मामला सारांश (At a Glance)
| पहलू | विवरण |
| माननीय पीठ | न्यायमूर्ति एस. एम. सुब्रमण्यम एवं न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार |
| मुख्य पक्षकार | राज्य प्राधिकरण बनाम टी. धनलक्ष्मी (अधीक्षक) |
| मुख्य कानूनी सिद्धांत | आपराधिक मुकदमा और विभागीय जांच एक साथ चल सकती हैं; समान दस्तावेज/गवाह होने पर भी विभागीय कार्रवाई नहीं रोकी जाएगी। |
Criminal Prosecution: मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (Criminal Prosecution) लंबित होना उसी मामले में विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही (Departmental Disciplinary Proceedings) चलाने में कोई बाधा नहीं है, भले ही दोनों कार्यवाहियां एक ही साक्ष्य और गवाहों पर आधारित क्यों न हों।
न्यायमूर्ति एस. एम. सुब्रमण्यम (Justice S.M. Subramaniam) और न्यायमूर्ति एन. सेंथिलकुमार (Justice N. Senthilkumar) की पीठ ने एकल पीठ (Single Judge) के 14 अक्टूबर, 2024 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने आपराधिक मुकदमा समाप्त होने तक अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।
अदालत की मुख्य कानूनी टिप्पणियां (Key Court Observations)
- आपराधिक बनाम विभागीय जांच के उद्देश्य में अंतर:“आपराधिक मुकदमा समाज के प्रति कर्तव्य के उल्लंघन या कानून तोड़ने के अपराध के लिए चलाया जाता है, जबकि विभागीय जांच का उद्देश्य लोक सेवा में अनुशासन और दक्षता (Discipline and Efficiency) बनाए रखना है।”
- दोनों कार्यवाहियां एक साथ चलने का नियम:
- पीठ ने माना कि जब तक आपराधिक मामले के आरोप अत्यधिक गंभीर प्रकृति के न हों और उनमें जटिल तथ्य या कानून शामिल न हों, तब तक विभागीय जांच और आपराधिक मुकदमे को एक साथ चलाने पर कोई कानूनी रोक (No Bar) नहीं है।
- यदि विभाग के पास कार्यवाही आगे बढ़ाने के लिए दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो विभागीय जांच पूरी करके अंतिम आदेश पारित करने में कोई बाधा नहीं है।
मामले की पृष्ठभूमि (Case Background)
- मामला: धर्मपुरी के वन इंजीनियरिंग विभाग (Forest Engineering Department) की अधीक्षक टी. धनलक्ष्मी (T Dhanalakshmi) को 2018 में सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) द्वारा रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
- विभागीय कार्रवाई और अपील:
- कर्मचारी को निलंबित कर मार्च 2023 में चार्ज मेमो जारी किया गया।
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की विशेष अदालत में आपराधिक मामला लंबित होने के आधार पर धनलक्ष्मी ने विभागीय कार्रवाई रोकने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां एकल पीठ ने उनके पक्ष में स्टे (Stay) दे दिया।
- खंडपीठ का निर्णय: राज्य सरकार/प्राधिकरण द्वारा दायर रिट अपील (Writ Appeal) को स्वीकार करते हुए डिविजन बेंच ने एकल पीठ के फैसले को खारिज कर दिया और अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रखने का रास्ता साफ किया।

