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मामले की पृष्ठभूमि: हाईकोर्ट का रुख और आंकड़े
- उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की रिपोर्ट:उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने अदालत को सूचित किया कि अवध बार एसोसिएशन (OBA) के कुल 5,108 सदस्य मतदान के लिए पात्र पाए गए थे। हालांकि, गहन जांच के बाद 155 सदस्यों के प्रैक्टिस प्रमाण पत्र (COP) में मतदान का स्थान लखनऊ OBA के बजाय कोई अन्य बार एसोसिएशन दर्ज था, जबकि 145 सदस्यों ने अपने प्रमाण पत्र का नवीनीकरण नहीं कराया था।
- BCI नियम 2015 का हवाला:बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम, 2015 (BCI Certificate of Practice Rules) का हवाला देते हुए खंडपीठ ने दोहराया कि अधिवक्ताओं को हर पांच साल में अपने COP का सत्यापन और नवीनीकरण कराना अनिवार्य है। वकालत करने और बार एसोसिएशन के चुनावों में मतदान अधिकार का प्रयोग करने के लिए वैध व सत्यापित प्रमाण पत्र होना अनिवार्य कानूनी शर्त है।
- दोहरे मतदान के आरोप पर टिप्पणी:सुनवाई के दौरान यह आरोप भी लगाया गया कि लगभग 400 व्यक्ति लखनऊ बार एसोसिएशन और सेंट्रल बार एसोसिएशन के चुनावों में पहले ही मतदान कर चुके हैं। हालांकि, मतदान में केवल दो दिन शेष होने के कारण कोर्ट ने कहा कि इस स्तर पर इसकी जांच के लिए समय पर्याप्त नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया जाएगा।
हाईकोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और भावी निर्देश
1. “वैध COP के बिना मतदान अधिकार नहीं”:
अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी पेशे की शुचिता और बार एसोसिएशनों की चुनावी पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केवल सक्रिय व सत्यापित वकीलों को ही मतदान का अधिकार दिया जा सकता है।
2. उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को ऑनलाइन पोर्टल बनाने का आदेश:
भविष्य के विवादों को रोकने के लिए हाईकोर्ट ने UP बार काउंसिल को 6 महीने के भीतर एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने का निर्देश दिया है। इस पोर्टल पर किसी भी अधिवक्ता का नाम या नामांकन संख्या दर्ज करके उसके COP की स्थिति, नवीनीकरण तिथि और किए गए बदलावों का ब्योरा देखा जा सकेगा। बार काउंसिल को 6 महीने बाद इस संबंध में अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करना होगा।
लखनऊ: अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961), बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015, ‘एक बार, एक वोट’ (One Bar, One Vote) के सिद्धांत, मतदाता सूची की शुचिता (Sanctity of Electoral Rolls), तथा बार एसोसिएशनों के चुनावों में वास्तविक प्रैक्टिसिंग अधिवक्ताओं के मताधिकार के संरक्षण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक महत्वपूर्ण और सुधारात्मक आदेश पारित किया है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) के न्यायमूर्ति राजन रॉय (Justice Rajan Roy) और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला (Justice Manjive Shukla) की खंडपीठ ने अवध बार एसोसिएशन (Oudh Bar Association – OBA) के 28 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित वार्षिक आम चुनावों से ठीक दो दिन पहले जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए 300 सदस्य अधिवक्ताओं को मतदान से बाहर (Barred from Voting) करने का निर्देश दिया है.
अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन अधिवक्ताओं के ‘प्रैक्टिस प्रमाण पत्र’ (Certificate of Practice – COP) में मतदान स्थल लखनऊ (OBA) के अतिरिक्त अन्यत्र दर्ज है अथवा जिनका COP नवीनीकृत नहीं हुआ है, वे चुनाव में मतदान के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, यदि कोई अधिवक्ता मतदान से पूर्व वैध नवीनीकरण प्रमाण प्रस्तुत करता है, तो उसे वोट डालने की अनुमति दी जा सकती है।
उच्च न्यायालय के मुख्य कानूनी निष्कर्ष एवं विधिक व्यवस्था
1. ‘हर 5 साल में COP का सत्यापन और नवीनीकरण अनिवार्य’
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने बीसीआई सत्यापन नियम, 2015 के अनिवार्य प्रावधानों को रेखांकित करते हुए कहा:
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया रूल्स, 2015 के तहत प्रत्येक अधिवक्ता को हर पांच वर्ष में अपने ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ (COP) का सत्यापन और नवीनीकरण कराना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
- वकालत करने और बार एसोसिएशन के चुनावों में मताधिकार का प्रयोग करने के लिए एक वैध, अद्यतन और सत्यापित COP प्रमाण पत्र प्राथमिक और अनिवार्य पूर्व-शर्त है।
- उत्तर प्रदेश बार काउंसिल द्वारा प्रस्तुत 5,108 सदस्यों की सूची में से विसंगति पाए जाने वाले 300 अधिवक्ताओं को चुनावी प्रक्रिया से तत्काल बाहर रखने का निर्देश दिया गया।
2. अपात्र 300 अधिवक्ताओं का विधिक वर्गीकरण:
पीठ ने 300 वकीलों को दो विशिष्ट श्रेणियों में विभाजित कर अपात्र घोषित किया:
- 155 अधिवक्ता: जिनके COP में मतदान/प्रैक्टिस का स्थान अवध बार एसोसिएशन, लखनऊ के अतिरिक्त कोई अन्य न्यायालय या बार दर्ज है।
- 145 अधिवक्ता: जिनके प्रैक्टिस प्रमाण पत्र की 5-वर्षीय अवधि समाप्त हो चुकी है और उन्होंने इसका विधिवत नवीनीकरण नहीं कराया है।
3. अन्य बार चुनावों में ‘दोहरे मतदान’ के आरोपों पर कोर्ट का रुख:
- सुनवाई के दौरान एक पक्षकार ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में शामिल लगभग 400 व्यक्ति पहले ही लखनऊ बार एसोसिएशन (LBA) और कलेक्ट्रेट स्थित सेंट्रल बार एसोसिएशन (CBA) के चुनावों में वोट डाल चुके हैं।
- खंडपीठ ने कहा कि मतदान में केवल दो दिन शेष हैं और इतने कम समय में इन गंभीर आरोपों की विस्तृत तथ्यात्मक जांच (Factual Inquiry) संभव नहीं है; अतः अदालत ने इस स्तर पर इस विवाद का फैसला करने से इनकार कर दिया।
भविष्य के चुनावों हेतु जारी सुधारात्मक दिशा-निर्देश (Directives)
चुनावी विवादों को स्थायी रूप से रोकने और फर्जी मतदान पर अंकुश लगाने के लिए उच्च न्यायालय ने निम्नलिखित बाध्यकारी निर्देश दिए:
- 6 महीने में ऑनलाइन COP सत्यापन पोर्टल: उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को निर्देश दिया गया कि वह अगले छह महीनों के भीतर एक पारदर्शी ऑनलाइन सिस्टम विकसित करे, जिसमें अधिवक्ता का नाम या राज्य बार काउंसिल नामांकन संख्या (Enrolment Number) दर्ज करते ही उसके COP की वैधता, स्थिति और प्रमाण पत्र में किए गए किसी भी बदलाव का विवरण सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हो। बार काउंसिल को छह माह बाद इस पर अनुपालन हलफनामा (Compliance Affidavit) दाखिल करना होगा।
- मूल COP प्रमाण पत्र (Original Certificate) की अनिवार्यता: अदालत ने निर्देश दिया कि भविष्य के सभी चुनावों में अधिवक्ताओं को केवल ‘COP कार्ड’ दिखाने पर नहीं, बल्कि ‘मूल COP प्रमाण पत्र’ (Original COP Certificate) प्रस्तुत करने पर ही मतदान की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, चल रहे 2026 के चुनाव में यह नियम अनिवार्य नहीं होगा, जब तक कि चुनाव अधिकारी इसे लागू करने का स्वतंत्र निर्णय न लें।
- बाहरी तत्वों के प्रवेश पर रोक: हाईकोर्ट प्रशासन को निर्देश दिया गया कि वह 28 अक्टूबर को मतदान के दिन पोलिंग परिसर में बाहरी लोगों, अनधिकृत व्यक्तियों और अपात्र मतदाताओं के प्रवेश को रोकने के लिए पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करे।
विधिक एवं संस्थागत विश्लेषण: ‘सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम बी.डी. कौशिक’ और चुनावी शुचिता
- ‘एक बार, एक वोट’ (One Bar, One Vote):
- सर्वोच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बनाम बी.डी. कौशिक और अमित सचदेवा मामलों में बार-बार स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिवक्ता एक वित्तीय/कैलेंडर वर्ष में केवल एक ही बार एसोसिएशन में अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकता है।
- यदि किसी अधिवक्ता के सीओपी (COP) में उसका कार्यक्षेत्र या वोटिंग स्थल जिला अदालत या अन्य फोरम दर्ज है, तो वह उसी वर्ष उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन (OBA) में मतदान करने का विधिक अधिकार खो देता है।
- फर्जी और निष्क्रिय वकीलों की छंटनी:
- बीसीआई सत्यापन नियमावली, 2015 का मुख्य उद्देश्य ही यह था कि जो लोग वकालत छोड़कर अन्य व्यवसायों में लग गए हैं या जिन्होंने अपने पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया है, वे सक्रिय वकीलों की संस्थागत राजनीति को प्रभावित न कर सकें।
- हाईकोर्ट का यह आदेश सुनिश्चित करता है कि केवल वास्तविक और वैध रूप से पंजीकृत अधिवक्ता ही अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करें।
विधिक विवरण
- न्यायालय: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (लखनऊ पीठ)
- पीठ: न्यायमूर्ति राजन रॉय एवं न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला (खंडपीठ)
- आदेश की तिथि: 26 अक्टूबर 2026
- संबद्ध चुनाव: अवध बार एसोसिएशन (OBA) वार्षिक आम चुनाव (मतदान तिथि: 28 अक्टूबर 2026)
- कुल पात्र मतदाता (प्रारंभिक): 5,108 अधिवक्ता
- मतदान से बाहर किए गए: 300 अधिवक्ता (155 अन्यत्र स्थान + 145 गैर-नवीनीकृत)
प्रासंगिक कानून एवं सांविधिक प्रावधान:
- अधिवक्ता अधिनियम, 1961 (Advocates Act, 1961)
- बार काउंसिल ऑफ इंडिया (सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस वेरिफिकेशन) रूल्स, 2015 — नियम 8 एवं 9 (5-वर्षीय नवीनीकरण)
- भारत का संविधान — अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय का जनहित याचिका क्षेत्राधिकार)
- संबद्ध न्यायिक सिद्धांत:
- बार चुनावों में मताधिकार का विधिक मानक: ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (COP) केवल वकालत का लाइसेंस नहीं बल्कि बार चुनाव में मतदान का मूल आधार है; जिस अधिवक्ता का COP सत्यापित नहीं है अथवा जिसका मतदान स्थल अन्यत्र दर्ज है, उसे बार एसोसिएशन के चुनाव में वोट डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती; डिजिटल सत्यापन प्रणाली के माध्यम से मतदाता सूची की पारदर्शिता बनाए रखना राज्य बार काउंसिल का वैधानिक दायित्व है।’
- वर्तमान स्थिति व अनुपालन निर्देश: 300 सदस्यों को 28 अक्टूबर के चुनाव से बाहर कर दिया गया है (नवीनीकरण का वैध प्रमाण प्रस्तुत करने वालों को छोड़कर); यूपी बार काउंसिल को 6 महीने के भीतर सार्वजनिक COP सत्यापन वेब पोर्टल तैयार कर अनुपालन हलफनामा पेश करने का अंतिम निर्देश जारी किया गया है।
Barred Lawyer: मामले का संक्षिप्त विवरण (At A Glance)
| विवरण | जानकारी |
| संबंधित अदालत | इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लखनऊ पीठ (Allahabad High Court, Lucknow Bench) |
| पीठ | न्यायमूर्ति राजन राय एवं न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला |
| संबंधित निकाय | अवध बार एसोसिएशन (Oudh Bar Association) एवं उत्तर प्रदेश बार काउंसिल |
| मतदान की तिथि | 28 अक्टूबर 2026 (कुल पात्र मतदाता: 5,108) |
| रोके गए मतदाता | कुल 300 वकील; (155 जिनका COP स्थान अन्यत्र दर्ज है + 145 जिनका COP नवीनीकृत/Renew नहीं था)। |
| अदालत का मुख्य निर्देश | 1. 300 वकीलों पर रोक: नवीनीकरण का वैध प्रमाण प्रस्तुत करने पर ही मतदान की अनुमति। 2. ऑनलाइन पोर्टल: UP बार काउंसिल को 6 महीने में COP सत्यापन पोर्टल बनाने का निर्देश। 3. मूल प्रमाण पत्र: भविष्य के चुनावों में केवल मूल COP प्रमाण पत्र से ही मतदान की अनुमति होगी। |

