Sunday, August 16, 2026
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Court News: दहेज के आरोप सामान्य मानव व्यवहार से भटकते हुए प्रतीत होते हैं…क्यूं कही अदालत ने यह बात

Court News: अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन सांगवान ने कहा, दहेज के आरोप सामान्य मानव व्यवहार से भटकते हुए प्रतीत होते हैं।

महिला ने जून 2014 में आत्महत्या कर ली थी

अदालत ने एक व्यक्ति को उसकी पत्नी के साथ क्रूरता करने और दहेज के लिए प्रताड़ित करने के आरोप से बरी कर दिया। महिला ने जून 2014 में आत्महत्या कर ली थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सचिन सांगवान ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी पति के खिलाफ संदेह से परे मामला साबित करने में असमर्थ रहा।

सगाई के समय कोई दहेज की मांग नहीं की गई थी…

आदेश में पिता की गवाही का हवाला दिया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सगाई से पहले या सगाई के समय कोई दहेज की मांग नहीं की गई थी। विवाह के छह महीने बाद उनकी बेटी मायके लौट आई थी और वहां लगभग पांच महीने तक रही थी, उस दौरान उसने दहेज को लेकर किसी भी तरह की प्रताड़ना की बात नहीं की थी। अदालत ने 4 अप्रैल को कहा, सामान्य मानव व्यवहार के अनुसार, यह आश्चर्यजनक प्रतीत होता है कि जब विवाह से पहले या तुरंत बाद कोई मांग नहीं की गई, तो अचानक चार लाख रुपये की भारी दहेज मांग कैसे उठ गई। अदालत ने पिता की गवाही में बदलाव और विरोधाभास पाए और आरोपों से जुड़े मुख्य तथ्यों पर कोई पुष्टिकरण न होने को रेखांकित किया।

प्रताड़ना की बातें सगे भाई व भतीजे से साझा करता…

अदालत ने कहा, सामान्य परिस्थितियों में, यदि शिकायतकर्ता (पिता) को दहेज की मांगों का सामना करना पड़ रहा था। वह उन्हें पूरा करने में असमर्थ था और उसकी बेटी को भी इस मांग के कारण प्रताड़ित किया जा रहा था। संभवतः वह अपनी समस्या अपने परिवार के अन्य सदस्यों जैसे कि अपने सगे भाई और भतीजे (दोनों अभियोजन गवाह) के साथ साझा करता। हालांकि, इन गवाहों द्वारा ऐसी किसी मांग का उल्लेख न करना, शिकायतकर्ता की गवाही को अविश्वसनीय बनाता है।

विवाद का कारण पति का बेरोजगार होना था..

चार्जशीट से अदालत को यह संकेत मिला कि दंपति के बीच विवाद का कारण पति का बेरोजगार होना था, और यह संभावना नहीं थी कि ससुराल वालों ने महिला को उसके संक्षिप्त वैवाहिक जीवन के दौरान प्रताड़ित किया हो। मृतका के कुछ रिश्तेदारों की गवाही भी केवल सुन-सुनाई बातों पर आधारित थी और विश्वसनीय नहीं मानी गई।

दहेज प्रताड़ना को अभियोजन सिद्ध नहीं कर सका

अदालत ने कहा, इस कारण, भले ही आरोपी और मृतका की शादी और विवाह के सात वर्षों के भीतर महिला की अस्वाभाविक मृत्यु असंदिग्ध रूप से सिद्ध हो गई हो, लेकिन दहेज की मांग और उस कारण प्रताड़ना को अभियोजन पक्ष संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका। आरोपी व्यक्ति के खिलाफ दहेज हत्या और पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा विवाहित महिला को प्रताड़ित करना के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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