Monday, August 17, 2026
HomeLaw Firms & Assoc.Bar-Bench: रोहिणी कोर्ट रूम में तीखी बहस का वीडियो वायरल…रोहिणी कोर्ट के...

Bar-Bench: रोहिणी कोर्ट रूम में तीखी बहस का वीडियो वायरल…रोहिणी कोर्ट के जज न्यायिक कार्य से हटाए गए, पढ़िए कड़ा प्रशासनिक कदम

Bar-Bench: दिल्ली उच्च न्यायालय (Delhi High Court) ने एक बेहद त्वरित और कड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए रोहिणी कोर्ट के जिला न्यायाधीश (District Judge) राकेश कुमार को उनके न्यायिक कार्यों से मुक्त कर दिया है।

सोशल मीडिया पर जज-वकील की तीखी बहस हुई थी वायरल

यह कार्रवाई तब हुई जब न्यायाधीश और एक वकील के बीच कोर्ट रूम में हुई तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दिल्ली के सभी बार एसोसिएशनों ने इसके विरोध में हड़ताल (काम बंद रखने) का आह्वान कर दिया था। उन्हें तत्काल प्रभाव से दिल्ली न्यायिक अकादमी (Delhi Judicial Academy) से संबद्ध (Attach) कर दिया गया है। दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश और हाई कोर्ट के अन्य न्यायाधीशों ने रोहिणी कोर्ट (उत्तर-पश्चिम जिला) के जिला न्यायाधीश-04, राकेश कुमार को हटाकर दिल्ली न्यायिक अकादमी में डायवर्टेड क्षमता में भेजने का निर्णय लिया है। उनकी जगह पर धीरज मित्तल को रोहिणी कोर्ट का नया जिला न्यायाधीश नियुक्त किया गया है, जो इससे पहले इसी न्यायिक अकादमी में अतिरिक्त निदेशक (Additional Director) के पद पर तैनात थे।

वायरल वीडियो में क्या था? (The Courtroom Exchange)

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में एक अधिवक्ता—जिन्हें बार का एक वरिष्ठ नेता बताया जा रहा है—न्यायाधीश पर उनके खिलाफ अपमानजनक शब्द का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए सुने जा सकते हैं। वकील न्यायाधीश से कह रहे हैं कि वे उनके साथ बदतमीजी न करें। इसके जवाब में न्यायाधीश राकेश कुमार भी वकील से कहते दिख रहे हैं कि वे उन्हें (जज को) धमकी न दें।

वकीलों की समन्वय समिति (Coordination Committee) का कड़ा रुख

  • दिल्ली के सभी जिला अदालत बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। ‘अशोभनीय आचरण’ का आरोप: समिति ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई और कहा कि न्यायाधीश राकेश कुमार का व्यवहार एक अधिवक्ता के प्रति “अत्यधिक आपत्तिजनक और गरिमा के विपरीत” (Highly Objectionable and Unbecoming Conduct) था।
  • तीन सूत्रीय मांग और हड़ताल की चेतावनी: समिति ने प्रस्ताव पारित कर मांग की थी कि जज का तुरंत तबादला किया जाए, उनसे न्यायिक कार्य वापस लिया जाए और उनके आचरण की जल्द से जल्द जांच शुरू की जाए। इसी मांग को लेकर सोमवार (18 मई, 2026) को दिल्ली की सभी जिला अदालतों में न्यायिक कार्य पूरी तरह से निलंबित (Strike) रखने का आह्वान किया गया था।

हाई कोर्ट का त्वरित दखल: हड़ताल से पहले लिया फैसला

चूंकि वकीलों की हड़ताल से सोमवार को हजारों वादियों (Litigants) को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता, इसलिए हाई कोर्ट प्रशासन ने रविवार को ही इस मामले में दखल दिया। वकीलों की मुख्य मांगों (तबादला और न्यायिक कार्य वापस लेना) को स्वीकार करते हुए जज को न्यायिक अकादमी भेज दिया गया, ताकि अदालतों में कामकाज सामान्य रूप से चल सके।

मामले का सारांश (Quick Highlights)

कानूनी बिंदुइलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय
माननीय न्यायाधीशजस्टिस राजन रॉय और जस्टिस ए. के. चौधरी (लखनऊ पीठ)
याचिकाकर्ताएस.एन. शुक्ला (महासचिव, लोक प्रहरी NGO)
चुनौती दिया गया कानूनउत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल (सदस्यों की उपलब्धियां, भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1980
न्यायालय का संदेशनेताओं को मिलने वाली पेंशन सार्वजनिक सेवा के बदले वैधानिक अधिकार है, जिसे कोर्ट नीतिगत आधार पर बंद नहीं कर सकता।

न्यायपालिका की गरिमा और कार्यसंस्कृति पर असर

यह घटना दर्शाती है कि सोशल मीडिया और डिजिटल पारदर्शिता के इस दौर में कोर्ट रूम के भीतर का आचरण अब केवल चार दीवारों तक सीमित नहीं है। हाई कोर्ट का यह त्वरित फैसला साफ करता है कि न्यायपालिका की छवि और बार व बेंच (वकीलों और जजों) के बीच के संतुलन को बनाए रखने के लिए उच्च न्यायालय किसी भी प्रकार के अनुशासनहीनता या विवाद को हल्के में नहीं लेगा।

दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकीलों का 18 मई 2026 को काम बंद का ऐलान

  • यह पूरा विवाद रोहिणी कोर्ट के जिला न्यायाधीश-04 (District Judge) श्री राकेश कुमार-V और रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष (President) के बीच कोर्ट रूम के भीतर हुई तीखी नोकझोंक के बाद शुरू हुआ।
  • विवाद का मुख्य कारण (The Trigger): रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट रूम में कार्यवाही के दौरान जब अधिवक्ता (जो बार एसोसिएशन के नेता भी हैं) ने न्यायाधीश से एक मामले में ‘पासओवर’ (Passover) यानी मामले को कुछ देर बाद सुनने का अनुरोध किया, तो न्यायाधीश ने उसे खारिज कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई, जिसने देखते ही देखते एक गंभीर विवाद का रूप ले लिया। वायरल वीडियो में वकील न्यायाधीश पर अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगा रहे हैं, जबकि न्यायाधीश उन्हें धमकी न देने की हिदायत दे रहे हैं।
  • बार समन्वय समिति का कड़ा रुख और प्रस्ताव: इस घटना के विरोध में दिल्ली के सभी जिला कोर्ट बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति (Coordination Committee) ने रविवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक के बाद समिति ने न्यायाधीश के आचरण को “अत्यधिक आपत्तिजनक और पद की गरिमा के विपरीत” (Highly Objectionable and Unbecoming Conduct) बताते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया।
  • न्यायिक कार्य वापस लेने की मांग: समिति ने मांग की कि न्यायाधीश राकेश कुमार को रोहिणी कोर्ट से तुरंत स्थानांतरित (Transfer) किया जाए और उनसे सभी न्यायिक कार्य वापस लिए जाएं।
  • जांच की मांग: उनके इस आचरण के खिलाफ जल्द से जल्द एक आधिकारिक जांच (Enquiry) शुरू की जाए।
  • 18 मई को पूर्ण कार्य बहिष्कार: जिला अदालतों के वकीलों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए समिति ने 18 मई 2026 (सोमवार) को दिल्ली की सभी जिला अदालतों में काम पूरी तरह बंद रखने का प्रस्ताव पारित किया।

वादियों (Litigants) पर असर

भले ही दिल्ली हाई कोर्ट ने रविवार को ही जज के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई कर वकीलों की मुख्य मांगों को पूरा कर दिया है, लेकिन समन्वय समिति के पूर्व निर्णय के अनुसार आज (18 मई) दिल्ली की सभी जिला अदालतों में वकीलों के काम से दूर रहने के कारण अदालती कामकाज प्रभावित रहेगा। इसके चलते दूर-दराज से आने वाले मुकदमों के वादियों को नई तारीखें मिलने की संभावना है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Patna
overcast clouds
28 ° C
28 °
28 °
89 %
2.1kmh
100 %
Mon
35 °
Tue
33 °
Wed
34 °
Thu
35 °
Fri
34 °