Thursday, September 24, 2026
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Ex-Army News: पूर्व सैनिकों के पुनर्वास की अनदेखी न करे सरकार, क्यूं कहा सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा…

Ex-Army News: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, पूर्व सैनिकों का प्रभावी पुनर्वास आवश्यक है ताकि रक्षा बलों के सेवा में लगे जवानों का मनोबल बना रहे।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को दी गई चुनौती

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि अगर पूर्व सैनिकों के पुनर्वास की अनदेखी की गई, तो प्रतिभाशाली युवा सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित नहीं होंगे। अदालत ने यह टिप्पणी एक महिला पूर्व सैनिक को नियुक्त करने का आदेश देते हुए की, जो भारतीय सैन्य नर्सिंग सेवा (IMNS) से सेवानिवृत्त हुई थीं। शीर्ष अदालत एक पूर्व सैनिक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे रहे थे, जिसमें एक महिला उम्मीदवार की याचिका स्वीकार की गई थी और उसकी तत्काल नियुक्ति का निर्देश दिया गया था।

IMNS के कर्मी पूर्व सैनिक श्रेणी के अंतर्गत आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते

याचिकाकर्ता, एक पूर्व सैनिक, जो भारतीय सेना की मेडिकल कोर में कैप्टन के रूप में कार्यरत थे, को एक विज्ञापन के तहत पंजाब सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) में अतिरिक्त सहायक आयुक्त (प्रशिक्षु) के रूप में चयनित किया गया और उन्होंने 2022 में सेवा शुरू की। IMNS से सेवानिवृत्त हुई थीं, ने भी उसी विज्ञापन के तहत पूर्व सैनिक श्रेणी में आवेदन किया था, लेकिन राज्य सरकार ने 2021 में उनकी उम्मीदवारी यह कहते हुए खारिज कर दी कि वे इस श्रेणी के अंतर्गत पात्र नहीं हैं। उनकी याचिका को एकल न्यायाधीश ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि IMNS के कर्मी पूर्व सैनिक श्रेणी के अंतर्गत आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते।

डिवीजन बेंच ने अपील स्वीकार कर ली

हालांकि, डिवीजन बेंच ने उनकी अपील स्वीकार कर ली और यह निष्कर्ष निकाला कि पंजाब पूर्व सैनिकों की भर्ती नियम, 1982 के तहत IMNS से सेवानिवृत्त व्यक्तियों को पूर्व सैनिक के लाभों से वंचित नहीं किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि अगर उत्तरदाता संख्या 4 योग्यता में सफल पाई जाती हैं, तो उनकी तत्काल नियुक्ति की जाए और उन्हें काल्पनिक (notional) सेवा लाभ भी दिए जाएं।

पंजाब से लगभग 89,000 सैनिक सेना में कार्यरत

नीतिगत निर्णय का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा, पंजाब से लगभग 89,000 सैनिक सेना में कार्यरत हैं, जो कि सेना की कुल संख्या का 7.7% है, जबकि पंजाब की राष्ट्रीय जनसंख्या में हिस्सेदारी मात्र 2.3% है। कोर्ट ने दोहराया, पूर्व सैनिकों का प्रभावी पुनर्वास रक्षा बलों के सेवा में लगे सैनिकों का मनोबल बनाए रखने के लिए आवश्यक है। यदि वेटरन्स के पुनर्वास की अनदेखी की गई, तो देश के प्रतिभाशाली युवा सशस्त्र बलों में शामिल होने के लिए प्रेरित नहीं होंगे।

कोर्ट ने कहा

राज्य सरकार यह मानती है कि पंजाब राज्य का निवासी यदि संघ के सशस्त्र बलों में शामिल होता है, तो यह राष्ट्र सेवा है। सशस्त्र बलों में सेवा करने के लिए शारीरिक फिटनेस आवश्यक है, जो उम्र से जुड़ी होती है। जब सैनिक सेवा पूरी कर सशस्त्र बलों से बाहर आते हैं, तो भले ही वे सेना के लिए ‘spent force’ माने जाएं, लेकिन नागरिक जीवन के लिए वे अब भी युवा और सक्षम होते हैं। पूर्व सैनिकों को नागरिक समाज में जोड़ना केवल रोज़गार का अवसर नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रहित और एक सुसंस्कृत व स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए भी आवश्यक है।

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