Monday, August 10, 2026
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Bar-Bench: वकील ने जज से कहा- कोई स्कोर सेटल कर रहे हैं क्या…फिर कड़कड़डूमा अदालत में जज-वकील के बीच तल्खी

Bar-Bench: दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने वकील अनिल कुमार गोस्वामी के संदिग्ध और आपत्तिजनक व्यवहार पर कार्रवाई की है।

दिल्ली हाईकोर्ट और दिल्ली बार काउंसिल को पत्र भेजा गया

कड़कड़डूमा अदालत की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमचला ने वकील के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट और दिल्ली बार काउंसिल को पत्र भेजा है, ताकि उनके पेशेवर आचरण का मूल्यांकन किया जा सके। अदालत ने यह कहते हुए टिप्पणी की कि वकील ने कार्यवाही के दौरान “अनावश्यक टिप्पणियां कीं और न्यायिक प्रक्रिया को बदनाम किया। 7 अप्रैल को पारित आदेश में, अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमचला ने उल्लेख किया कि अधिवक्ता अनिल कुमार गोस्वामी, जो दो आरोपियों के मुख्य वकील की अनुपस्थिति में प्रॉक्सी वकील के रूप में उपस्थित हुए थे, उन्होंने कहा कि एक पुलिस गवाह की जिरह नहीं हो सकी क्योंकि मुख्य वकील आपात स्थिति में अपने पैतृक स्थान चले गए थे।

गोस्वामी की प्रतिक्रिया “चौंकाने वाली” थी: कोर्ट

न्यायाधीश ने आदेश में लिखा, गोस्वामी से पूछा गया कि जब वह पिछली कई तारीखों से आरोपियों पंकज शुक्ला और रोहित शुक्ला के वकील के रूप में पेश हो रहे हैं, तो क्या वह गवाह की जिरह के लिए तैयारी नहीं कर सकते थे? इस पर गोस्वामी ने जवाब दिया कि वह केवल एक प्रॉक्सी वकील हैं। जज प्रमचला ने तब गोस्वामी से कहा कि दस्तावेजों के अनुसार, उन्होंने खुद को इन आरोपियों का मुख्य वकील बताया है और उन्होंने वकालतनामा पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके जवाब में गोस्वामी ने तीखा उत्तर देते हुए कहा: “कोई स्कोर सेटल कर रहे हैं क्या?” और “मुझे क्या मालूम आपने और स्टेनो ने क्या लिखा?” जज ने आदेश में कहा कि गोस्वामी की प्रतिक्रिया “चौंकाने वाली” थी और इससे उन्हें यह मानने पर विवश होना पड़ा कि वकील कुछ और ही मंशा के साथ कोर्ट में आए थे।

गोस्वामी को आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था

न्यायाधीश ने कहा, “मेरे मन में कोई संदेह नहीं कि एक अधिवक्ता का ऐसा व्यवहार बार काउंसिल द्वारा निर्धारित पेशेवर मानकों के अनुरूप नहीं है।” अदालत ने रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि गोस्वामी को आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था। आदेश में कहा गया, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गोस्वामी अब तक अधिकृत वकील के रूप में उपस्थिति दर्ज कराते रहे, और अब पलटी मारते हुए अदालत को ही इसके लिए दोषी ठहरा रहे हैं।” अदालत ने गोस्वामी के व्यवहार को “संदिग्ध और आपत्तिजनक” बताया और कहा, “इसलिए यह मामला दिल्ली बार काउंसिल और दिल्ली हाईकोर्ट को भेजा जा रहा है, ताकि यह तय किया जा सके कि एक वकील से न्यायालय में कैसी पेशेवर अपेक्षाएं की जाती हैं और क्या उक्त व्यवहार न्यायिक कार्यवाही को बदनाम करने की श्रेणी में आता है।

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