10 अक्टूबर की पुलिस कार्रवाई का संदर्भ
यह विवाद 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली पुलिस द्वारा वकीलों और प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई से जुड़ा है। SCBA ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 10 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के पास से गुजर रहे निर्दोष वकीलों को पुलिस ने जबरन हिरासत में लिया और कई किलोमीटर दूर ले जाकर बंद कर दिया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) के हस्तक्षेप के बाद वकीलों को छोड़ा गया था। SCBA ने इस मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों पर रिपोर्ट और जवाबदेही तय करने की मांग की है।
आगे क्या होगा?
SCBA कार्यकारिणी समिति ने माना है कि बलराज मलिक के खिलाफ प्रथम दृष्टया (Prima Facie) अनुशासनात्मक मामला बनता है। यदि मलिक 7 दिनों के भीतर अपनी सफाई में संतोषजनक लिखित जवाब दाखिल करने में विफल रहते हैं, तो SCBA कार्यकारिणी उनके खिलाफ एसोसिएशन से निलंबन (Suspension) या निष्कासन (Expulsion) की एकतरफा कार्रवाई करेगी।
नई दिल्ली: बार एसोसिएशनों के निर्वाचित पदाधिकारियों की गरिमा और पेशेवर आचरण (Professional Ethics & Conduct of Advocates), सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के नियमों के नियम 35 के तहत अनुशासनात्मक शक्तियां (Disciplinary Powers for Suspension/Expulsion), तथा 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के विरोध में अधिवक्ताओं के बीच लॉन पर हुए तीखे टकराव पर देश की सर्वोच्च बार संस्था ने कड़ा रुख अपनाया है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने वरिष्ठ अधिवक्ता और एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय के साथ सार्वजनिक रूप से अभद्रता, धमकी और असंसदीय भाषा का प्रयोग करने के आरोप में अधिवक्ता बलराज सिंह मलिक को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी किया है। मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा 13 अक्टूबर 2026 को जारी इस नोटिस में मलिक से पूछा गया है कि उनके इस अशोभनीय आचरण के लिए उन्हें एसोसिएशन से निलंबित (Suspend) या निष्कासित (Expel) क्यों न कर दिया जाए।
नोटिस के प्रमुख विधिक व तथ्यात्मक बिंदु
1. सुप्रीम कोर्ट लॉन पर टकराव और वायरल वीडियो:
- नोटिस के अनुसार, 10 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा वकीलों को कथित रूप से पीटे जाने, जबरन हिरासत में लेने और किलोमीटर दूर ले जाने की घटना के विरोध में SCBA के पदाधिकारी एकत्र हुए थे।
- अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय और कार्यकारी समिति (Executive Committee) के सदस्य 13 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:15 बजे सुप्रीम कोर्ट के लॉन में साथी वकीलों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने और मीडिया को संबोधित करने पहुंचे थे।
- इस दौरान अधिवक्ता बलराज सिंह मलिक और अध्यक्ष के बीच तीखी नोकझोंक व टकराव हुआ। नोटिस में कहा गया है:“मीडिया साक्षात्कारों के दौरान अध्यक्ष महोदय को असंसदीय भाषा (Unparliamentary Language) और धमकियों (Intimidation) का सामना करना पड़ा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया और राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ है।”
2. कार्यकारिणी सदस्य को ‘दलाल’ कहने का आरोप:
- SCBA ने बलराज मलिक से जुड़े एक व्हाट्सएप संदेश का भी संज्ञान लिया है, जिसमें उन्होंने कथित रूप से कार्यकारी समिति के एक निर्वाचित सदस्य को “दलाल” (Broker) कहकर संबोधित किया था।
3. निर्वाचित पदाधिकारियों की गरिमा और नियम 35:
- नोटिस में जोर दिया गया है कि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और कार्यकारिणी के सदस्य लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से चुने जाते हैं और सभी निर्णय बहुमत से लिए जाते हैं।
- उनके प्रति इस तरह का अनुचित आचरण, धमकी और अपमानजनक भाषा SCBA नियमावली के नियम 35 (Rule 35) के तहत गंभीर कदाचार का मामला बनाता है।
- कार्यकारिणी समिति ने प्रारंभिक विचार-विमर्श में पाया कि मलिक के खिलाफ प्रथम दृष्टया (Prima Facie Case) अनुशासनात्मक मामला बनता है।
घटनाक्रम का कालक्रम एवं विवाद की पृष्ठभूमि
| तिथि / समय | घटनाक्रम एवं विवरण |
|---|---|
| 10 अक्टूबर 2026 | मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दिल्ली में राजनीतिक व छात्र विरोध प्रदर्शन। नई दिल्ली क्षेत्र में वकीलों पर पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और कई अधिवक्ताओं को हिरासत में लेने का आरोप। |
| CJI से हस्तक्षेप की मांग | भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) के समक्ष प्रतिवेदन दिए जाने के बाद पुलिस द्वारा वकीलों को छोड़ा गया। SCBA ने पुलिस कार्रवाई और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। |
| 13 अक्टूबर (दोपहर 1:15 बजे) | सुप्रीम कोर्ट लॉन पर साथी वकीलों के समर्थन में SCBA अध्यक्ष प्रदीप कुमार राय और कार्यकारिणी का जमावड़ा। मीडिया बाइट्स के दौरान अधिवक्ता बलराज सिंह मलिक का अध्यक्ष के साथ टकराव और विवाद। |
| 13 अक्टूबर (देर शाम) | SCBA मानद सचिव प्रज्ञा बघेल द्वारा बलराज सिंह मलिक को कारण बताओ नोटिस जारी। |
| जवाब की समय-सीमा | नोटिस प्राप्ति के 7 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण अनिवार्य; उत्तर न देने पर एकतरफा निलंबन/निष्कासन की चेतावनी। |
विधिक एवं संगठनात्मक विश्लेषण: बार निकायों में अनुशासन
- SCBA नियम 35 (सदस्यों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई):
- इसके तहत यदि कोई सदस्य एसोसिएशन के किसी निर्वाचित पदाधिकारी या अन्य सदस्य के प्रति दुर्व्यवहार, हिंसा, धमकी या पेशेवर गरिमा के प्रतिकूल आचरण करता है, तो कार्यकारी समिति को प्रारंभिक जांच के बाद कारण बताओ नोटिस जारी करने और दो-तिहाई बहुमत से उसकी सदस्यता निलंबित या समाप्त करने का अधिकार है।
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 और न्यायालय परिसर में मर्यादा:
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के आचरण मानकों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय का परिसर न्याय का शीर्ष मंदिर है। परिसर के भीतर मीडिया के सामने वकीलों के बीच हाथापाई या असंसदीय भाषा का प्रयोग पेशेवर कदाचार (Professional Misconduct) के दायरे में आता है, जिस पर राज्य बार काउंसिल या BCI भी संज्ञान ले सकती है।
- पुलिस कार्रवाई पर SCBA की मूल याचिका:
- आंतरिक टकराव के समानांतर, SCBA ने 10 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट के आसपास वकीलों के साथ हुई बदसलूकी और उन्हें हिरासत में लिए जाने के खिलाफ शीर्ष अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की पहचान उजागर करने की मांग वाली याचिका दाखिल कर रखी है।
संक्षिप्त सारांश विवरण
- संस्था: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA)
- नोटिस जारीकर्ता: प्रज्ञा बघेल (मानद सचिव, SCBA)
- नोटिस की तिथि: 13 अक्टूबर 2026
- नोटिस प्राप्तकर्ता: अधिवक्ता बलराज सिंह मलिक
- संबंधित पदाधिकारी: वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप कुमार राय (अध्यक्ष, SCBA)
- आरोप: अध्यक्ष के साथ असंसदीय भाषा, धमकी, मीडिया के सामने टकराव और व्हाट्सएप पर कार्यकारिणी सदस्य के लिए अपमानजनक टिप्पणी।
- विधिक आधार: SCBA नियमावली का नियम 35 (Rule 35)
- जवाब हेतु निर्धारित समय: 7 दिन
SCBA Action:मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संस्था | सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) |
| नोटिस जारीकर्ता | प्रज्ञा बघेल (मानद सचिव, SCBA) |
| नोटिस तिथि | 13 अक्टूबर 2026 |
| आरोपी अधिवक्ता | बलराज सिंह मलिक (Advocate Balraj Singh Malik) |
| पीड़ित पक्ष | प्रदीप कुमार राय (अध्यक्ष, SCBA एवं वरिष्ठ अधिवक्ता) |
| घटना का कारण | 10 अक्टूबर 2026 को वकीलों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में एकजुटता प्रदर्शन के दौरान मीडिया के सामने अभद्रता |
| जवाब देने की समय सीमा | 7 दिन (लिखित स्पष्टीकरण न देने पर एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई) |

