Tuesday, August 11, 2026
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Public Employment: अस्थायी शिक्षक से बच्चे के भविष्य की गारंटी की उम्मीद करना तर्कहीन है…सरकारी नौकरियों में अस्थायी व्यवस्था खत्म करें, पढ़े यह फैसला

Public Employment: सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सरकार को अब तदर्थवाद (Ad-hocism) यानी अस्थायी नियुक्तियों की व्यवस्था को समाप्त करना चाहिए।

भर्ती प्रक्रिया का रोडमैप (Recruitment Roadmap)

चरणगतिविधि
अधिसूचना4 सप्ताह के भीतर विशेष रूप से पैरा-शिक्षकों के लिए विज्ञापन।
पात्रताशैक्षणिक अंक (मैट्रिक, इंटर, स्नातक), शिक्षक प्रशिक्षण और TET/JTET अंक।
मेरिट लिस्टजिलावार और राज्य स्तर पर मेरिट सूची का प्रकाशन।
पूर्णता10 सप्ताह के भीतर नियुक्ति आदेश जारी करना।

झारखंड के पैरा-शिक्षकों का मामला

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की पीठ ने स्पष्ट किया कि शिक्षा को मजबूत करना समय की मांग है, न कि इसे अस्थायी उपायों के साथ सब्सिडी देना। कोर्ट ने सार्वजनिक रोजगार (Public Employment) के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा है कि विशेष रूप से शिक्षा क्षेत्र पर जोर देते हुए झारखंड सरकार को एक बड़ा निर्देश दिया है। यह मामला झारखंड के उन पैरा-शिक्षकों (Para-teachers) की याचिकाओं पर आधारित था, जिन्होंने वरिष्ठता और निरंतर सेवा के आधार पर अपनी सेवाओं को नियमित (Regularize) करने की मांग की थी।

कोर्ट का मुख्य निर्देश: 50% आरक्षण

  • सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को कई आदेश दिए हैं।
  • विशेष अधिसूचना: अगले 4 हफ्तों के भीतर राज्य भर में सहायक शिक्षकों और ‘सहायक आचार्यों’ की कुल रिक्तियों का 50 प्रतिशत हिस्सा विशेष रूप से पैरा-शिक्षकों के लिए अधिसूचित किया जाए।
  • भर्ती प्रक्रिया: यह भर्ती ‘झारखंड प्राथमिक विद्यालय शिक्षक नियुक्ति नियमावली, 2012’ और 2022 के नियमों के अनुसार होगी।
  • समय सीमा: पूरी भर्ती प्रक्रिया (मेरिट लिस्ट और नियुक्ति पत्र सहित) को 10 सप्ताह के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया है।

तदर्थवाद (Ad-hocism) पर कोर्ट की टिप्पणी

  • कोर्ट ने अस्थायी नियुक्तियों की आलोचना की।
  • नौकरी की सुरक्षा: कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए नौकरी की सुरक्षा अनिवार्य है। एक शिक्षक-छात्र का बंधन अस्थायी नहीं होता।
  • कार्यपालिका का कर्तव्य: अब समय आ गया है कि कार्यपालिका समय-समय पर ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ करे और सार्वजनिक रोजगार में तदर्थवाद को खत्म करे।
  • शिक्षा की गुणवत्ता: केवल शिक्षा प्रदान करना उद्देश्य नहीं है, बल्कि व्यापक और उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करना लक्ष्य होना चाहिए। एक अस्थायी शिक्षक से बच्चे के भविष्य की गारंटी की उम्मीद करना तर्कहीन है।

नियमितीकरण (Regularisation) पर रुख

  • कोर्ट ने पैरा-शिक्षकों के पक्ष में रिक्तियां निकालने का आदेश दिया, लेकिन उनकी नियमितीकरण की मांग को खारिज कर दिया।
  • Recruitment Rules: कोर्ट ने कहा कि सीधे नियमित करना कानून द्वारा स्वीकृत भर्ती के नए रास्ते बनाने जैसा होगा, जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।
  • समान काम-समान वेतन: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ‘समान काम के लिए समान वेतन’ कोई स्वचालित अधिकार नहीं है। पैरा-शिक्षक हालांकि कक्षा में समान कार्य करते हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारियां और जवाबदेही नियमित शिक्षकों के समान व्यापक नहीं होतीं।

संतुलन बनाने का प्रयास

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक बीच का रास्ता निकालता है। एक तरफ, यह पैरा-शिक्षकों को नियमित पदों पर आने का एक ठोस अवसर (50% कोटा) प्रदान करता है, तो दूसरी तरफ यह स्पष्ट करता है कि नियमितीकरण केवल स्थापित कानूनी नियमों के माध्यम से ही हो सकता है। कोर्ट का यह संदेश स्पष्ट है— कार्यपालिका को अब “कामचलाऊ” व्यवस्था छोड़कर स्थायी और जवाबदेह सिस्टम बनाना होगा।

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