SC News: सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व IAS प्रोबेशनर पूजा खेडकर को अग्रिम जमानत के दौरान दिल्ली पुलिस से पूछा- क्या वह ड्रग माफिया है या आतंकी?
ओबीसी और दिव्यांग कोटे का गलत फायदा उठाने का आरोप
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि खेडकर ने कोई हत्या नहीं की है, न ही वह NDPS एक्ट के तहत अपराधी है। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी करें, लेकिन यह भी देखें कि उसने सब कुछ खो दिया है और अब उसे कहीं नौकरी नहीं मिलेगी। खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में ओबीसी और दिव्यांग कोटे का गलत फायदा उठाया। कोर्ट ने खेडकर को जांच में पूरा सहयोग करने और गवाहों को प्रभावित न करने की हिदायत दी। साथ ही कहा कि अगर शर्तों का उल्लंघन होता है तो दिल्ली पुलिस अग्रिम जमानत रद्द करने की अर्जी दे सकती है।
25 हजार रुपए की नकद जमानत और दो जमानती
कोर्ट ने खेडकर को 25 हजार रुपए की नकद जमानत और दो समान जमानतदारों के आधार पर राहत दी।
जांच में सहयोग का दावा
खेडकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि उनकी मुवक्किल जुलाई 2024 से जांच में पूरा सहयोग कर रही हैं और अब तक सात बार पुलिस के सामने पेश हो चुकी हैं।
दिल्ली पुलिस ने किया विरोध
दिल्ली पुलिस के वकील ने खेडकर की अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उन्होंने दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर परीक्षा में बार-बार शामिल होकर नियमों का उल्लंघन किया है।
पहले हाईकोर्ट ने खारिज की थी जमानत
हाईकोर्ट ने खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर मामला बनता है और यह जांच जरूरी है कि क्या यह किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा है।
UPSC ने की थी कार्रवाई
UPSC ने खेडकर के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया था। आरोप है कि उन्होंने अपनी पहचान छिपाकर आरक्षण का लाभ लिया और परीक्षा में कई बार शामिल हुईं।
खेडकर ने सभी आरोपों को नकारा
पूजा खेडकर ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है।
अंतरिम राहत पहले ही मिल चुकी थी
15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने खेडकर को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी और दिल्ली सरकार व UPSC से जवाब मांगा था। इसके बाद हाईकोर्ट ने 12 अगस्त 2024 को उनकी याचिका पर नोटिस जारी कर गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी, जिसे समय-समय पर बढ़ाया गया।

