सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश और तकनीकी रूपरेखा
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│ CSEAM हटाने हेतु राष्ट्रीय डेटाबेस ढांचा │
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│ डिजिटल फिंगरप्रिंट │ सत्यापन एवं सुरक्षा │
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│ डेटाबेस में केवल हैश (Hash) │ │ डेटाबेस में प्रविष्टि के लिए │
│ और URL रहेंगे (मूल फोटो/ │ │ AI स्क्रीनिंग के बाद कम से │
│ वीडियो सामग्री नहीं)। │ │ कम 3 मानव विश्लेषक (Human │
│ Analysts) जांच करेंगे। │
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1. राष्ट्रीय डेटाबेस (National Database) की स्थापना:
- विखंडित व्यवस्था का अंत: कोर्ट ने माना कि वर्तमान में जब एक प्लेटफॉर्म किसी आपत्तिजनक कंटेंट को हटाता है, तो वह अन्य प्लेटफॉर्म्स से स्वतः नहीं हट पाता।
- हैश तकनीक (Hash Identifiers): डेटाबेस में केवल पुष्टि किए गए CSEAM के ‘डिजिटल फिंगरप्रिंट’ (Hash) और URL रखे जाएंगे (मूल हानिकारक फोटो/वीडियो नहीं)। इससे सभी सोशल मीडिया बिचौलिया (Intermediaries) अपने प्लेटफॉर्म पर अपलोड होने वाले कंटेंट को इस केंद्रीय रिपॉजिटरी से क्रॉस-चेक कर सकेंगे।
- त्रि-स्तरीय सत्यापन (Three Human Analysts): डेटाबेस में किसी प्रविष्टि को जोड़ने से पहले AI स्क्रीनिंग के बाद कम से कम 3 प्रशिक्षित मानव विश्लेषकों (Human Analysts) द्वारा स्वतंत्र सत्यापन अनिवार्य होगा, ताकि वैध सामग्री गलती से न हटाई जाए।
2. सोशल मीडिया बिचौलियों (Intermediaries) के लिए सख्त रिपोर्टिंग नियम:
- 2 घंटे के भीतर पुलिस को सूचना: केवल अपनी ओर से सामग्री हटा देना या विदेशी संस्थाओं को रिपोर्ट करना पर्याप्त नहीं होगा। POCSO नियम 2020 के नियम 11 के तहत विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU), स्थानीय पुलिस या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल को 2 घंटे के भीतर सूचित करना अनिवार्य होगा।
- साप्ताहिक रिपोर्ट: डेटाबेस से मिलान करके हटाए गए कंटेंट की एक समेकित रिपोर्ट (Consolidated Weekly Report) डेटाबेस का प्रबंधन करने वाली अथॉरिटी को देनी होगी।
- शिकायत अधिकारी की त्वरित प्रतिक्रिया: 24 घंटे के भीतर शिकायत की पावती (Acknowledgement) देनी होगी।
3. पेवॉल (Paywalls) पर निगरानी और वित्तीय दंड:
- जुर्माना और राजस्व जब्ती: शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि IT एक्ट और नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के टर्नओवर और उल्लंघन की गंभीरता के आधार पर भारी मौद्रिक जुर्माना (Exemplary Monetary Penalties) लगाने का प्रावधान करे।
- पेवॉल कंटेंट की जांच: सब्स्क्रिप्शन या पेवॉल (Paywalled Content) के पीछे छिपाकर फैलाए जाने वाले अवैध कंटेंट की कड़ी जांच हो और इससे कमाए गए राजस्व को जब्त (Disgorged/Forfeited) करने के नियम बनाए जाएं।
4. स्कूली पाठ्यक्रम में डिजिटल सुरक्षा शिक्षा:
- कोर्ट ने कहा कि केवल तकनीकी सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। बच्चों को ऑनलाइन खतरों को पहचानने, रिपोर्ट करने और सुरक्षित रहने में सक्षम बनाने के लिए NCERT और SCERT को बाल मनोवैज्ञानिकों व विशेषज्ञों के परामर्श से डिजिटल सुरक्षा और आयु-उपयुक्त यौन शिक्षा (Age-appropriate sex education) को मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने का निर्देश दिया गया है।
नई दिल्ली: सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) की धारा 67B एवं धारा 79 (मध्यवर्तियों की मध्यवर्ती सुरक्षा/Safe Harbour की सीमाएं), सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (IT Rules, 2021), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण (POCSO) नियम, 2020 का नियम 11 (विशेष किशोर पुलिस इकाई / स्थानीय पुलिस को अनिवार्य रिपोर्टिंग), डिजिटल फिंगरप्रिंट्स/हैश पहचानकर्ताओं (Hash Identifiers) और यूआरएल (URL) का केंद्रीय भंडार, तथा बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (CSEAM) के विरुद्ध एक बहु-स्तरीय सत्यापन तंत्र (Multi-Tier Human Verification) की स्थापना पर सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और व्यापक विनियामक आदेश पारित किया है।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने वर्ष 2024 के अपने ऐतिहासिक निर्णय (जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस बनाम एस. हरीश) के अनुपालन और क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए यह पाया कि दो वर्ष बीत जाने के बावजूद इंटरनेट पर ऐसी जघन्य सामग्री का लगातार प्रसार हो रहा है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और विनियामक प्राधिकरणों की लचर कार्यप्रणाली पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार (MeitY एवं विधि एवं न्याय मंत्रालय) को एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस (National Database) स्थापित करने का निर्देश दिया।
पीठ ने सभी मध्यवर्तियों (Intermediaries) को अनिवार्य रूप से भारतीय पुलिस प्राधिकारियों को रिपोर्ट करने के लिए सख्त समय-सीमा निर्धारित की है और केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह 10 दिसंबर 2026 तक अनुपालन शपथपत्र (Compliance Affidavit) दाखिल करे।
सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायिक निर्देश एवं विनियामक व्यवस्था
1. हैश (Hash Identifiers) और यूआरएल (URL) का राष्ट्रीय डेटाबेस:
- खंडपीठ ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पुष्ट बाल यौन शोषण एवं दुर्व्यवहार सामग्री (Confirmed CSEAM) के डिजिटल फिंगरप्रिंट्स (Hash Identifiers) और संबंधित यूआरएल (URLs) का एक व्यापक केंद्रीय भंडार स्थापित करे।
- यह डेटाबेस गृह मंत्रालय के मौजूदा ‘सहयोग पोर्टल’ (Sahyog Portal) के भीतर या एक अलग स्वतंत्र रिपॉजिटरी के रूप में तैयार किया जा सकता है।
- सामग्री का संचयन वर्जित: अदालत ने स्पष्ट किया कि डेटाबेस में केवल ‘हैश वैल्यू’ और ‘यूआरएल’ होंगे, किसी भी स्थिति में हानिकारक वीडियो या तस्वीरों को संग्रहीत नहीं किया जाएगा।
- क्रॉस-चेक तंत्र: जब कोई एक प्लेटफॉर्म सामग्री हटाएगा, तो उसके हैश डेटाबेस में जुड़ेंगे, जिससे सभी सोशल मीडिया कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड होने वाली सामग्री को इस केंद्रीय डेटाबेस से मिलान (Cross-check) कर स्वतः ब्लॉक और डिलीट कर सकेंगी।
2. बहु-स्तरीय सत्यापन: 3 प्रशिक्षित मानव विश्लेषक (Human Analysts) अनिवार्य:
- वैध सामग्री के गलत निष्कासन (Erroneous Removal of Lawful Content) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन को रोकने के लिए अदालत ने कड़ा सुरक्षा तंत्र बनाया:
- प्रारंभिक स्क्रीनिंग के लिए विशेष सॉफ्टवेयर/एआई टूल्स का उपयोग किया जा सकता है।
- अंतिम निर्णय कम से कम 3 प्रशिक्षित मानव विश्लेषकों (Human Analysts) द्वारा स्वतंत्र रूप से किया जाएगा। तीनों द्वारा स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए जाने के बाद ही प्रविष्टि राष्ट्रीय डेटाबेस में शामिल होगी।
- डेटाबेस एक्सेस के सभी डिजिटल लॉग्स सुरक्षित रखे जाएंगे, आवधिक स्वतंत्र ऑडिट होगा और गलत तरीके से हटाई गई सामग्री के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) स्थापित होगा।
3. विदेशी एजेंसियों को रिपोर्टिंग पर्याप्त नहीं; भारतीय पुलिस को 2 घंटे में सूचना अनिवार्य:
- अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के उस रवैये की कड़ी निंदा की जहाँ वे सामग्री को केवल हटा देते हैं या अमेरिकी/विदेशी संस्थाओं (जैसे NCMEC) को रिपोर्ट कर भारतीय कानूनों की अनदेखी करते हैं।
- अदालत ने POCSO नियमावली, 2020 के नियम 11 का हवाला देते हुए कड़े समय-मानक तय किए:
| स्थिति / परिदृश्य | रिपोर्टिंग की अनिवार्य समय-सीमा एवं मंच |
| प्लेटफॉर्म द्वारा स्वतः संज्ञान (Due Diligence) | यदि प्लेटफॉर्म अपने आंतरिक टूल्स से अज्ञात मूल की CSEAM सामग्री हटाता है, तो उसे निष्कासन के 2 घंटे के भीतर स्थानीय पुलिस, विशेष किशोर पुलिस इकाई (SJPU) या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा। |
| उपयोगकर्ता की शिकायत पर कार्रवाई | शिकायत का समाधान होते ही तत्काल, और किसी भी हाल में समाधान के 2 घंटे के भीतर नामित भारतीय प्राधिकारियों को रिपोर्ट दर्ज करानी होगी। |
| डेटाबेस मिलान (Hash Match) पर निष्कासन | राष्ट्रीय डेटाबेस में पहले से मौजूद हैश से मिलान होकर हटने वाली सामग्री की साप्ताहिक समेकित रिपोर्ट (Consolidated Weekly Report) नोडल अथॉरिटी को जमा करनी होगी। |
4. पेवॉल और सब्सक्रिप्शन आधारित सामग्री की कड़ी जांच व राजस्व जब्ती (Disgorgement):
- अदालत ने निर्देश दिया कि पेवॉल (Paywalled) और पेड सब्सक्रिप्शन के पीछे चलने वाली सामग्री की कठोर जांच की जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पेड चैनलों की आड़ में बाल दुर्व्यवहार सामग्री का व्यावसायिक प्रसार न हो रहा हो।
- शीर्ष अदालत ने केंद्र से सिफारिश की कि ऐसे मध्यवर्तियों पर अनुकरणीय मौद्रिक जुर्माना (Exemplary Penalties) लगाया जाए और यदि किसी प्लेटफॉर्म ने ऐसी सामग्री के जरिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सदस्यता राजस्व कमाया है, तो उस राजस्व को जब्त और अधिहृत (Forfeited and Disgorged) करने के लिए आईटी नियमों में संशोधन किया जाए।
5. स्कूली पाठ्यक्रम में डिजिटल सुरक्षा और आयु-उपयुक्त यौन शिक्षा:
- पीठ ने रेखांकित किया कि केवल तकनीकी उपाय पर्याप्त नहीं हैं; बच्चों को ऑनलाइन खतरों को पहचानने, शोषण की रिपोर्ट करने और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के लिए जागरूक बनाना होगा।
- अदालत ने निर्देश दिया कि NCERT और राज्यों की SCERTs बाल मनोवैज्ञानिकों, शिक्षकों और अभिभावक विशेषज्ञों के परामर्श से डिजिटल सुरक्षा, सहमति (Consent), ‘सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श’ (Safe & Unsafe Touch) तथा ऑनलाइन शोषण से बचाव को प्राथमिक व माध्यमिक स्तर के मूल पाठ्यक्रम (Core Curriculum) का अनिवार्य हिस्सा बनाएं।
विखंडित रिपोर्टिंग (Fragmented Approach) बनाम एकीकृत केंद्रीय ढांचा
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│ CSEAM निष्कासन तंत्र: वर्तमान बनाम सुप्रीम कोर्ट मॉडल │
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【वर्तमान विखंडित प्रणाली (Fragmented)】 【सर्वोच्च न्यायालय का नया आदेश】 【मध्यवर्तियों की जवाबदेही (IT Rules)】
• एक प्लेटफॉर्म हटाता है, किंतु वही सामग्री • केंद्रीकृत नेशनल हैश डेटाबेस (Sahyog); • 24 घंटे में शिकायत पावती (Reference No)।
दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर बेरोकटोक घूमती है। एक जगह फ्लैग होते ही सभी पर ब्लॉक। • 2 घंटे में भारतीय पुलिस (SJPU) को सूचना।
• केवल विदेशी एजेंसियों को अनौपचारिक सूचना। • 3 स्वतंत्र मानव विश्लेषकों द्वारा पुष्टिकरण। • उल्लंघन पर टर्नओवर आधारित अनुकरणीय जुर्माना।
विधिक एवं विधायी विश्लेषण: क्या कहता है कानून?
- आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत सेफ हार्बर (Safe Harbour) का क्षरण:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 मध्यवर्तियों को तीसरे पक्ष द्वारा अपलोड की गई सामग्री के लिए कानूनी अभियोजन से सुरक्षा प्रदान करती है।
- किंतु 2024 के एस. हरीश निर्णय और 2021 के आईटी नियमों के तहत यह स्पष्ट है कि बाल यौन शोषण सामग्री (CSEAM) के मामलों में ‘सेफ हार्बर’ स्वतः लागू नहीं होता। यदि मध्यवर्ती सक्रिय तत्परता (Due Diligence) दिखाने, त्वरित निष्कासन करने और 2 घंटे के भीतर भारतीय पुलिस को सूचित करने में विफल रहता है, तो वह आईटी एक्ट की धारा 67B और POCSO एक्ट की धारा 15 के तहत आपराधिक षड्यंत्र या सहयोग के लिए सीधे अभियोजन का पात्र बन जाता है।
- राजस्व जब्ती का सिद्धांत (Doctrine of Disgorgement):
- प्रतिभूति और कॉरपोरेट कानून में प्रयुक्त होने वाले इस सिद्धांत को सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल बाल संरक्षण में विस्तारित करने का सुझाव दिया है।
- यदि कोई टेक प्लेटफॉर्म बच्चों के शोषण वाली सामग्री पर विज्ञापनों या सशुल्क सब्सक्रिप्शन से लाभ कमाता है, तो ऐसे अवैध लाभ को राज्य द्वारा पूर्णतः जब्त (Disgorge) कर लिया जाना चाहिए, ताकि व्यावसायिक हितों के चलते निगरानी में ढिलाई बरतने की प्रवृत्ति समाप्त हो सके।
विधिक विवरण
- केस संदर्भ: जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस व अन्य बनाम एस. हरीश व अन्य [विविध आवेदन संख्या 2553-2554/2026 – आपराधिक अपील संख्या 2161-2162/2024 – 2026 INSC 1149 – सर्वोच्च न्यायालय]
- पीठ: न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 15 अक्टूबर 2026 (विस्तृत आदेश प्रति: 17 अक्टूबर 2026)
- अगली सुनवाई की तिथि: 10 दिसंबर 2026 (अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का अंतिम दिन)
संबद्ध मंत्रालय व विधिक पक्षकार:
- याचिकाकर्ता: जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस (Just Rights for Children Alliance)
- भारत संघ की ओर से: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) एवं विधि एवं न्याय मंत्रालय (सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता उपस्थित)
- प्रासंगिक कानून एवं विधिक प्रावधान:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 — धारा 67B (बाल अश्लीलता व शोषण सामग्री का प्रकाशन/भंडारण), धारा 79 (मध्यवर्तियों की सशर्त देयता) एवं IT Rules, 2021 (नियम 3 व 4)
- लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act) — धारा 15 (CSEAM का संग्रहण/उपभोग) एवं POCSO नियमावली, 2020 का नियम 11 (अनिवार्य रिपोर्टिंग)
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 21 (बच्चों का जीवन व डिजिटल सुरक्षा), अनुच्छेद 19(1)(a) एवं अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय हेतु असाधारण अधिकार)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- डिजिटल बाल संरक्षण में राज्य और मध्यवर्तियों की संयुक्त विधिक जिम्मेदारी: ‘बाल यौन शोषण सामग्री के ऑनलाइन प्रसार को रोकने के लिए अलग-थलग कार्रवाई अपर्याप्त है; तकनीकी मध्यवर्तियों को एक केंद्रीय राष्ट्रीय हैश डेटाबेस के माध्यम से तुरंत निष्कासन करना होगा और भारतीय कानूनी एजेंसियों को 2 घंटे के भीतर रिपोर्ट करना सांविधिक रूप से अनिवार्य है।’
- अंतिम निर्देश: केंद्र सरकार को राष्ट्रीय हैश/यूआरएल डेटाबेस स्थापित करने, आईटी नियमों में संशोधन कर उल्लंघनकर्ता प्लेटफॉर्म्स पर भारी जुर्माने व राजस्व जब्ती का प्रावधान करने, NCERT के जरिए स्कूली पाठ्यक्रम में डिजिटल सुरक्षा शामिल करने, और 10 दिसंबर 2026 तक प्रगति रिपोर्ट का विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने का बाध्यकारी न्यायिक आदेश।
Rights For Child: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) |
| पीठ | न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला एवं न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन |
| मुख्य मुद्दा | इंटरनेट व सोशल मीडिया पर CSEAM का प्रसार रोकना और बिचौलियों (Intermediaries) की जवाबदेही तय करना |
| प्रस्तावित डेटाबेस | ‘सहयोग पोर्टल’ (Sahyog Portal) के तहत या एक अलग केंद्रीय डेटाबेस |
| तकनीकी उपकरण | हैश आइडेंटिफायर्स (Hash Identifiers) और URL लिस्टिंग का उपयोग |
| मुख्य कानूनी दायित्व | 1. सोशल मीडिया कंपनियों को CSEAM की सूचना 2 घंटे के भीतर पुलिस/साइबर सेल को देनी होगी। 2. IT नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर भारी वित्तीय जुर्माना (Exemplary Penalties) लगाने का सुझाव। 3. स्कूली पाठ्यक्रम में डिजिटल सुरक्षा और आयु-उपयुक्त शिक्षा शामिल करने के निर्देश। |
| अगली सुनवाई तिथि | अनुपालन रिपोर्ट (Affidavit) के साथ 10 दिसंबर 2026 |

