, साथ में अधिवक्ता एल्विन सेबेस्टियन
- राज्य (कर्नाटक) की ओर से: उच्च न्यायालय सरकारी प्लीडर चन्नप्पा इराप्पा
- पीड़िता/शिकायतकर्ता की ओर से: अधिवक्ता अब्दुल माजिद
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक धाराएं:
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 69 (कपटपूर्ण साधनों आदि से संभोग करना)
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 483 / CrPC धारा 439 (नियमित जमानत)
- अंतिम परिणाम: नियमित जमानत याचिका स्वीकृत; अदालत ने माना कि संभोग के बाद किया गया शादी का वादा प्रथम दृष्टया BNS धारा 69 के अपराध को आकर्षित नहीं करता।
After Sex Promise:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | कर्नाटक उच्च न्यायालय (न्यायमूर्ति एस. विश्वजीत शेट्टी) |
| याचिकाकर्ता | मोहम्मद अयान (आरोपी) |
| संबंधित कानून | भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 69 |
| मूल विवाद | सहमति से यौन संबंध बनाने के बाद शादी का वादा करना और फिर शादी से मुकरना |
| अदालत का फैसला | आरोपी को ₹1,00,000 के निजी मुचलके पर सशर्त जमानत मंजूर |

