Monday, August 17, 2026
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Maintenance Case: जानिए मुंबई पुलिस सीपी पर क्या लगे आरोप…बेसहारा महिला व उसके 5 वर्ष का बच्चा भीख मांग रहा, पढ़िए पुलिस का खेला पकड़ा गया

Maintenance Case: गुजरात की एक फैमिली कोर्ट ने मुंबई पुलिस कमिश्नर (Mumbai Police Commissioner) को कारण बताओ नोटिस (Showcause Notice) जारी कर अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

यह मामला मुंबई के डोंगरी इलाके के रहने वाले एक 33 वर्षीय व्यक्ति से जुड़ा है, जो जूनागढ़ में रह रही अपनी अलग रह रही पत्नी और नाबालिग बेटे को अदालत द्वारा तय भरण-पोषण (Maintenance) राशि देने में लगातार चूक (Default) कर रहा है। अदालत ने उसके खिलाफ कारावास का वारंट (Imprisonment Warrant) जारी किया था, जिसे मुंबई की डोंगरी पुलिस तामील करने में विफल रही।

केशोद फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज का 14 पन्नों वाला नोटिस

कानूनी आदेशों की अवहेलना और पुलिसिया लापरवाही पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए जूनागढ़ जिले की केशोद फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज पी.एच. सिंह ने 14 पन्नों का कड़ा नोटिस जारी किया। मुंबई पुलिस पर आरोप लगाया कि वह एक बेसहारा महिला और उसके 5 साल के बच्चे को भीख मांगने जैसी स्थिति में छोड़कर आरोपी पति को “बचाने” का काम कर रही है।

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यह है पूरा मामला? (The Dispute)

  • 2022 में शुरुआत: जूनागढ़ की एक 33 वर्षीय महिला ने 2022 में अपने मुंबई निवासी पति (जो एक निजी कंपनी में कार्यरत है) के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का मामला दर्ज कराया था।
  • अदालत का आदेश (जून 2024): फैमिली कोर्ट ने जून 2024 में पत्नी के लिए 4,000 रुपये और उनके 5 साल के बेटे के लिए 2,000 रुपये प्रति माह का गुजारा भत्ता तय किया था।
  • वारंट और वसूली: पति ने आदेश की पूरी जानकारी होने के बावजूद पैसे नहीं दिए, जिसके बाद बकाया राशि 1.8 लाख रुपये से अधिक हो गई। कोर्ट ने आदेश का पालन न करने पर पति के खिलाफ सजा और जेल वारंट जारी किया।

कोर्ट ने मुंबई पुलिस की रिपोर्ट को कहा-झूठा, फर्जी और मनगढ़ंत

  • अदालत ने पाया कि मुंबई की डोंगरी पुलिस बार-बार कोर्ट के वारंट को यह कहकर बिना तामील किए (Unexecuted) लौटा रही थी कि आरोपी उस पते पर नहीं रहता और फरार है। लेकिन कोर्ट ने इस झूठ को पकड़ लिया।
  • वही पता, दोहरा मापदंड: अदालत ने नोट किया कि जिस पते पर पुलिस आरोपी के न मिलने का दावा कर रही थी, उसी पते का इस्तेमाल वह पति खुद अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराने और कानूनी कार्यवाही के लिए कर रहा था। यहां तक कि डोंगरी पुलिस खुद उसी पते पर पति द्वारा दर्ज शिकायतों पर नोटिस जारी कर रही थी।
  • कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: जज पी.एच. सिंह ने कहा, “यह अदालत के लिए वास्तव में चौंकाने वाला है। डोंगरी पुलिस के अधिकारी ‘झूठी, फर्जी और मनगढ़ंत रिपोर्ट’ जमा कर रहे थे। उनका स्पष्टीकरण दुर्भावनापूर्ण इरादे से किया गया महज एक दिखावा (Eyewash) है।”

‘भारतीय न्याय संहिता (BNS)’ के तहत कार्रवाई की चेतावनी

  • अदालत ने मुंबई पुलिस प्रमुख को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कोर्ट के सामने उपस्थित होकर स्पष्ट करें कि किन परिस्थितियों में वारंट बिना तामील किए लौटे। साथ ही उन्हें यह रिपोर्ट भी देनी होगी कि क्या आरोपी अपनी पत्नी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए डोंगरी पुलिस स्टेशन में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो रहा था या नहीं।
  • नोटिस में चेतावनी: “देश के पुलिस अधिकारी देश की किसी भी अदालत द्वारा जारी किए गए समन और वारंट को तामील करने के लिए बाध्य हैं। यदि इस मामले में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, तो मुंबई पुलिस कमिश्नर और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की उन धाराओं के तहत दंडात्मक कार्यवाही शुरू की जा सकती है, जो कानून की अवज्ञा करने, लोक सेवक द्वारा जानबूझकर गलत दस्तावेज तैयार करने और किसी अपराधी को सजा से बचाने से संबंधित हैं।”

मामले का सारांश (Quick Highlights)

मुख्य कानूनी बिंदुजूनागढ़ फैमिली कोर्ट का आदेश
प्रिंसिपल जजन्यायाधीश पी.एच. सिंह (केशोद, जूनागढ़)
मामलाभरण-पोषण की बकाया राशि (₹1.8 लाख+) न देने पर पति के खिलाफ जेल वारंट।
पुलिस पर आरोपआरोपी को बचाने के लिए कोर्ट में झूठी और मनगढ़ंत रिपोर्ट पेश करना।
अदालत का कड़ा संदेशपुलिस न्यायिक आदेशों का मखौल नहीं उड़ा सकती। लापरवाही पर कमिश्नर स्तर के अधिकारी को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा।

अदालती आदेशों के सम्मान की बहाली

यह आदेश इस लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है कि अक्सर अंतर-राज्यीय (Inter-state) मामलों में पुलिस दूसरे राज्य की अदालतों के वारंट को गंभीरता से नहीं लेती। गुजरात की अदालत ने मुंबई पुलिस के शीर्ष नेतृत्व को सीधे समन जारी कर यह संदेश दिया है कि न्याय प्रक्रिया में ढिलाई और किसी रसूखदार या दोषी को बचाने के प्रयास को न्यायपालिका कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

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